नागपुर में बुल्डोजर एक्शन: पूनम चैंबर्स में अवैध निर्माण ध्वस्त; एन. कुमार को हाई कोर्ट से नहीं मिली राहत!

Poonam Chambers Illegal Construction: नागपुर मनपा ने पूनम टावर्स और चैंबर्स में अवैध निर्माण ढहाया। एन. कुमार की याचिका खारिज, हाई कोर्ट सख्त। आरबीआई की लापरवाही पर कोर्ट ने मांगा माफीनामा।
NMC starts demolition of illegal floors at Poonam Towers & Chambers in Nagpur after HC orders. RBI apologizes for banking error in DD processing.
पूनम चैंबर्स के अवैध निर्माण ध्वस्त (सौजन्य-नवभारत)
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Nagpur NMC Demolition: नागपुर में पूनम चैंबर्स में हुए अवैध निर्माण को लेकर मनपा की ओर से जारी नोटिस को चुनौती देते हुए एन. कुमार की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इसी तरह से पूनम टावर्स के संदर्भ में भी प्रक्रिया शुरू की गई।

इस मामले में सुनवाई के दौरान दोनों सम्पत्तियों के मालिक एन. कुमार की ओर से स्वयं ही अनधिकृत निर्माण ढहाने का शपथपत्र दिया गया था किंतु एन. कुमार द्वारा स्वयं नहीं तोड़े जाने से हाई कोर्ट द्वारा मनपा को तोड़ू कार्रवाई करने के कड़े निर्देश जारी किए गए।

निर्देश के अनुसार मनपा की ओर से शुक्रवार को ट्रैक्टर ब्रेकर लगाकर सिविल लाइंस स्थित पूनम टावर्स के दूसरे मंजिल पर तोड़ू कार्रवाई की गई। इसी तरह से पूनम चैंबर्स में भी पार्किंग की जगह पर बने अवैध कमरों पर हथौड़ा चलाया गया।

पूनम चैंबर्स के हिस्से पाए गए अवैध?

मनपा द्वारा जारी आदेश (क्रमांक 124/OW/AC-II/2026) के अनुसार पूनम चैंबर्स के इन हिस्सों को अनधिकृत घोषित किया गया है। -बेसमेंट के 2 बड़े हिस्से (510.58 और 123.42 वर्ग मीटर) -पहली से 8वीं मंजिल के उत्तर की ओर का निर्माण। -पहली मंजिल पर 1000.39 वर्ग मीटर का अतिरिक्त सर्विस फ्लोर।

तोड़ा गया 400 फुट का निर्माण

अधिकारियों के अनुसार पूनम टावर्स में काफी पक्का अवैध निर्माण किया गया था जिससे ट्रैक्टर ब्रेकर लगाने के बावजूद शुक्रवार को दिन भर में केवल 400 फुट ही अवैध निर्माण तोड़ा जा सका। हालांकि नोटिस में दिए गए अवैध निर्माण की सूची के अनुसार तोड़ू कार्रवाई अंतिम क्षणों तक जारी रहेगी। इसी तरह से पूनम चैंबर्स में भी काफी हिस्सा शुक्रवार को साफ किया गया। बताया जाता है कि पूनम चैंबर्स में अब लगभग 1 हजार वर्ग फुट का अवैध निर्माण बचा हुआ है। इसे सोमवार को तोड़ा जाएगा।

पूनम टावर्स में इन हिस्सों पर भी चलेगा डंडा

  • पार्किंग क्षेत्र : 1298.40 वर्ग मीटर का अवैध निर्माण।
  • भूखंड सीमा के बाहर : 1494.06 वर्ग मीटर का अतिरिक्त निर्माण।
  • 7वीं मंजिल : 1175.42 वर्ग मीटर का पूरा अवैध हिस्सा।
  • ऊंचाई उल्लंघन : स्वीकृत सीमा से 3.00 मीटर अतिरिक्त ऊंचा निर्माण।

आरबीआई की लापरवाही, गलत बैंक में भेजा था डीडी

भारतीय रिजर्व बैंक की एक प्रशासनिक चूक पर हाई कोर्ट द्वारा कड़ा रुख अपनाया गया। एन. कुमार द्वारा जमा किया गया डीडी आरबीआई ने गलती से उसके निर्धारित बैंक के बजाय किसी अन्य बैंक में भेज दिया था। कोर्ट को बताया गया कि आरबीआई कार्यालय से डिमांड ड्राफ्ट को प्रोसेस करने में गलती हुई।

जो डीडी 'इंडसइंड बैंक, बयरामजी टाउन, नागपुर' में पेश किया जाना था, उसे अनजाने में 'एलुरु को-ऑपरेटिव बैंक, गुड्डूर' भेज दिया गया। इसके परिणामस्वरूप डिमांड ड्राफ्ट गलत तरीके से वितरित की, टिप्पणी के साथ रजिस्ट्री को वापस मिल गया। इंडसइंड बैंक के शाखा प्रबंधक अनुराग पांडे ने व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर पुष्टि की कि डिमांड ड्राफ्ट कभी उनके बैंक में पेश ही नहीं किया गया था।

आरबीआई के वकील ने इस गलती के लिए माफी मांगी, लेकिन अदालत ने इसे केवल मौखिक रूप से स्वीकार करने से इनकार कर दिया। साथ ही कोर्ट ने कहा कि आरबीआई का एक अधिकृत अधिकारी कारणों सहित लिखित में माफीनामा पेश करे। आरबीआई के अधिकारी रजिस्ट्री से समन्वय कर यह सुनिश्चित करें कि डिमांड ड्राफ्ट का भुगतान समय पर हो जाए।

अदालत ने चिंता व्यक्त की कि संबंधित डिमांड ड्राफ्ट 7 फरवरी 2026 को जारी किया गया था और इसकी वैधता केवल एक महीने की है। यदि 7 मार्च 2026 से पहले इसे भुनाया नहीं गया, तो यह बेकार हो सकता है। अदालत ने आरबीआई को निर्देश दिया कि वे रजिस्ट्री से डीडी एकत्र कर समयसीमा के भीतर उसका भुगतान सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएं।

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