Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
X
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • नवभारत विशेष
  • वायरल
  • धर्म
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • टेक्नॉलजी
  • यूटिलिटी न्यूज़
  • फैक्ट चेक
  • हेल्थ
  • ऑटोमोबाइल
  • वीडियो

  • वेब स्टोरीज
  • फोटो
  • होम
  • विडियो
  • फटाफट खबरें

‘वॉटर इमरजेंसी’ की ओर ऑरेंज सिटी, नागपुर में नलों से आ रही बीमारी! जानिए Smart City की कड़वी सच्चाई

Nagpur News: स्मार्ट सिटी का सपना देख रहा नागपुर आज गंभीर जल त्रासदी के मुहाने पर है। दूषित पेयजल, सीवर मिलावट और प्रशासन की चुप्पी ने पूरे शहर को मेडिकल इमरजेंसी की ओर धकेल दिया है।

  • Written By: आकाश मसने
Updated On: Jan 26, 2026 | 01:48 PM

प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)

Follow Us
Close
Follow Us:

Nagpur Water Crisis: जिस नागपुर को हम ‘स्मार्ट सिटी’ बनाने का सपना देख रहे हैं, वह आज एक ऐसी त्रासदी की ओर बढ़ रहा है जिसे ‘जल त्रासदी’ कहना गलत नहीं होगा। शहर की सीवर लाइनें और नाले बदहाली के आंसू रो रहे हैं, लेकिन प्रशासन की खामोशी शहरवासियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। स्थिति इतनी विकट है कि अब डर सताने लगा है कि कहीं दूषित पानी के कारण नागपुर का हाल भी इंदौर जैसा भयावह न हो जाए। ऑरेंज सिटी के लिए ‘स्मार्ट सिटी’ का मुखौटा अब उतर चुका है। शहर के पांचों क्षेत्र (उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और मध्य नागपुर) इस समय दूषित पानी की मार झेल रहे हैं। प्रशासन की अक्षमता ने शहर के हर घर में ‘बीमारियों का जल’ पहुंचा दिया है।

कहां क्या है संकट

क्षेत्र प्रमुख समस्या स्थिति
उत्तर नागपुर सीवर और पेयजल लाइनों का मिलन बस्तियों में पीला व बदबूदार पानी, पीलिया का प्रकोप
पूर्व नागपुर कन्हान नदी की राख और जलजमाव फ्लाई ऐश मिला पानी पीने से किडनी व पेट की गंभीर बीमारियां
मध्य नागपुर पुरानी और जर्जर पाइपलाइनें ड्रेनेज का पानी नलों में मिल रहा, गैस्ट्रो के मरीज बढ़े
दक्षिण नागपुर प्रदूषित भूजल बोरवेल व कुओं का पानी जहरीला, त्वचा रोगों का संकट
पश्चिम नागपुर अंबाझरी झील का दूषित जल पॉश इलाकों में भी गंदे पानी की सप्लाई, प्रशासन की चुप्पी

गरीबों की जान सस्ती

सबसे भयावह स्थिति स्लम बस्तियों की है। यहां जहां नालियां चोक हैं वहीं गंदगी पेयजल स्रोतों में समा रही है। बस्तियों के छोटे बच्चों में डायरिया, टाइफाइड और हैजा की शिकायतें हर दूसरे घर में मिल रही हैं। गरीब जनता निजी अस्पतालों का खर्च उठाने में अक्षम है और सरकारी अस्पतालों में दूषित पानी के मरीजों की लंबी कतारें लगी हैं।

भविष्य की विकलांगता

कन्हान नदी में बिजली घरों की राख का मिलना एक आपराधिक कृत्य है। हाई कोर्ट के जुर्माने के बावजूद सुधार न होना प्रशासन की बेशर्मी की पराकाष्ठा है। यह राख केवल पानी को गंदा नहीं करती, बल्कि इसमें मौजूद भारी धातुएं आने वाली पीढ़ी को शारीरिक रूप से अपंग बना सकती हैं।

सम्बंधित ख़बरें

चिकलथाना पुनर्वास अधर में, कलेक्टर कार्यालय पर सवाल, सड़क चौड़ीकरण में व्यापारी बेघर; प्रस्ताव लटका

Powai Lake को प्रदूषण से बचाने की पहल, बीएमसी ने शुरू किया सीवेज डायवर्जन कार्य

Parel ST Depot में शराबखोरी का भंडाफोड़, औचक निरीक्षण में चालक नशे में पकड़ा गया

Mumbai Local Train में मामूली कहासुनी बनी जानलेवा, मालाड स्टेशन पर कॉलेज प्रोफेसर की हत्या

प्रशासन की ‘अपराधिक’ खामोशी

नीरी: वैज्ञानिक रिपोर्ट 5 वर्ष पहले दी गई। इसके बाद नीरी असली स्थिति से या तो अनभिज्ञ है या फिर उन्हें जानबूझ कर रिपोर्ट जारी करने नहीं दिया जा रहा है।
मनपा: सीवर और नाले सुधारने के नाम पर करोड़ों के टेंडर कहां गए? जब विधायक खुद अंबाझरी तालाब को दूषित बता रहे हैं, तो आयुक्त चुप क्यों हैं?
अंबाझरी का सच: शहर के फेफड़े कहे जाने वाले इस तालाब का पानी ज़हरीला होना नागपुर के पतन की निशानी है।

महामारी के मुहाने पर नागपुर

नागपुर आज इंदौर जैसी त्रासदी के कगार पर खड़ा है। अगर आज पांचों दिशाओं के नागरिक एक साथ नहीं जागे, तो कल नागपुर की हर गली में एम्बुलेंस का सायरन गूंजेगा। यह केवल दूषित पानी नहीं, प्रशासन द्वारा किया जा रहा सामूहिक स्वास्थ्य समझौता है। नागपुर में जल संकट अब केवल पानी की कमी का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह एक ‘मेडिकल इमरजेंसी’ की ओर बढ़ता खतरा है। शहर के सीवर और पेयजल की पाइपलाइनें कई जगहों पर एक-दूसरे में मिल चुकी हैं, जिससे लोगों के घरों में नलों से बदबूदार और पीला पानी आ रहा है। प्रशासन की अनदेखी का खामियाजा अब शहर के अस्पतालों में उमड़ रही भीड़ के रूप में सामने आ रहा है।

यह भी पढ़ें:- महाराष्ट्र बना ग्लोबल इन्वेस्टर्स की पहली पसंद, राज्यपाल आचार्य देवव्रत बोले- 1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी लक्ष्य

हाई कोर्ट की फटकार का भी असर नहीं

हाई कोर्ट ने कन्हान नदी में राख मिलने पर सख्त रुख अपनाते हुए भारी जुर्माना लगाया है, लेकिन ऐसा लगता है कि प्रशासन ने इसे ‘व्यापारिक घाटा’ मानकर स्वीकार कर लिया है। सुधार की नीयत कहीं नजर नहीं आती।

नीरी और मनपा की ‘साठगांठ’ पर सवाल

आखिर नीरी जैसी राष्ट्रीय स्तर की संस्था की रिपोर्टिंग क्यों रुक गई है? क्या प्रशासन अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए आंकड़ों का खेल खेल रहा है? महानगर पालिका की चुप्पी इस बात की तस्दीक करती है कि उसके पास इस संकट का कोई समाधान नहीं है या फिर वे जनता की जान की कीमत पर चुप्पी साधे बैठे हैं।

विधायक ने उठाए सवाल

सिर्फ नदियां ही नहीं, बल्कि शहर की ऐतिहासिक विरासत और जल स्रोत अंबाझरी तालाब भी अब सुरक्षित नहीं रहा। खुद विधायक परिणय फुके ने इसके दूषित होने की पुष्टि की है। जब शहर के मुख्य जल स्रोत ही प्रदूषित हो चुके हों, तो नागपुर के लोग आखिर किस पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं? बोरिंग और कुओं का पानी पहले ही अनुपयोगी घोषित हो चुका है।

हमारा सवाल

  • अगर हाई कोर्ट के दंड के बावजूद कन्हान नदी में राख मिलना बंद नहीं हो रहा, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमा क्यों नहीं?
  • नीरी और मनपा जनता से क्या छुपा रही हैं?
  • क्या नागपुर के करदाताओं को साफ पानी पाने का भी हक नहीं है?
  • प्रशासन जागे, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।

Nagpur water crisis smart city sewage contamination medical emergency

Get Latest   Hindi News ,  Maharashtra News ,  Entertainment News ,  Election News ,  Business News ,  Tech ,  Auto ,  Career and  Religion News  only on Navbharatlive.com

Published On: Jan 26, 2026 | 01:48 PM

Topics:  

  • Maharashtra
  • Nagpur
  • Nagpur News

Popular Section

  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • वेब स्टोरीज़

States

  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्यप्रदेश
  • दिल्ली NCR
  • बिहार

Maharashtra Cities

  • मुंबई
  • पुणे
  • नागपुर
  • ठाणे
  • नासिक
  • अकोला
  • वर्धा
  • चंद्रपुर

More

  • वायरल
  • करियर
  • ऑटो
  • टेक
  • धर्म
  • वीडियो

Follow Us On

Contact Us About Us Disclaimer Privacy Policy Terms & Conditions Author
Marathi News Epaper Hindi Epaper Marathi RSS Sitemap

© Copyright Navbharatlive 2026 All rights reserved.