जलगांव रिंग रोड DPR अंतिम चरण में, दोनगाव बनेगा नया विकास केंद्र; ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत
Jalgaon Ring Road Project: जलगांव रिंग रोड की DPR अंतिम चरण में है। प्रस्तावित 40 किमी मार्ग पालधी से ममुराबाद तक दोनगाव होकर गुजर सकता है, ट्रैफिक जाम कम होने और विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
- Written By: अंकिता पटेल
Jalgaon Dongav Development Corridor ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Jalgaon Dongaon Development Corridor: जलगांव शहर के चारों ओर यातायात के दबाव को कम करने के लिए प्रस्तावित रिंग रोड के डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट का काम अंतिम चरण में है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, यह रिंग रोड धरणगाव तहसील के दोनगाव शिवारा से होकर गुजरने वाला है।
इस संभावित मार्ग के कारण दोनगाव और आसपास के क्षेत्रों का महत्व काफी बढ़ जाएगा, जिससे निवेश, बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास के लिए एक नई गति मिलने की उम्मीद है।
पालधी से ममुराबाद तक का पट्टा होगा शामिल
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा तैयार किए जा रहे इस 40 किलोमीटर लंबे रिंग रोड में पालथी, दोनगाव, फुपनगरी और ममुराबाद तक का क्षेत्र शामिल होने की संभावना है।
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शहर के उत्तर-पश्चिमी हिस्से को जोड़ने वाला यह मार्ग रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गिरणा नदी के तट पर बसा दोनगाव भविष्य में जलगाव शहर के विस्तार का नया केंद्र बिंद बन सकता है।
शहर को ट्रैफिक जाम से मिलेगी मुक्ति: रिंग रोड बनने के बाद बाहरी भारी वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश करने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे जलगाव के आंतरिक ट्रैफिक का भार काफी कम हो जाएगा।
वर्तमान में दोनगाव क्षेत्र में जमीन के सर्वेक्षण का प्राथमिक काम चल रहा है। खबर है कि नए डीपीआर में दोनगाव के समावेश को बरकरार रखा गया है, जिससे इस रूट पर मुहर लगना लगभग तय है।
रोजगार और रियल एस्टेट को मिलेगा ‘बूस्टर डोज’
रिंग रोड के कारण दीनगांव के साथ-साथ टहाकली, फुलपाट और आव्हाणी जैसे गांधी पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, रिंग रोड के समीप होने के कारण इस इलाके में रियल एस्टेट की मांग बढ़ेगी और जमीन के दाम उछल सकते हैं।
दोनगाव से नशिराबाद या चुले हाईवे की और जाने के लिए शहर में घुसे बिना सीधा रास्ता उपलब्ध होगा, जिससे समय और ईंधन की बचत होगी, रिंग रोड के किनारे लॉजिस्टिक हब, वेयरहाउसिंग और लघु उद्योगों के विकसित होने की प्रबल संभावना है, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा।
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अगले चरणः जमीन अधिग्रहण और चुनौतियां
डीपीआर फाइनल होने के बाद सबसे महत्वपूर्ण चरण जमीन अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरी का होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसानों को उचित मुआवजा और विश्वास में लेकर काम किया।
