नागपुर मनपा (फाइल फोटो)
NMC Transport Department Clash: प्रशासक राज खत्म होने के करीब 4 साल के लंबे अंतराल के बाद आयोजित की गई मनपा की पहली महासभा अनुशासनहीनता और नियमों के उल्लंघन की भेंट चढ़ गई। बैठक में न केवल नियमों की अनदेखी की गई, बल्कि सत्ता पक्ष के भीतर का अंतर्विरोध भी खुलकर सामने आया। आम सभा की शुरुआत से ही नियमों को ताक पर रखे जाने का नजारा उजागर हुआ। 11 बजे की सभा आधे घंटे लेट शुरू की गई।
परंपरा के अनुसार अब तक के महापौर की ओर से समय पर सभा की शुरुआत होती रही है। भले ही डेकोरम के अभाव में इसे स्थगित किया जाता रहा, किंतु समय चूकने नहीं दिया गया। शुक्रवार को हुई आम सभा में कई पार्षद राजनीतिक सभा में पहुंचने के अंदाज से सदन में उपस्थित हुए। यही कारण रहा कि सदन की कार्यवाही देर से शुरू हुई।
मनपा की पहली आम सभा होने के कारण सदन में जनहित के महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होनी थी, लेकिन एक घंटे के लिए निर्धारित प्रश्नकाल को ढाई घंटे तक खींच लिया गया, जिससे अन्य विधायी कार्यों पर असर पड़ा। नियमों के अनुसार प्रश्नोत्तर काल के लिए 10 प्रश्न रखे जाते हैं जिसे कड़ाई से निपटाना होता है।
कोई विषय काफी महत्वपूर्ण होने के कारण उसे अधिक समय भी दिया जाता है किंतु एक घंटे या उससे अधिक 15-20 मिनटों के भीतर खत्म कर दिया जाता है। यदि पूरे 10 प्रश्न भी नहीं हो पाए, तो बचे प्रश्न अगली सभा के लिए रखे जाते हैं।
सदन की कार्यवाही के दौरान कई नए निर्वाचित पार्षदों में विधायी प्रक्रियाओं की समझ की कमी साफ दिखाई दी। सदस्यों को ‘पॉइंट ऑफ ऑर्डर’ और ‘पॉइंट ऑफ इंफॉर्मेशन’ जैसी तकनीकी बारीकियों का ज्ञान नहीं था। स्थिति तब और बिगड़ गई जब महापौर के निर्देशों को भी सदस्यों ने नजरअंदाज कर दिया।
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नियमानुसार महापौर के निर्देश के बाद संबंधित विषय को समाप्त कर अगली कार्यवाही शुरू करनी चाहिए, लेकिन महापौर के बोलते समय भी दोनों पक्षों के सदस्य लगातार बीच में हस्तक्षेप कर प्रश्न पूछते रहे। यहां तक कि किस समय पॉइंट ऑफ इंफॉर्मेशन लिया जाता है, इस नियम में क्या किया जाता है। इसी तरह पॉइंट ऑफ ऑर्डर में क्या करना होता है, इसे लेकर पार्षदों में साफ तौर पर ज्ञान का अभाव देखा गया।
सदन में सबसे अधिक चौंकाने वाला दृश्य तब देखने को मिला जब सत्ताधारी दल के सदस्यों ने ही अपने प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया। विशेष रूप से परिवहन विभाग के मुद्दे पर सत्ता पक्ष के भीतर का संघर्ष खुलकर सामने आया।
जब सदस्यों ने अपनी ही पार्टी की नीतियों पर सवाल उठाए, तो सत्ता पक्ष में व्याप्त विसंवाद और आपसी मतभेद पूरी तरह उजागर हो गए। पूरी सभा के दौरान यह स्पष्ट दिखा कि सदन चलाने की गरिमा और अनुशासन का अभाव था, जिसने मनपा की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए।