नागपुर मनपा (सौजन्य-सोशल मीडिया)
NMC Standing Committee Chairman: नागपुर मनपा में 102 पार्षदों के भारी बहुमत के साथ जीत दर्ज करने के बावजूद पदों को लेकर पार्षदों के बीच चल रही रस्साकसी के कारण भले ही लंबे समय से स्थायी समिति और अन्य समितियों पर नियुक्तियों का मसला अटका रहा हो किंतु अब 24 फरवरी को होने जा रही मनपा की विशेष सभा में न केवल स्थायी समिति बल्कि परिवहन समिति और अन्य विषयों की समितियों को लेकर भी मुहर लगने जा रही है जिससे भाजपा में भले ही अब तक नाराजगी की नौटंकी चली रही हो किंतु जल्द ही सभी की नाराजगी दूर होने जा रही है।
इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इन तीनों विषयों में होने वाली नियुक्ति के बाद कुल 118 पार्षदों को पदों का लाभ होगा जिनमें कुछ सभापति, उपसभापति तो कुछ बतौर सदस्य नियुक्त किए जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि स्थायी समिति और परिवहन समिति के अलावा मनपा में कुल 10 विषय समितियां हैं। स्थायी समिति 16 सदस्यों की होगी जिसमें भाजपा के कुल 11 सदस्य होंगे। इसी तरह से 12 सदस्यों वाली परिवहन समिति में भाजपा के 8 सदस्य होंगे, जबकि प्रत्येक विषय समिति में भाजपा की ओर से 6-6 सदस्य होंगे जिसके अनुसार केवल विषय समितियों में ही भाजपा के 60 पार्षदों को भेजा जाएगा।
इस तरह से भाजपा के 79 पार्षदों की लॉटरी लगने जा रही है। इसके अलावा कांग्रेस की ओर से स्थायी समिति में 4 सदस्यों को भेजा जाएगा, जबकि परिवहन समिति में 3 और प्रत्येक विषय समिति में 2-2 मिलाकर कुल 20 सदस्यों को भेजा जाएगा।
विशेषत: मुस्लिम लीग और एमआईएम की ओर से गट तैयार किया गया है जिससे उन्हें भी स्थायी समिति में 1, परिवहन समिति में भी 1 और विषय समितियों में 10 पार्षदों को भेजने का मौका मिलेगा। आश्चर्यजनक यह है कि मुस्लिम लीग और एमआईएम मिलाकर कुल 10 ही पार्षद हैं जिससे सभी पार्षदों को इसका लाभ मिलेगा।
नागपुर मनपा में भाजपा का बहुमत होने के कारण निश्चित ही स्थायी समिति का सभापति भी उनकी झोली में आना तय है। भाजपा की ओर से दिए गए संकेतों को अनुसार पहली बार चुनकर आईं पार्षद शिवानी दाणी को सभापति बनाया जाना है।
मनपा में वित्तीय मामलों से जुड़ी स्थायी समिति जिसके हाथों में मनपा के तिजोरी की चाबी होगी, इस समिति में जाने के लिए कोई भी वरिष्ठ पार्षद तैयार नहीं है जिससे पहली स्थायी समिति में ही भाजपा के नए सदस्य पार्षदों को मौका मिलने की संभावना जताई जा रही है।
आम चुनावों में भारी बहुमत के जीत के साथ ही भाजपा में महापौर से लेकर सत्तापक्ष नेता और अन्य महत्वपूर्ण पदों के लिए जुगाड़ तंत्र का खेल शुरू हो गया था। यही कारण रहा कि महापौर और सत्तापक्ष नेता के नाम पर मुहर लगाने के लिए भाजपा को काफी समय लेना पड़ गया। आलम यह रहा कि स्थायी समिति के सभापति को लेकर चले नाराजगी के खेल में अंतत: उपमहापौर के पद पर नई नियुक्ति करनी पड़ गई।
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महापौर, सत्तापक्ष नेता और स्थायी समिति सभापति जैसे तीनों महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति का निर्णय होने के बाद मामला शांत होने की संभावना जताई जा रही थी किंतु अब परिवहन समिति के सभापति के लिए वरिष्ठ पार्षदों के बीच रस्साकसी शुरू हो चुकी है।
| पार्टी/गट | कुल पद (सदस्य/सभापति) | स्थायी समिति (16) | परिवहन समिति (12) | 10 विषय समितियां |
| भाजपा | 79 | 11 | 08 | 60 (6 प्रति समिति) |
| कांग्रेस | 27 | 04 | 03 | 20 (2 प्रति समिति) |
| MIM/मुस्लिम लीग | 12 | 01 | 01 | 10 (1 प्रति समिति) |