नागपुर रेलवे फ्लाईओवर (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Maharashtra Government Fund Allocation: गुरुवार को उस समय राज्य सरकार को हाई कोर्ट की नाराजगी झेलनी पड़ी जब कई बार आदेशों के बावजूद राज्य सरकार की ओर से जमीन अधिग्रहण के लिए निधि का आवंटन नहीं किए जाने का खुलासा स्वयं महानगरपालिका की पैरवी कर रहे अधिवक्ता जैमिनी कासट ने किया।
स्टेशन फ्लाईओवर के पीड़ित सैयद साकीर अली अब्दुल अली की पैरवी कर रहे अधिवक्ता महेश धात्रक ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से हर सुनवाई के दौरान निधि के आवंटन की प्रक्रिया जारी होने का हवाला दिया जाता है किंतु कोई ठोस जवाब नहीं दिया जाता है। राज्य सरकार की इस कार्यप्रणाली पर सख्त रवैया अपनाते हुए न्यायाधीश अनिल किल्लोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने कब तक निधि का आवंटन किया जाएगा?
इसका जवाब दोपहर का सत्र शुरू होते ही 2.30 बजे तक देने का स्पष्ट आदेश दिया। आलम यह रहा कि हाई कोर्ट के कड़े रुख को देखते हुए अंतत: राज्य सरकार ने 31 मार्च तक पहली किस्त जारी करने की जानकारी प्रदान की।
राज्य सरकार के नगर विकास विभाग ने अदालत को आश्वासन दिया है कि पहली किस्त का भुगतान 31 मार्च 2026 तक कर दिया जाएगा। इस संबंध में नगर विकास विभाग के सेक्शन अधिकारी द्वारा 12 मार्च 2026 को लिखा गया एक पत्र अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
सहायक सरकारी वकील द्वारा पेश किए गए इस पत्र को अदालत को आधिकारिक रिकॉर्ड पर लेते हुए भुगतान की पुष्टि के लिए कार्यालय द्वारा हस्ताक्षरित एक वचन पत्र भी अदालत को सौंपा गया है। सुनवाई के दौरान यह संकेत दिया गया कि दी गई समय सीमा के भीतर प्रक्रिया को पूरा करने में कोई कठिनाई नहीं होगी।
हाई कोर्ट ने मनपा के भी अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सख्त नाराजगी जताते हुए उन्हें कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि एयर कंडीशनर कार्यालयों में बैठने वाले अधिकारियों को उन लाइसेंसधारियों की दुर्दशा का एहसास नहीं है जो भीषण गर्मी में टिन शेड के नीचे बने अस्थायी ढांचों में काम करने को मजबूर हैं। अदालत ने पाया कि 27 फरवरी 2025 के आदेश के बावजूद, एनएमसी ने एमआरटीपी अधिनियम की धारा 37 के तहत राज्य सरकार को भेजा जाने वाला नया प्रस्ताव समय पर नहीं भेजा।
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अदालत ने कहा कि 2 महीने के भीतर भेजा जाने वाला यह प्रस्ताव केवल ‘कल’ (सुनवाई के ठीक पहले) भेजा गया है जो एनएमसी की असंवेदनशीलता को दर्शाता है। अदालत ने अधिकारियों पर जुर्माना लगाने की चेतावनी दी थी लेकिन यह उम्मीद जताते हुए खुद को रोक लिया कि अब अधिकारियों को ‘सद्बुद्धि’ आएगी।
मामले की सुनवाई के दौरान मनपा की पैरवी कर रहे अधिवक्ता जैमीनी कासट ने कहा कि ‘नगरोत्थान योजना’ के तहत भूमि अधिग्रहण के लिए राशि की आवश्यकता है। हालांकि जब तक नगर विकास विभाग (UD2) से प्रशासनिक मंजूरी नहीं मिल जाती तब तक अधिग्रहण की कार्यवाही के लिए राशि जमा नहीं की जा सकती। जमीन के इस हिस्से में एमएसआरटीसी (MSRTC), रक्षा भूमि और स्कूल से संबंधित क्षेत्र शामिल हैं।