कोयला कर्मियों की पेंशन में 25 वर्षों से सुधार नहीं
- Written By: नवभारत डेस्क
Representative image: Twitter
- नाममात्र का मिल रहा है निवृत्ति वेतन
- न होती है बैठक, न ही निर्णय
- जमा के पत्र को गडकरी का समर्थन
नागपुर. रिटायर होने वाले कोयला अधिकारी-कर्मचारियों को पेंशन स्कीम का पूरा लाभ नहीं मिल रहा है. उन्हें आज भी 25 वर्ष पूर्व तय नियमों के अनुसार भी पेंशन दी जा रही है जो अत्यंत कम है. ट्रस्टी की न तो बैठक होती है और न ही कोई निर्णय लिया जाता है. कोल कंपनियों से रिटायर होने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या 5 लाख के ऊपर पहुंच गई है.
राष्ट्रीय खान मजदूर फेडरेशन के महासचिव एसक्यू जमा ने पुन: इस मुद्दे को उठाया है. उनके प्रयासों को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का भी समर्थन मिला है और उन्होंने भी इस मुद्दे को कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी के समक्ष रखा है.
कोल इंडिया की पेंशन स्कीम संबंधी अध्यादेश वर्ष 1998 में लागू किया गया था. हालांकि इस स्कीम में 1 अप्रैल 1994 से रिटायर होने वाले अधिकारी, कर्मचारियों को भी शामिल किया गया था लेकिन इस स्कीम का पूरा लाभ कर्मचारियों को नहीं मिल रहा है. 25 वर्ष से कर्मचारी पुराने नियम के अनुसार पेंशन ले रहे हैं. पॉलिसी बनाते वक्त आश्वासन दिया गया था कि हर 3 वर्ष में नीति की समीक्षा होगी लेकिन ऐेसा हुआ नहीं.
सम्बंधित ख़बरें
नागपुर में बुलडोजर वाली दबंगई: जमीन हड़पने के लिए तोड़ दिया बंद ढाबा; 8 दिन बाद जागी कलमेश्वर पुलिस
नागपुर में 30 जून से खुलेंगे स्कूल; पहले दिन शत-प्रतिशत मुफ्त किताबें बांटने का दावा हवा, अभी सिर्फ 72% सप्लाई
गलती से भेजा था कंटेंट नहीं चली दलील, इंस्टाग्राम अकाउंट सस्पेंड, नागपुर हाई कोर्ट ने याचिका की खारिज
नागपुर: शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कामों से बड़ी मुक्ति; अब सिर्फ शनिवार को ही स्कूलों से मांगी जाएगी जानकारी
महंगाई में त्रस्त कर्मचारी
जमा ने कहा कि ईपीएफओ को महंगाई के साथ जोड़कर भुगतान किया जाता है, जबकि कोयला कर्मचारियों की नीति में ऐेसा कुछ भी नहीं है. कई कर्मचारी आज भी 2000, 5000, 10,000 पेंशन में काम चला रहे हैं. ऐसे लोगों को घर चलाना मुश्किल हो गया है. वेतन में सुधार होने के बाद कुछ बदलाव हुए हैं लेकिन पुराने लोग अभी भी संकट में हैं. कोयला कर्मचारियों को अब भी अंतिम वेतन का 25 फीसदी पेंशन मिलता है, जबकि वर्तमान पगार का 50 फीसदी मिलना चाहिए.
पेंशन योजना सोशल सिक्योरिटी को ध्यान में रखकर तैयार की जाती है लेकिन आरंभ से ही इसके प्रति सरकार का रवैया ठीक नहीं है. सरकार अपनी नई पॉलिसी के तहत कर्मचारियों की भर्ती नहीं कर रही है. कर्मचारियों की कमी के कारण पेंशन फंड लगातार कमजोर हो रहा है. सरकार को कर्मचारियों के हित में इस फंड को मजबूत करना चाहिए. सरकार व कोल इंडिया संयुक्त रूप से इसके लिए प्रयास करें.
-एसक्यू जमा
