
महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत (सोर्स: सोशल मीडिया)
Maharashtra Governor Acharya Devvrat Speech: मुंबई में गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर ध्वजारोहण के बाद प्रदेश को संबोधित करते हुए राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने महाराष्ट्र की प्रगति का गौरवशाली खाका खींचा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बुनियादी ढांचे और डिजिटल कनेक्टिविटी के दम पर राज्य अब विश्व स्तर पर अपनी मजबूत धाक जमा चुका है।
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने अपने संबोधन में गर्व के साथ इस बात का उल्लेख किया कि महाराष्ट्र प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आकर्षित करने के मामले में लगातार देश का नेतृत्व कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि वैश्विक निवेशकों के लिए सुरक्षा और भरोसे का पर्याय बन चुका है। अनुकूल नीतियों और बेहतर ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के कारण दुनिया भर की बड़ी कंपनियां आज महाराष्ट्र को अपना केंद्र बना रही हैं।
राज्य के भविष्य के विजन पर चर्चा करते हुए आचार्य देवव्रत ने कहा कि महाराष्ट्र ने 1 ट्रिलियन डॉलर (एक हजार अरब डॉलर) की अर्थव्यवस्था बनने का जो लक्ष्य रखा है, उसे हासिल करने की दिशा में हम पूरी दृढ़ता से आगे बढ़ रहे हैं। यह लक्ष्य न केवल राज्य की प्रगति को दर्शाएगा, बल्कि भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाने में भी रीढ़ की हड्डी साबित होगा।
महाराष्ट्र की सफलता का श्रेय यहां के मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर को देते हुए राज्यपाल ने बताया कि सड़क, रेल, बंदरगाह और ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य नई ऊंचाइयां छू रहा है। इसके साथ ही, डिजिटल कनेक्टिविटी और साइबर सुरक्षा के मामले में भी महाराष्ट्र देश के अन्य राज्यों के लिए एक बेंचमार्क सेट कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य की उद्यमी जनता और मेहनती नागरिक ही इस विकास यात्रा की सबसे बड़ी पूंजी हैं।
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जहां मुंबई देश की वित्तीय राजधानी के रूप में भारत को वैश्विक बाजार से जोड़ती है, वहीं अब पुणे, नागपुर, नासिक, कोल्हापुर और छत्रपति संभाजीनगर जैसे शहर भी शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और नवाचार (Innovation) के नए गढ़ बन रहे हैं। यह राज्य के संतुलित और समावेशी विकास का प्रमाण है, जहां विकास केवल महानगरों तक सीमित नहीं है।
राज्यपाल ने अपने भाषण के अंत में संविधान निर्माता डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर को नमन करते हुए उनके आदर्शों को याद किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्वतंत्रता तभी सार्थक है जब सामाजिक और आर्थिक समानता भी सुनिश्चित हो। महाराष्ट्र की ‘संत परंपरा’ और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत इस प्रगतिशील सोच को और मजबूती प्रदान करती है।






