वरद फेर परियोजना के खिलाफ किसानों की आवाज (सौजन्य-नवभारत)
Mudholi Jairampur Ganpur Farmers: गड़चिरोली जिले के मुधोली–जैरामपुर–गणपुर क्षेत्र में प्रस्तावित वरद फेरो अलॉय कंपनी के लौह प्रसंस्करण (आयरन प्रोसेसिंग) प्रकल्प का स्थानीय किसानों ने जोरदार विरोध किया है। किसानों ने स्पष्ट घोषणा की है कि वे अपनी उपजाऊ कृषि भूमि परियोजना के लिए नहीं देंगे।
साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि भूमि अधिग्रहण के लिए किसी प्रकार की जबरदस्ती की गई तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। मंगलवार को जिला कलेक्टर कार्यालय के नियोजन भवन में इस प्रकल्प के संबंध में पर्यावरण विषयक जनसुनवाई आयोजित की गई थी। जनसुनवाई में पर्यावरण मंडल के अधिकारी, कंपनी प्रतिनिधि, मुधोली–जैरामपुर–गणपुर क्षेत्र के किसान, सामाजिक कार्यकर्ता तथा जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
सुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने लिखित एवं मौखिक आपत्तियां दर्ज कराते हुए परियोजना से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गंभीर प्रश्न उठाए। किसानों का आरोप है कि भूमि खरीद एवं हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, किंतु मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार की गारंटी तथा पर्यावरणीय प्रभावों के संबंध में कंपनी की ओर से कोई ठोस एवं स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया गया है।
किसानों ने कहा, “हमारी जमीनें पीढ़ियों से खेती योग्य और उपजाऊ हैं। इन्हीं खेतों से हमारे परिवार का भरण-पोषण होता है। यदि जमीन चली गई तो हम अपना जीवन कैसे चलाएंगे?” कई किसानों ने बाजार दर के अनुरूप उचित मुआवजा देने की मांग की। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि केवल आर्थिक मुआवजा पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक सदस्य को स्थायी रोजगार देने की लिखित गारंटी दी जानी चाहिए।
पर्यावरण संबंधी जनसुनवाई में मुधोली चक नं. 2 में प्रस्तावित लौह (आयरन) परियोजना के संबंध में वरद फेरो अलॉय कंपनी के अधिकारियों ने परियोजना की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। कंपनी की ओर से बताया गया कि इस परियोजना के माध्यम से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे, किसानों को उचित मुआवजा दिया जाएगा तथा स्वास्थ्य, शिक्षा और परियोजना क्षेत्र में आने वाले गांवों के विकास की जिम्मेदारी भी निभाई जाएगी।
हालांकि, जनसुनवाई के दौरान किसानों और ग्रामीणों ने अपनी चिंताएं भी व्यक्त कीं। उनका कहना था कि परियोजना से उत्पन्न होने वाला प्रदूषण भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है। साथ ही, क्षेत्र की उपजाऊ कृषि भूमि प्रभावित होकर खेती के लिए अभिशाप साबित हो सकती है। ग्रामीणों ने यह भी आशंका जताई कि प्रदूषण और औद्योगिक गतिविधियों के कारण पशुओं के लिए चारे की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
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किसानों ने कहा कि यदि उनकी सहमति के बिना भूमि अधिग्रहण का प्रयास किया गया तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेंगे। उन्होंने दोहराया कि ठोस पुनर्वास योजना, उचित मुआवजा और रोजगार की गारंटी मिलने तक वे अपनी जमीन नहीं देंगे। जनसुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि किसानों की सभी आपत्तियों और सुझावों को दर्ज कर उच्च स्तर पर भेजा जाएगा तथा अंतिम निर्णय लेते समय स्थानीय लोगों की भावनाओं का ध्यान रखा जाएगा।
कंपनी के प्रतिनिधियों ने दावा किया कि इस परियोजना से क्षेत्र में औद्योगिक विकास और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। हालांकि, जब तक लिखित आश्वासन और स्पष्ट नीति सामने नहीं आती, तब तक किसान अपने विरोध पर कायम रहने के संकेत दे रहे हैं। मुधोली–जैरामपुर–गणपुर क्षेत्र में प्रस्तावित यह परियोजना अब केवल भूमि अधिग्रहण का मुद्दा न रहकर आजीविका, पर्यावरण और स्थानीय अधिकारों से जुड़ा संवेदनशील विषय बन गई है।