नागपुर हाई कोर्ट की सरकार को कड़ी फटकार: अधिकारियों की नाकामी का खामियाजा कोई बुजुर्ग पेंशनभोगी क्यों भुगते?

Nagpur High Court: पेंशन नहीं मिलने पर 73 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मचारी की याचिका पर नागपुर HC ने राज्य सरकार को फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा पेंशनभोगी नहीं भुगत सकते।
Nagpur High Court sharply reprimands the government: Why should an elderly pensioner bear the brunt of officials' failure?
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Nagpur High Court Pension Delay: नागपुर दशकों तक सेवा देने के बाद सेवानिवृत्ति को लंबा समय बीत जाने के बाद भी पेंशन नहीं मिलने के कारण 73 वर्षीय अशोक म्हैसकर ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल पानसरे और न्यायाधीश रजनीश व्यास ने राज्य सरकार और उसके अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई, अदालत ने सरकारी विभागों के बीच आपसी तालमेल की कमी और लापरवाही पर सख्त नाराजगी जताते हुए स्पष्ट किया कि अधिकारियों की विफलता का खामियाजा कोई बुजुर्ग पेंशनभोगी क्यों भुगते। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि अगस्त 2025 से सरकार द्वारा अनुदान न मिलने के कारण उन्हें पेंशन नहीं दी जा रही है।

वारंट जारी करने की चेतावनी

सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकारी वकील से जानना चाहा कि क्या विभागों की इस लापरवाही के कारण याचिकाकर्ता को उसके जायज हक से वंचित किया जाना चाहिए? अदालत ने तुरंत विभाग के सचिव को दोपहर 2:30 बजे पेश होने का आदेश दिया।

जब सरकारी वकील ने इतने कम समय में सचिव की उपस्थिति सुनिश्चित करने में असमर्थता जताई, तो अदालत ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि यदि ऐसा है, तो वे सचिव के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के लिए मजबूर होंगे। इसके बाद सरकारी वकील ने व्यक्तिगत रूप से सचिव से बात कर 2:30 बजे तक बयान देने का आश्वासन दिया।

विभागों का एक-दूसरे पर आरोप

दोपहर 2:30 बजे की सुनवाई में सरकारी वकील ने राज्य सरकार के जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग के संयुक्त सचिव द्वारा हस्ताक्षरित एक दस्तावेज पेश किया। इस दस्तावेज में बताया गया कि जिला परिषद द्वारा पिछली ग्रांट का 'उपयोगिता प्रमाण पत्र' जमा न करने के कारण आगे का अनुदान जारी नहीं किया जा सका।

इस जवाब पर हाई कोर्ट ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने कहा कि यदि जिला परिषद ने उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं दिया था, तो सचिव को उनसे जवाब तलब करना चाहिए था या उन्हें इसके लिए मजबूर करना चाहिए था।

सचिव स्थिति से निपटने में असमर्थ, कोर्ट ने कहा

कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा, यह कम्युनिकेशन दर्शाता है कि सचिव स्थिति से निपटने में असमर्थ हैं और उनका अपने अधीनस्थों पर कोई नियंत्रण या पर्यवेक्षी अधिकार नहीं है। इसी विफलता के कारण याचिकाकर्ता जैसे लोगों को अनावश्यक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

अदालत के बेहद कड़े रुख और शाम 4:30 बजे तक जवाब मांगने के बाद जल आपूर्ति और स्वच्छता विभाग मंत्रालय के अतिरिक्त मुख्य सचिव पराग जैन नैनुतिया, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के समक्ष उपस्थित हुए।

उन्हें याचिकाकर्ता की परेशानी से अवगत कराया गया। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने अदालत को आश्वासन दिया कि इस मामले में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और पूरे प्रकरण की जांच के लिए उन्होंने एक सप्ताह का समय मांगा। अदालत ने उनके अनुरोध को स्वीकार करते हुए सुनवाई स्थगित कर दी।

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