नागपुर: कोर्ट में मनपा का यू-टर्न, होटल हरदेव पर 50 लाख का डिमांड नोटिस वापस
Nagpur High Court: नागपुर हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान मनपा ने होटल हरदेव पर लगाए गए 50.67 लाख रुपये के जुर्माने की मांग वापस ले ली। इसके बाद अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया।
- Written By: अंकिता पटेल
होटल हरदेव, नागपुर मनपा, हाई कोर्ट, जुर्माना वापस,(साेर्स:-सोशल मीडिया)
Nagpur NMC Penalty Withdrawn High Court: नागपुर जिले में होटल हरदेव को जारी किए गए डिमांड को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान अचानक मनपा की ओर से होटल पर लगाए गए 50,67,948 रुपए के भारी भरकम जुर्माने की मांग को आधिकारिक तौर पर वापस लेने की जानकारी कोर्ट को दी। इसके बाद न्यायाधीश अनिल पानसरे और न्यायाधीश रजनीश व्यास ने इसे स्वीकृत कर याचिका का निपटारा कर दिया। याचिकाकर्ता ‘होटल हरदेव’ के संचालक विशाल जायसवाल की ओर से अधिवक्ता अक्षय नाईक और मनपा की ओर से अधि। एएम काजी ने पैरवी की।
मनपा ने वापस लिया अपना दावा
सुनवाई के दौरान मनपा के वकील काजी ने 6 जुलाई 2026 का एक लिखित दस्तावेज़ अदालत में पेश किया। उन्होंने अदालत को सूचित किया कि मनपा ने 50,67,948 रुपये की जुर्माना राशि से संबंधित अपनी मांग वापस ले ली है।
मनपा के इस कदम पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता (होटल प्रबंधन) द्वारा विरोध स्वरूप जमा की गई राशि वापस की जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता उचित आवेदन प्रस्तुत करता है तो 4 सप्ताह के भीतर यह रिफंड किया जाना चाहिए।
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कमिश्नर के खिलाफ वारंट की आई थी नौबत
गत सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने मनपा के मुकदमों में वकीलों के लगातार गैर हाजिर रहने पर कड़ी नाराजगी जताई थी। अदालत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान मनपा की तरफ से किसी के पेश न होने पर मनपा कमिश्नर के खिलाफ जमानती वारंट तक जारी कर दिया था, अदालत ने (रिट याचिका संख्या 5624/2018) मामले पर सुनवाई की थी। सुनवाई के दौरान जब मामले को पुकारा गया तो प्रतिवादियों (मनपा) की तरफ से कोई भी उपस्थित नहीं हुआ।
हाईकोर्ट की फटकार के बाद मनपा आयुक्त पर वारंट वापस
अदालत ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए मनपा कमिश्नर के खिलाफ 5,000 रुपये का जमानती वारंट जारी कर दिया था किंतु कुछ समय बाद मनपा की ओर से वकील अदालत में उपस्थित हुए। उन्होंने अदालत को आश्वस्त किया कि वे इस मामले में पूरी जिम्मेदारी से उपस्थित रहेंगे। उनके इस आश्वासन के बाद अदालत ने कमिश्नर के खिलाफ जारी जमानती वारंट के आदेश को वापस ले लिया।
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भले ही अदालत ने वारंट वापस ले लिया हो लेकिन कोर्ट ने इस आदेश की एक प्रति सीधे नागपुर मनपा आयुक्त को भेजने का निर्देश दिया था, कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि यह संज्ञान में लेना जरूरी है कि ऐसे कई मामले हैं जिनमें प्रतिवादी आयुक्त एक पक्ष है लेकिन सुनवाई के समय कोई उपस्थित नहीं रहता। अदालत ने कमिश्नर को सख्त हिदायत दी थी कि वे न्यायालयीन मामलों के लिए उचित व्यवस्था करें और यह सुनिश्चित करें कि मामलों की सुनवाई में वकीलों की अनिवार्य रूप से उपस्थिति हो।
