पानी मिलेगा ?... उधर कॉर्नर में रखा है, वहीं से ले लीजिए...नागपुर के होटलों में FDA नियमों की धज्जियां

Restaurant Drinking Water: नागपुर के कई होटल-रेस्टोरेंट में मुफ्त शुद्ध पेयजल देने के नियम का पालन नहीं हो रहा। ग्राहकों को डिस्पेंसर तक भेजा जा रहा है या बोतलबंद पानी खरीदने के लिए मजबूर है।
FDA norms flouted in Nagpur hotels
नागपुर, होटल, रेस्टोरेंट, मुफ्त पेयजल (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)सांकेतिक फोटो सोर्स-AI
Published on: 
Updated on: 

Hotels Free Drinking Water Rule:  'पानी मिलेगा ?... उधर कॉर्नर में रखा है, वहीं से ले लीजिए... या फिर मिनरल वाटर खरीद लीजिए। जी हां, शहर के अधिकांश होटल और रेस्टोरेंट्स में यही जवाब ग्राहकों को मिल रहा है, जबकि खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) का स्पष्ट निर्देश है कि होटल, रेस्टोरेंट और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में आने वाले ग्राहकों को शुद्ध पेयजल निःशुल्क उपलब्ध कराना अनिवार्य है।

इसके बावजूद नागपुर शहर के कई प्रतिष्ठित होटल और नामी रेस्टोरेंट्स भी इस नियम को केवल कागजों तक सीमित रखे हुए हैं। जमीनी हकीकत यह है कि ग्राहकों के सामने भोजन और नाश्ता तो टेबल तक पहुंचाया जाता है लेकिन पीने का पानी टेबल पर रखने के बजाय किसी कोने में डिस्पेंसर या वाटर फिल्टर रख दिया जाता है। इससे अधिकांश ग्राहक या तो स्वयं पानी लेने जाने को मजबूर होते हैं या फिर बोतलबंद पानी खरीदने के लिए विवश हो जाते हैं।

सदर, अजनी, छत्रपति चौक, मानेवाड़ा रोड, बेसा, सीताबडीं, मंगलवारी, कमाल चौक, इंदोरा, इतवारी, मंशा चौक, अवस्थी चौक, गिट्टीखदान, जरीपटका, महल सहित शहर के कई इलाकों में यही स्थिति देखने को मिल रही है। कई प्रतिष्ठानों में वेटर टेबल पर पानी रखने के बजाय सीधे बोतलबंद पानी का विकल्प बताते हैं जिससे ग्राहकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।

ग्राहक संरक्षण क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि यह केवल ग्राहकों की सुविधा का मामला नहीं बल्कि उपभोक्ता अधिकारों और खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन का भी प्रश्न है। यदि होटल टेबल तक भोजन परोस सकते हैं तो शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने में लापरवाही क्यों बरती जा रही है? यह सवाल अब खाद्य एवं औषधि प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी खड़ा हो रहा है।

FDA norms flouted in Nagpur hotels
जीबीएस प्रकोप के बाद पुणे के 12 गांवों को मिलेगी शुद्ध पेयजल सुविधा, 890 करोड़ की परियोजना को मिली रफ्तार

होटलों में मुफ्त शुद्ध पेयजल सुनिश्चित करे FDA

आखिर विभाग इस मामले में ढील क्यों दे रहा है। शहर में समय-समय पर एफडीए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच करता है लेकिन शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के नियमों के पालन की प्रभावी निगरानी शायद ही कभी दिखाई देती है। परिणामस्वरूप कई प्रतिष्ठान नियमों का केवल औपचारिक पालन कर रहे हैं।

अब जरूरत इस बात की है कि एफडीए केवल आदेश जारी करने तक सीमित न रहे बल्कि होटल और रेस्टोरेंट्स में विशेष अभियान चलाकर यह सुनिश्चित करे कि प्रत्येक ग्राहक को बिना मांगे या कम से कम मांगने पर तुरंत टेबल पर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए, नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी है, ताकि ग्राहकों को उनका मूल अधिकार मिल सके।

पानी नहीं रखना आम 'ट्रिक'

वाटर डिस्पेंसर को किसी कोने में रख देना, वेटर द्वारा पहले बोतलबंद पानी की पेशकश करना और ग्राहकों को यह आभास देना कि मुफ्त पानी उपलब्ध ही नहीं है, यह सरकारी नियम का केवल दिखावटी पालन करना है। यह होटलों में आम 'ट्रिक' हो चुकी है।

FDA norms flouted in Nagpur hotels
छत्रपति संभाजीनगर में आयुक्त तुकाराम मुंढे के आदेश पर FDA ने दो रेस्तरां के लाइसेंस को किया निलंबित

अप्रत्यक्ष रूप से ग्राहकों को किया जा रहा है मजबूर

एफडीए के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि होटल और खाद्य प्रतिष्ठान में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना अनिवार्य है। पानी के लिए ग्राहक से अलग शुल्क नहीं लिया जा सकता, यदि वह सामान्य पेयजल चाहता है। बोतलबंद पानी खरीदना ग्राहक की इच्छा पर निर्भर है, उसे बाध्य नहीं किया जा सकता है। लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से ग्राहकों को अब भी पानी खरीदने के लिए बाध्य ही किया जा रहा है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com