NEET पेपर लीक के बाद नागपुर की कोचिंग संस्थाएं सवालों के घेरे में, शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
Nagpur NEET Paper Leak: नीट पेपर लीक के बाद नागपुर में कोचिंग संस्थाओं की भूमिका पर सवाल तेज हो गए हैं। जूनियर कॉलेजों में नियमित साइंस कक्षाएं नहीं लगने के आरोप भी सामने आए हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
नीट पेपर लीक, कोचिंग संस्थान,(सोर्स: सौजन्य AI)
Nagpur NEET Paper Leak Coaching Centres: नागपुर नीट पेपर लीक प्रकरण में कोचिंग संस्थाओं और उनके संचालकों की भूमिका को लेकर सवाल खड़े हो गये हैं। पिछले कुछ वर्षों में 11वीं व 12वीं साइंस की क्लासेस जूनियर कॉलेजों में कम और कोचिंग संस्थाओं में अधिक लगती हैं। अक्सर छात्रों की पहचान उनके जूनियर कॉलेज की यूनिफॉर्म से होती है लेकिन शहर में मामला कुछ विपरीत ही है। यहां छात्रों की पहचान उनकी कोचिंग के नाम से होती है।
इतना सब कुछ खुलेआम होने के बाद भी शिक्षा विभाग आंखें बंद किए हुए है क्योंकि अधिकारियों की जेबें गरम हो रही हैं। नीट पेपर लीक प्रकरण से पहले ही विभाग में 12वीं के पेपर भी लीक हुए थे। मामला एसआईटी में जाने के बाद लंबी जांच चली और कोचिंग संस्थाओं का भंडाफोड़ हुआ। सूत्र बताते हैं कि इस मामले में और गहराई से जांच होती तो और भी कोचिंग संस्थाओं के नाम सामने आते। फिलहाल स्थिति विचित्र बनी हुई है।
छात्र 10वीं की परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करने के लिए जोरदार तैयारी करते हैं और 11वीं में शहर के नामी जूनियर कॉलेजों में प्रवेश प्राप्त करते हैं लेकिन चौंकाने वाला ‘सत्य’ यह है कि अधिकांश जूनियर कॉलेजों में साइंस की 11वीं व 12वीं की क्लासेस ही नहीं लगतीं। अनुदानित कॉलेजों में सरकार द्वारा शिक्षकों को वेतन दिया जाता है। इसके बाद भी वहां क्लासेस नहीं होतीं। प्राइवेट और बिना अनुदानित जूनियर कॉलेजों में साइंस में प्रवेश तो होते हैं लेकिन छात्र वर्षभर नियमित क्लासेस करने नहीं जाते।
सम्बंधित ख़बरें
छत्रपति संभाजीनगर: तबादलों के खिलाफ सड़कों पर उतरीं घाटी अस्पताल की नर्सें, दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
नासिक के रामकुंड में पानी की किल्लत और गंदगी से बुरा हाल, दूषित पानी में अनुष्ठान करने को मजबूर श्रद्धालु
नागपुर में कंटेनर से 464 लैपटॉप चोरी का खुलासा, 4 करोड़ का माल बरामद; आरोपी गिरफ्तार
नासिक ट्रैफिक एजुकेशन पार्क फिर होगा शुरू: विवाद के बाद महापौर की पहल पर मनपा देगा पूरा सहयोग
प्रैक्टिकल भी सुविधानुसार
अधिकाश जूनियर कॉलेजों ने कोचिंग संस्थाओं से टाइअप कर रखा है। इस हालत में नियमित क्लासेस जूनियर कॉलेजों में नहीं बल्कि कोचिंग संस्थाओं में चलती है। जिस तरह जूनियर कॉलेजो का यूनिफॉर्म होता है उसी तरह कोचिंग संस्थाओं ने अपना-अपना यूनिफॉर्म तय कर रखा है। छात्र कोचिंग के यूनिफॉर्म में जाते हैं, वहीं जूनियर कॉलेजों में केवल प्रैक्टिकल करने के लिए जाते हैं।
इसके लिए भी कोचिंग संस्थाएं बस का इंतजाम करती है। प्रैक्टिकल क्लास भी कोचिंग संस्थाओं की सुविधानुसार ही होती है। यदि कोई छात्र तय तिथि पर प्रिक्टिकल सहित प्रिक्टिकल एग्जाम में न पहुंच सके तो उसका भी जुगाड़ हो जाता है।
अधिकारियों की जेबें गरम, इसलिए चुप्पी
कोचिंग से टाइअप के बारे में शिक्षा विभाग के सभी अधिकारियों को जानकारी है। विभागीय शिक्षा उपसंचालक से लेकर माध्यमिक शिक्षाधिकारी तक सभी जानते हैं। इतना ही नहीं, अधिकारियों के बेटे-बेटियां भी कोचिंग में ही जाते हैं। इसके बाद भी कभी कोई कार्रवाई नहीं की गई, इसकी मुख्य वजह कोचिंग संस्थाओं की अधिकारियों के साथ साठगांठ है।
यह भी पढ़ें:-नागपुर में कंटेनर से 464 लैपटॉप चोरी का खुलासा, 4 करोड़ का माल बरामद; आरोपी गिरफ्तार
वहीं दूसरी ओर जुनियर कॉलेजों के प्राचार्य द्वारा भी समय-समय पर अधिकारियों को ‘खुश’ किया जाता है। यही वजह है कि यह करोड़ों का कारोबार पिछले कई क्याँ से फलफूल रहा है लेकिन इससे व्यवस्था का कबाड़ा हो गया है। कई छात्र नीट, जेईई मैं सफल नहीं होने के बाद शिक्षा की दिशा ही बदल देते हैं,
यूनिफॉर्म, बैग और नोट्स का भी पैकेज
सभी कोचिंग संस्थाओं की फीस अलग-अलग है, नागपुर में फीस तय करने का दायरा परिया के अनुसार है, फीस के अलावा यूनिफॉर्म, बैग और नोट्स के लिए अलग से शुल्क अदा करना पड़ता है। कई संस्थाएं तो 12वीं में उत्तीर्ण कराने का भी दावा करती है। इसी से स्पाट होता है कि संस्थाओं की चोर्ड और बोर्ड के पेपर सेंटिंग में भी अच्छी पकड़ है। इसका खुलासा पिछले दिनों हुआ भी था लेकिन इस और कोई भी गंभीरता से ध्यान नहीं दे रहा है।
