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नए मेडिकल कॉलेजों के लिए नियम हुए सख्त, बिना पूरी बिल्डिंग नहीं मिलेगी मंजूरी; विदर्भ पर बड़ा असर

NMC New Rules Medical College: राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने नए मेडिकल कॉलेजों और PG सीटों के लिए नियमों को सख्त कर दिया है। अब अधूरी इमारतों और वादों के आधार पर मंजूरी नहीं मिलेगी। जानिए क्या असर होगा।

  • Written By: आकाश मसने
Updated On: Jul 17, 2026 | 04:25 PM

नागपुर मेडिकल कॉलेज (सोर्स: सोशल मीडिया)

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NMC New Rules Impact On Vidarbha Medical Colleges: देश में मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आयोग ने नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, नए स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू करने तथा सीटों में वृद्धि के लिए नियमों को और अधिक कठोर बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने के बाद अधूरी इमारतों, अस्थायी अस्पतालों या निर्माणाधीन परिसरों के आधार पर किसी भी संस्थान को अनुमति मिलने की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।

अब कागजी वादों पर नहीं मिलेगी मंजूरी

प्रस्तावित नियमों के अनुसार, मेडिकल कॉलेज की मान्यता या सीट वृद्धि के लिए आवेदन करने वाले संस्थानों को आवेदन के समय ही यह सुनिश्चित करना होगा कि कॉलेज भवन, संबद्ध शिक्षण अस्पताल, छात्रावास, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, व्याख्यान कक्ष तथा अन्य आवश्यक शैक्षणिक और चिकित्सा सुविधाएं पूरी तरह विकसित और उपयोग के लिए तैयार हों। केवल भविष्य में निर्माण पूरा होने का आश्वासन या निर्माणाधीन परियोजना के आधार पर आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

विद्यार्थियों की शिक्षा और मरीजों की सुरक्षा प्राथमिकता

एनएमसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि अधूरे दस्तावेजों अथवा निर्धारित मानकों को पूरा किए बिना किए गए आवेदन प्रारंभिक स्तर पर ही निरस्त किए जा सकते हैं। आयोग का मानना है कि मेडिकल शिक्षा जैसी संवेदनशील व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अस्थायी या अपूर्ण सुविधाओं के आधार पर अनुमति देना विद्यार्थियों की शिक्षा और मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं, दोनों की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।

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सूत्रों के अनुसार, एनएमसी का उद्देश्य केवल मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक संस्थान में विद्यार्थियों को आधुनिक चिकित्सा उपकरणों, पर्याप्त मरीजों की उपलब्धता, प्रशिक्षित फैकल्टी और उच्च स्तरीय अस्पताल सुविधाओं के बीच गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिले। इसी सोच के तहत बुनियादी ढांचे को मंजूरी की सबसे महत्वपूर्ण शर्त बनाया जा रहा है।

विदर्भ के मेडिकल कॉलेजों पर क्या होगा असर?

मेडिकल शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में पहचान रखने वाले नागपुर में सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में कई चिकित्सा संस्थान संचालित हो रहे हैं। शहर शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय व अस्पताल (नागपुर मेडिकल कॉलेज) तथा इंदिरा गांधी शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय व अस्पताल (मेयो) में विस्तार और नई इमारतों का निर्माण कार्य जारी है तथा भविष्य में सीटों के विस्तार और नए पाठ्यक्रमों के प्रस्ताव भी आने की संभावना है।

यह भी पढ़ें:- अब चौराहों पर सर्विस रिवॉल्वर के साथ दिखेंगे ट्रैफिक पुलिसकर्मी, नागपुर पुलिस कमिश्नर ने जारी किया आदेश

हालांकि जानकारों का कहना है कि नागपुर के प्रमुख मेडिकल संस्थानों में आवश्यक स्थायी ढांचा और संसाधन पहले से उपलब्ध हैं। ऐसे में वर्तमान व्यवस्था पर तत्काल किसी बड़े प्रभाव की आशंका नहीं है लेकिन विदर्भ सहित राज्य में दूसरी जगह शुरू किये गये मेडिकल कॉलेजों की हालत अच्छी नहीं है।

भंडारा और गोंदिया में मेडिकल कॉलेज की स्वतंत्र इमारत नहीं है। चंद्रपुर में इमारत तो बन गई है, लेकिन अब पीडब्ल्यूडी द्वारा हस्तांतरित नहीं की गई है। गड़चिरोली में भी इमारत का अभाव है। अमरावती में अब तक नये कॉलेज के लिए जगह ही तय नहीं हुई है। यही स्थिति वासिम और बुलढाना में भी बनी हुई है। प्रस्ताव के तहत इन मेडिकल कॉलेजों के विकास के लिए लंबा वक्त लग सकता है। सबसे अधिक दिक्कतें स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू करने में आएंगी।

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Published On: Jul 17, 2026 | 04:25 PM

Topics:  

  • Maharashtra News
  • Medical College Nagpur
  • Nagpur News

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