कोराडी की राख से हांफ रहा उत्तर नागपुर: पूर्व मंत्री नितिन राऊत ने विधानसभा में सरकार को घेरा
Nagpur Air Pollution: कोराडी ताप विद्युत केंद्र और वेकोलि खदानों से उड़ रही फ्लाई ऐश को लेकर उत्तर नागपुर में स्वास्थ्य संकट की चिंता बढ़ी। विधानसभा में भी मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया गया।
- Written By: अंकिता पटेल
फ्लाई ऐश, कोराडी, प्रदूषण, उत्तर नागपुर,(सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur Fly Ash Koradi Thermal Power Plant: नागपुर जिले के कोराडी ताप विद्युत केंद्र और वेकोलि की खदानों से निकलने वाली फ्लाई ऐश के कारण उत्तर नागपुर के नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। इस गंभीर मुद्दे को विधानसभा में उठाते हुए राज्य के पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक नितिन राऊत ने सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया।
राऊत ने कहा कि बेझनबाग, नारा, नारी, इंदोरा, मानकापुर, गोधनी और उप्पलवाड़ी सहित कई घनी आबादी वाले क्षेत्रों में उड़ती राख फैल रही है जिससे नागरिकों को विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ताप विद्युत परियोजनाओं कारण क्षेत्र का भूजल और पेयजल भी प्रदूषित हो रहा है।
प्रशासन की संवेदनहीनता पर सवाल
राऊत ने कहा कि उन्होंने पिछले बजट सत्र में भी यह मुद्दा उठाया था लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की।
उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की सर्विलांस समिति की बैठक पिछले डेढ़ वर्ष से नहीं हुई है, साथ ही प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य शिविर आयोजित नहीं किए जा रहे हैं।
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श्वसन और अस्थमा के मरीजों में बढ़ोतरी
राऊत ने विधानसभा में प्रस्तुत अपने निवेदन के माध्यम से बताया कि फ्लाई ऐश प्रदूषण के कारण उत्तर नागपुर क्षेत्र में श्वसन संबंधी रोगों, अस्थमा और फेफड़ों की अन्य बीमारियों के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। उन्होंने मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों में विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर लगाए जाएं तथा वसन और अस्थमा जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए तत्काल प्रभावी उपाय किए जाएं।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि उत्तर नागपुर के नागरिकों को प्रदूषण के संकट से राहत दिलाने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं, साथ ही पर्यावरणीय नियमों के अनुसार प्रभावित नागरिकों को उचित मुआवजा भी दिया जाए। इस संबंध में प्रस्तुत निवेदन को विधानसभा की याचिका समिति को भेज दिया गया है।
निर्माण कार्य के लिए जिम्मेदार ठहराना गलत
विदर्भ के सरकारी अस्पतालों और चिकित्सा महाविद्यालयों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के बीच वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों पर अनावश्यक प्रशासनिक जिम्मेदारियां थोपना उचित नहीं है।
यह मुद्दा कांग्रेस विधायक नितिन राऊत ने विधानसभा में उठाया। सदन में बोलते हुए राऊत ने कहा कि अस्पतालों और चिकित्सा महाविद्यालयों की इमारतों का निर्माण कार्य पब्लिक वर्क डिपार्टमेट के माध्यम से किया जाता है। डीन (अधिष्ठाता) चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञ होते हैं, इंजीनियर नहीं।
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इसलिए निर्माण संबंधी मामलों के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराना या उन पर दबाव बनाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की व्यवस्था से विशेषज्ञ डॉक्टरों का मनोबल प्रभावित होता है और उनकी चिकित्सा सेवाओं पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।
