नागपुर के यूपीएससी में उत्तीर्ण छात्र (सौजन्य-नवभारत)
Nagpur UPSC Achievers: कठिन परिश्रम, जिद और आत्मविश्वास के दम पर युवाओं ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) परीक्षा में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इनमें किसान परिवार से आने वाले प्रज्ज्वल धनराज नासरे का प्रदर्शन विशेष रूप से प्रेरणादायक माना जा रहा है।
नागपुर केंद्र के विद्यार्थी प्रज्ज्वल नासरे ने यूपीएससी परीक्षा में 677वीं रैंक प्राप्त कर सफलता हासिल की। वर्धा जिले के कारंजा घाडगे तहसील के छोटे से गांव ठाणेगांव के रहने वाले प्रज्ज्वल एक किसान परिवार से आते हैं। उनके पिता धनराज नासरे अल्प भू-धारक किसान हैं। प्रज्ज्वल ने 2023 में बीए की पढ़ाई पूरी की और 2025 में राजनीति विज्ञान में एमए किया।
पढ़ाई पूरी होते ही उन्होंने प्रशासनिक सेवा की परीक्षा देना शुरू किया। तीसरे प्रयास में सफलता हासिल कर ली। इससे पहले दूसरे प्रयास में वे मुख्य परीक्षा पास कर इंटरव्यू तक पहुंचे थे, लेकिन अंतिम चयन से चूक गए थे। खास बात यह कि उन्होंने किसी कोचिंग का सहारा नहीं लिया, बल्कि ऑनलाइन माध्यम से टॉपर्स के मार्गदर्शन और अपनी मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया।
नागपुर के दिघोरी में रहने वाली भाग्यश्री नैकेले ने भी यूपीएससी में दोबारा सफलता हासिल कर अपनी प्रतिभा साबित की। उनके पिता राजेश नैकेले पेशे से इलेक्ट्रीशियन हैं। साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद भाग्यश्री ने प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना देखा और उसे पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत की। बीएससी की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पूरी तरह यूपीएससी की तैयारी पर ध्यान केंद्रित किया।
बिना किसी कोचिंग या विशेष मार्गदर्शन के उन्होंने केवल अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर पिछले वर्ष यूपीएससी में 737वीं रैंक हासिल की थी, जिसके आधार पर उन्हें रेलवे प्रशासन (आईआरएमएस) में सेवा मिली। वर्तमान में वे हैदराबाद में प्रशिक्षण ले रही हैं। प्रशिक्षण के दौरान ही उन्होंने रैंक सुधारने के उद्देश्य से दोबारा परीक्षा दी और इस बार 647वीं रैंक प्राप्त कर अपनी रैंक में सुधार किया।
नागपुर के मानेवाड़ा रोड निवासी चेतन रमेश ठाकरे की सफलता भी संघर्ष और धैर्य की मिसाल है। उन्होंने 2020 में सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की, लेकिन उनका लक्ष्य प्रशासनिक सेवा में जाना था। शुरुआती चार प्रयासों में वे प्रारंभिक परीक्षा भी पार नहीं कर पाए, जिससे निराशा का माहौल बन गया था। एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें लगा कि शायद उन्हें अपने इंजीनियरिंग क्षेत्र की ओर लौटना पड़ेगा।
फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और प्रयास जारी रखा। पिछले प्रयास में भले ही अंतिम सफलता नहीं मिली, लेकिन मुख्य परीक्षा पास होने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा। इसके बाद उन्होंने 2025 में पूरे समर्पण के साथ तैयारी की और आखिरकार छठे प्रयास में यूपीएससी परीक्षा में 762वीं रैंक हासिल कर सफलता प्राप्त की। चेतन के पिता रमेश ठाकरे बीएसएनएल से सेवानिवृत्त हैं और उनकी मां संध्या गृहिणी हैं।
प्रांजलि बचपन से ही प्रशासनिक अधिकारियों के व्यक्तित्व और कार्यशैली से प्रभावित थीं। दसवीं कक्षा में अच्छे अंक आने के बाद उनके माता-पिता चाहते थे कि वह डॉक्टर या इंजीनियर बने, लेकिन प्रांजलि ने साफ तौर पर इनकार करते हुए 11वीं में कला संकाय में प्रवेश लिया क्योंकि उसका लक्ष्य शुरू से ही प्रशासनिक सेवा में जाना था। प्रांजलि के पिता प्रवीण मेश्राम जिला परिषद स्कूल से सेवानिवृत्त शिक्षक हैं।
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12वीं में उसे 93 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए थे। उसी समय उसने अपने लक्ष्य के बारे में स्पष्ट रूप से बताया था कि वह भविष्य में प्रशासनिक अधिकारी बनना चाहती है। इसके बाद 2023 में उसने बीए की डिग्री पूरी की और पहले से शुरू की गई यूपीएससी की तैयारी में पूरी तरह जुट गई। शुरुआत में कुछ समय नागपुर की एक संस्था में अध्ययन किया, लेकिन बाद में घर से ही तैयारी जारी रखी। प्रांजलि ने दूसरे ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर ली और 767वीं रैंक प्राप्त हुई।
राजेश्री देशमुख ने भी यूपीएससी परीक्षा में दूसरी बार सफलता हासिल की। उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद यूपीएससी की तैयारी शुरू की थी। उनके पिता शांताराम देशमुख संगमनेर में किसान हैं।
वर्ष 2022 में वे परीक्षा में सफल होकर आयकर सेवा (आईआरएस) में चयनित हुई थीं। फिलहाल उसी सेवा में कार्यरत हैं। इस बार रैंक सुधार के उद्देश्य से परीक्षा देने पर उन्हें 754वीं रैंक प्राप्त हुई। उन्होंने फिलहाल अपनी वर्तमान सेवा को जारी रखने का निर्णय व्यक्त किया।