गलती से भेजा था कंटेंट नहीं चली दलील, इंस्टाग्राम अकाउंट सस्पेंड, नागपुर हाई कोर्ट ने याचिका की खारिज
Nagpur Case Instagram Account: नागपुर में आपत्तिजनक सामग्री भेजने पर निलंबित किए गए इंस्टाग्राम अकाउंट को बहाल करने से HC ने इनकार कर दिया। अदालत ने मेटा के सामुदायिक मानकों के उल्लंघन को गंभीर माना।
- Written By: अंकिता पटेल
इंस्टाग्राम अकाउंट, नाबालिग, आपत्तिजनक सामग्री, प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सौजन्य AI)
Nagpur Instagram Account Suspension: नागपुर में इंस्टाग्राम अकाउंट पर आपत्तिजनक कंटेंट प्रेषित किए जाने के बाद मेटा द्वारा प्राथमिक स्तर पर इंस्टाग्राम अकाउंट निलंबित कर दिया गया। इसे चुनौती देते हुए अकाउंट होल्डर ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका पर दोनों पक्षों की बीच हुई कड़ी बहस के बाद न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने भी किसी तरह की राहत देने से इनकार कर याचिका सिरे से खारिज कर दी।
यह अकाउंट बाल यौन शोषण, दुव्र्व्यवहार और नग्नता से संबंधित मेटा (Meta) के सामुदायिक मानकों के उल्लंघन के कारण बंद किया गया था। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में स्वीकार किया कि उसने बातचीत के दौरान एक नाबालिग को यौन रूप से आपत्तिजनक सामग्री भेजी थी। हालांकि उसका तर्क था कि यह कृत्य पूरी तरह से अनजाने में हुआ था।
वह किसी ‘फिट व्यक्ति’ की तस्वीर साझा करना चाहता था लेकिन जल्दबाजी में गलत क्लिप अटैच हो गई। याचिकाकर्ता का यह भी कहना था कि उसे यह जानकारी नहीं थी कि प्राप्तकर्ता की उम्र 18 वर्ष से कम है और खाता निलंबित करने से पहले उसे कोई चेतावनी या अपनी गलती सुधारने का मौका नहीं दिया गया।
सम्बंधित ख़बरें
नागपुर: शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कामों से बड़ी मुक्ति; अब सिर्फ शनिवार को ही स्कूलों से मांगी जाएगी जानकारी
BEST हड़ताल खत्म लेकिन काम पर नहीं लौटे पूरे कर्मचारी, बस सेवा अब भी बुरी तरह प्रभावित
चंद्रपुर के जिवती में मातंग समाज का विशाल मोर्चा, अनुसूचित जाति आरक्षण के उपवर्गीकरण की उठी मांग
नागपुर में ‘नॉन-रेवेन्यू वाटर’ पर घमासान; मार्च 2027 तक इसे 25% से नीचे लाने के लिए OCW ने झोंकी ताकत
मेटा और GAC की सख्त कार्रवाई
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट को बताया गया कि केंद्र सरकार द्वारा 2021 आईटी नियमों के तहत गठित ‘शिकायत अपीलीय समिति’ ने याचिकाकर्ता की अपील को खारिज करते हुए निलंबन को सही ठहराया। मेटा की नीति के अनुसार बाल यौन शोषण सामग्री पोस्ट करने जैसे गंभीर मामलों में केवल एक बार उल्लंघन होने पर भी खाते को स्थायी रूप से डिसेबल किया जा सकता है।
मेटा ने यह भी दावा किया कि याचिकाकर्ता के खाते पर ऐसे उल्लंघनों के कई मामले पाए गए थे। अदालत में सुनवाई के दौरान सूचना प्रौद्योगिकी नियम 2021 के नियम 3(1)(b) और 3(1)(c) का प्रमुखता से हवाला दिया गया।
इन नियमों के अनुसार, यदि कोई उपयोगकर्ता अश्लील, पीडोफिलिक या बच्चों के लिए हानिकारक सामग्री साझा करता है तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (मध्यस्थ) को बिना कोई अवसर या चेतावनी दिए तुरंत खाता समाप्त या निलंबित करने का अधिकार है।
सुनवाई का मौका न मिलने की शिकायत निराधार
याचिकाकर्ता के इस दावे को गलत पाया गया कि उसे अपना पक्ष रखने का मौका नहीं मिला। GAC ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया आयकर अधिनियम की ‘फेसलेस अपील’ की तरह एक डिजिटल प्रारूप है। इस प्रक्रिया के तहत याचिकाकर्ता को पोर्टल के माध्यम से अपने दस्तावेज और स्पष्टीकरण जमा करने का पूरा अवसर प्रदान किया गया था।
यह भी पढ़ें:-नागपुर: शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कामों से बड़ी मुक्ति; अब सिर्फ शनिवार को ही स्कूलों से मांगी जाएगी जानकारी
अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि इस मामले में कोई विवाद नहीं है क्योंकि याचिकाकर्ता ने स्वयं नाबालिग को बाल यौन शोषण की श्रेणी में आने वाली सामग्री भेजना स्वीकार किया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि मेटा की नीतियों और 2021 के नियमों के तहत खाते का निलंबन पूरी तरह से वैध है और इस कार्रवाई में कोई भी गैर कानूनी पहलू नहीं है। इन टिप्पणियों के साथ अदालत ने मेरिट न होने के कारण याचिका को अंतत: खारिज कर दिया।
