नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट समेटा गया, नागपुर में कर्मचारी कार्यमुक्त; 8 शहरों में कंपनी बंद करने का आदेश

Nagpur Smart City Project: नागपुर सहित 8 शहरों में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट बंद करने का आदेश जारी, अनुदान खत्म होने से कर्मचारियों को 30 अप्रैल तक कार्यमुक्त किया गया।
Narendra Modi's Dream Project Shelved; Employees Relieved in Nagpur; Orders Issued to Shut Down Company in 8 Cities.
नागपुर स्मार्ट सिटी, प्रोजेक्ट बंद, (सोर्स: सौजन्य AI)
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Maharashtra Urban Development: नागपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाने वाला 'स्मार्ट सिटी' प्रोजेक्ट महाराष्ट्र में अंततः समेट लिया गया है। केंद्र सरकार की ओर से परियोजना की अवधि समाप्त होने और आगे कोई भी अनुदान न मिलने के कारण राज्य सरकार के नगर विकास विभाग ने नागपुर सहित 8 शहरों में 'स्मार्ट सिटी लिमिटेड कंपनी' को बंद करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है।

इस फैसले के तहत कंपनी में काम कर रहे सभी कॉन्ट्रैक्ट अधिकारियों और कर्मचारियों को 30 अप्रैल तक कार्यमुक्त करने का आदेश दिया गया है जिससे कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।

उल्लेखनीय है कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का सपना पूरा करने के लिए शुरुआत में लगभग 45 अधिकारी और कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी किंतु धीरे-धीरे मामला बिगड़ता देख कर्मचारी कम होते चले गए। वर्तमान में केवल 20 कर्मचारी कार्यरत हैं जिनके वेतन पर प्रति माह 16 लाख रुपए का खर्च हो रहा है।

सभी अधिकार अब मनपा आयुक्तों के पास

राज्य सरकार के आदेशानुसार 8 प्रमुख शहरों नागपुर, नाशिक, पुणे, पिंपरी-चिंचवड, ठाणे, कल्याण-डोंबिवली, सोलापुर और छत्रपति संभाजीनगर की स्मार्ट सिटी कंपनियों के अध्यक्ष, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और संचालक मंडल के सभी अधिकार अब संबंधित महानगरपालिका आयुक्तों को सौंप दिए गए है, इसके साथ ही स्मार्ट सिटी' की सभी संपत्तियों और अधूरे प्रोजेक्ट्स को मनपा को हस्तांतरित करने का आदेश दिया गया है।

10 साल में तोड़ दिया दम

शहरों के सुनियोजित विकास, उत्तम बुनियादी ढांचे के निर्माण और नागरिकों का जीवन स्तर ऊंचा उठाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने वर्ष 2017 में 'स्मार्ट सिटी मिशन' की घोषणा की थी। इस मिशन के तहत परियोजनाओं को तेजी और पारदर्शिता से लागू करने के लिए स्वतंत्र कंपनियों की स्थापना की गई थी लेकिन पिछले कुछ समय से फंड की कमी के कारण इस परियोजना को ग्रहण लग गया था।

स्मार्ट सिटी के तहत परियोजनाओं को दिसंबर 2025 तक पूरा करने की समय सीमा थी लेकिन केंद्र सरकार से आगामी अवधि के लिए कोई निधि प्राप्त नहीं होगी, इसलिए स्वतंत्र रूप से स्थापित की गई कंपनी को बंद करने का शासनादेश (जीआर) जारी कर दिया गया है।

अधूरे प्रोजेक्ट्स से मनपा पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ

राज्य सरकार के इस अचानक लिए गए निर्णय से शुरू हो चुकी परियोजनाओं के भविष्य पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक 43 परियोजनाओं पर 985 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, कुल 46 परियोजनाओं में से स्मार्ट रोड, साइकिल ट्रैक, आईटी आधारित सेवाओं और शहरी बुनियादी ढांचे से जुड़ी 3 प्रमुख परियोजनाएं अभी भी अधूरी हैं।

अब इन अधूरे कार्यों को पूरा करने की पूरी जिम्मेदारी संबंधित महानगरपालिकाओं पर आ जाएगी जिससे मनपा के खजाने पर भारी आर्थिक दबाव पड़ने की संभावना है।

प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट 'स्मार्ट सिटी' का महाराष्ट्र में समापन।

30 अप्रैल तक सभी संविदा अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्यमुक्त करने का आदेश।

नागपुर, पुणे और नाशिक सहित 8 शहरों के मनपा आयुक्तों को सौंपे गए सभी अधिकार।

अधूरे प्रोजेक्ट्स का आर्थिक बोझ अब महानगरपालिकाओं के कंधों पर।

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