पूनम टावर (सौ. सोशल मीडिया )
Nagpur Illegal Construction Case News: पूनम टावर और पूनम चैंबर्स में हुए अवैध निर्माण पर हाई कोर्ट की सख्ती के बाद अब मनपा ने तोड़ कार्रवाई शुरू कर दी है। सोमवार को सुनवाई के दौरान मनपा की पैरवी कर रहे अधि।
जैमिनी कासट ने तोडू कार्रवाई का लेखा-जोखा कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया। दोनों पक्षों की दलीलों के बाद न्यायाधीश अनिल पानसरे और न्यायाधीश निवेदिता मेहता ने तोड़ कार्रवाई पर होने वाले खर्च का भुगतान करने का आदेश याचिकाकर्ता को दिया। आरबीआई की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता फिरदौस मिर्जा ने पैरवी की।
हाई कोर्ट ने ‘पूनम चैंबर्स‘ में अवैध निर्माण को हटाने की धीमी प्रक्रिया और याचिकाकर्ता द्वारा अपनी प्रतिबद्धता पूरी न करने पर कड़ी नाराजगी जताई।अदालत ने स्पष्ट किया कि पार्किंग क्षेत्र में अवैध निर्माण को हटाने का जो खर्च मनपा उठा रही है उसकी भरपाई याचिकाकर्ता को ही करनी होगी। सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि याचिकाकर्ता नंदकुमार हरचंदानी ने अदालत को आश्वासन दिया था कि वे स्वयं अवैध निर्माण हटाएंगे।
हालांकि मनपा के वकील जैमिनी कासट ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता ने 5 मार्च 2026 से काम रोक दिया था जिसके बाद अब मनपा स्वयं इस कार्य को पूरा कर रही है। अदालत ने टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता ने अपने वादे का सम्मान नहीं किया है।
इस मामले में प्रतिवादी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने भी अपनी अनुपालन रिपोर्ट पेश की। आरबीआई की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मिर्जा ने अदालत को बताया कि संबंधित दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
उन्हें कड़ी सलाह दी गई है। अदालत ने पूर्व में दी गई माफी को स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि आरबीआई के अधिकारी अब रजिस्ट्री के अधिकारियों से भी 3 कार्य दिवसों के भीतर माफी मागे।। इस प्रक्रिया के बाद अदालत ने इस मामले से आरबीआई का नाम हटाने का निर्देश दिया।
अदालत ने मनपा को आदेश दिया है कि वह अवैध निर्माण को हटाने में आने वाले खर्च का एक अनुमान तैयार करे और अगली सुनवाई पर पेश करे। इस आकलन की एक प्रति याचिकाकर्ता को भी दी जाएगी जिसे आकलन मिलने के 2 सप्ताह के भीतर पूरी राशि जमा करनी होगी। काम पूरा होने के बाद अंतिम राशि का समायोजन किया जाएगा।
प्रतिबद्धता पूरी न करने पर कोर्ट की नाराजगी अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता ने पूर्व में स्वयं अवैध निर्माण हटाने का आश्वासन दिया था जिसके आधार पर पहले आदेश पारित किए गए थे लेकिन कंपनी ने अपनी इस प्रतिबद्धता का सम्मान नहीं किया। याचिकाकर्ता ने ध्वस्तीकरण का काम बीच में ही रोक दिया था जिसके बाद अब पूरा काम मनपा द्वारा किया जा रहा है।
पूनम टावर और पूनम चैंबर्स में चल रही तोड़ कार्रवाई को लेकर याचिकाकर्ता और प्रतिवादी मनपा के बीच अब तक की कार्रवाई में कितना हिस्सा तोड़ा गया, इसे लेकर विरोधाभास देखा गया। इसके बाद हाई कोर्ट ने इसकी जांच करने के लिए समिति बनाने के संकेत भी दिए।
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न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि ‘पूनम टावर’ के अवैध हिस्से को गिराने में होने वाला पूरा खर्च भी अब याचिकाकर्ता कंपनी को वहन करना होगा। याचिकाकर्ता की ओर से चार्टर्ड अकाउंटेंट अभिरुचि अंकित अग्रवाल ने अदालत में तोड़ कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट पेश की। याचिकाकर्ता का दावा है कि पूनम टावर के बेसमेंट क्षेत्र का ध्वस्तीकरण कार्य पूरा हो चुका है। इसके अलावा उन्होंने दलील दी कि पहली से 8वीं मंजिल का हिस्सा वर्ष 1991 में ही ढहा दिया गया था जिसकी सूचना एनएमसी को दी गई थी।