जलगांव का कृषि मॉडल चर्चा में, जैन हिल्स में ड्रिप से धान की खेती; केंद्रीय मंत्री ने बताया क्रांतिकारी मॉडल
Jalgaon Drip Irrigation Rice Farming: जलगांव के जैन हिल्स में ड्रिप सिंचाई से धान की सफल खेती का मॉडल सामने आया है। कृषि मंत्री चौहान ने इसे पानी बचत और किसानों की आय बढ़ाने वाला कदम बताया।
- Written By: अंकिता पटेल
Jalgaon Water Saving Farming Technology ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Jalgaon Water Saving Farming Technology: जलगांव जैन हिल्स में आधुनिक खेती का एक ऐसा मॉडल सामने आया है, जिसने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी सोचने पर मजबूर कर दिया।
ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई) के जरिए धान की सफल खेती का प्रत्यक्ष नजारा देखकर उन्होंने इसे कृषि क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम करार दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि यह तकनीक पानी की बचत के साथ-साथ किसानों की आय दोगुनी करने में मील का पत्थर साबित होगी।
20 साल का सफल प्रयोगः ‘क्या ड्रिप से धान संभव है?’
जैन इरिगेशन सिस्टम्स द्वारा विकसित इस मॉडल में पिछले दो दशकों से ड्रिप तकनीक से धान उगाया जा रहा है। मंत्री चौहान ने जब वैज्ञानिकों से पूछा कि क्या यह वास्तव में व्यावहारिक है?, तो विशेषज्ञों ने बताया कि इस विधि से न केवल उत्पादन बढ़ता है, बल्कि फसल गिरती भी नहीं और दाने की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि धान उत्पादक राज्यों में इस तकनीक को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जाएगा।
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सिर्फ फल-सब्जी नहीं, अब अनाज भी ड्रिप पर
आमतौर पर ड्रिप सिचाई को केवल बागवानी तक सीमित माना जाता था, लेकिन जैन हिल्स पर धान, गेहूं, मक्का, सोयाबीन, अरहर और कपास जैसी पारंपरिक फसले भी इसी तकनीक से उगाई जा रही है।
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मंत्री ने ग्रीनहाउस, हाइड्रोपोनिक्स और वर्टिकल फार्मिंग जैसे प्रयोगों का भी बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में नियंत्रित वातावरण वाली खेती ही किसानों के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प है।
आत्मनिर्भर बनेगा भारत
इस दौरे के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री रक्षा खडसे और सांसद स्मिता वाध भी मौजूद रहीं, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि ‘सिक्स इन वन’ तकनीक से गन्ने की पैदावार बढ़ाना और सूखे इलाकों में काली मिर्च उगाना जैसे प्रयोग यह साबित करते हैं कि विज्ञान आधारित खेती ही भविष्य है।
