अहिल्यानगर के कोतुल में 2,000 साल पुरानी सातवाहन कालीन बस्ती मिली, डेक्कन कॉलेज की खुदाई में ऐतिहासिक खुलासा
Deccan College Pune: अहिल्यानगर जिले के कोतुल में डेक्कन कॉलेज की खुदाई में 2,000 वर्ष पुरानी सातवाहन कालीन बस्ती और व्यापारिक केंद्र के अवशेष मिले हैं। कई बहुमूल्य पुरावशेष बरामद।
- Written By: रूपम सिंह
पुरानी सातवाहन कालीन बस्ती (प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स- सोशल मीडिया)
Pune Kotul Archaeological Site: अहिल्यानगर जिले के कोतुल गांव में हुई पुरातात्विक खुदाई ने डेक्कन के प्राचीन इतिहास से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण और रोमांचक अध्याय उजागर किया है। पुणे स्थित प्रसिद्ध डेक्कन कॉलेज पोस्ट ग्रेजुएट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा किए गए प्रारंभिक उत्खनन में ऐसे ठोस साक्ष्य मिले हैं, जो यह प्रमाणित करते हैं कि लगभग 2 हजार वर्ष पहले सातवाहन काल में कोतुल एक समृद्ध और प्रमुख व्यापारिक केंद्र हुआ करता था।
भौगोलिक दृष्टि से यह स्थान जुन्नर और नाशिक जैसे तत्कालीन महत्वपूर्ण व्यापारिक नगरों को जोड़ने वाले प्राचीन मार्ग पर स्थित था, जिससे स्पष्ट होता है कि यह विभिन्न व्यापारिक गतिविधियों का एक मुख्य पड़ाव रहा होगा। भौगोलिक और रणनीतिक रूप से कोतुल गांव सह्याद्रि पर्वतमाला की सबसे ऊंची चोटी कलसुबाई की तलहटी में और ऊपरी मुला नदी के दाहिने किनारे पर बसा हुआ है।
डेक्कन कॉलेज में डॉक्टरेट शोधार्थी के प्रयासों को मिली सफलता
इस ऐतिहासिक खोज की पृष्ठभूमि डेक्कन कॉलेज के भू-पुरातत्व विभाग के प्रोफेसर डॉ. पी. डी. साबले के मार्गदर्शन में तैयार हुई। उनके निर्देशन में डॉक्टरेट शोधार्थी अभिलाषा मिश्रा ने अपने विशेष अध्ययन के तहत पूरी मुला नदी घाटी का गांव-गांव जाकर गहन भू-पुरातात्विक सर्वेक्षण किया था। इसी विस्तृत अध्ययन के निष्कर्षों के आधार पर कोतुल में खुदाई करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया।
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डॉ. साबले के अनुसार, इस उत्खनन का मुख्य उद्देश्य इस विशिष्ट स्थल के पुणे शहर के सांस्कृतिक विकास को गहराई से समझना, प्राचीन व्यापार में इसकी वास्तविक भूमिका का आकलन करना तथा पूरे क्षेत्र के क्रमिक ऐतिहासिक विकास का पुनर्निर्माण करना था।
एक किलोमीटर लंबा और आधा किलोमीटर चौड़ा स्थल
यह ऐतिहासिक स्थल लगभग एक किलोमीटर लंबा और आधा किलोमीटर चौड़ा है। वर्तमान समय में इस पुरातात्विक क्षेत्र के लगभग साठ प्रतिशत हिस्से में आधुनिक गांव बसा हुआ है, जबकि शेष चालीस प्रतिशत हिस्सा कृषि कार्य के लिए उपयोग में लाया जाता है।
पुरातत्वविदों का दृढ़ विश्वास है कि सातवाहन काल के दौरान यह स्थान रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण था, जहां से पश्चिमी तट तथा दक्कन के प्रमुख व्यापारिक मार्गों पर आसानी से नियंत्रण और संचालन किया जा सकता था।
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कई बहुमूल्य प्राचीन अवशेष-पुरावशेष मिले
उत्खनन के दौरान शोधकर्ताओं को कई बहुमूल्य प्राचीन अवशेष और पुरावशेष प्राप्त हुए हैं। खुदाई में मध्यकालीन आवासीय संरचनाओं के अवशेषों के साथ-साथ लाल और धूसर-काले रंग के विशिष्ट मृदभांड, सुपारी के आकार के कलात्मक मनके, टेराकोटा की बनी गेंदें, कांच और मिट्टी की चूड़ियों के टुकड़े, मिट्टी की मानव प्रतिमाओं के खंडित हिस्से, प्राचीन धातु का सिक्का तथा विभिन्न पशुओं की अस्थियां मिली हैं।
इन पुरावशेषों की बनावट से साफ संकेत मिलते हैं कि कोतुल लंबे समय तक एक सुसंगठित बस्ती और अत्यंत सक्रिय व्यापारिक केंद्र के रूप में फलता-फूलता रहा। इस महत्वपूर्ण खुदाई से न केवल व्यापारिक गतिविधियों बल्कि तत्कालीन कृषि व्यवस्था और जनजीवन के खानपान की भी बेहद दिलचस्प जानकारियां सामने आई हैं।
