मनपा में गाड़ी की मांग (AI Generated image)
Nagpur MNPA Administration vs Ruling Party: नागपुर मनपा में 4 वर्षों के प्रशासक राज के बाद सत्ता स्थापित होने को अब एक माह का ही समय बीता है लेकिन विभिन्न समितियों के सभापति और उपसभापति तय होते ही अब सभापतियों द्वारा गाड़ियों की मांग की जा रही है। हालांकि अब तक सभापति और उपसभापति की ओर से पदग्रहण भी नहीं किया गया लेकिन पदग्रहण के पहले ही सरकारी वाहन उपलब्ध कराने के लिए मोर्चाबंदी शुरू हो गई है।
जानकारों की मानें तो नियमों के अनुसार महापौर, उपमहापौर, स्थायी समिति सभापति, सत्ता पक्ष नेता, विपक्ष के नेता, दुर्बल घटक समिति सभापति और परिवहन समिति सभापति को ही वाहनों उपलब्ध कराने का विकल्प है। इसके अलावा किसी भी समिति के सभापति को वाहन उपलब्ध कराने का कोई नियम नहीं है। इसके बावजूद तमाम सभापति और उपसभापति द्वारा वाहन उपलब्ध कराने की डिमांड की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार कई समितियों के सभापति पहली बार चुनकर मनपा पहुंचे हैं, किंतु उपसभापति वरिष्ठ पार्षदों में से चुने गए हैं। हालांकि सत्ता पक्ष की ओर से विकास कार्यों में सत्ता पक्ष और प्रशासन के बीच तालमेल के लिए इस तरह का समीकरण तय किया गया है किंतु अब पहली बार पद मिलते ही कुछ सभापतियों ने कार्यालय के साथ ही वाहन भी उपलब्ध करने की मांग शुरू कर दी।
बताया जाता है कि वाहन उपलब्ध कराने के लिए अधिकारियों पर दबाव भी डाला जा रहा है। बताया जाता है कि मंगलवार को इस संदर्भ में मनपा मुख्यालय में अधिकारियों की क्लास भी ली गई। हालांकि अधिकारियों की ओर से स्पष्ट रूप से इस तरह का कोई नियम या विकल्प उपलब्ध नहीं होने की जानकारी तो दी किंतु वरिष्ठों की आड़ में सभापति की ओर से दबाव बनाने का प्रयास किया गया।
विषय समिति के सभापतियों को वाहन देने का कोई आधिकारिक नीतिगत प्रावधान नहीं है। पिछले कार्यकाल तक इन सभापतियों को वाहन नहीं दिए जाते थे और केवल जोन सभापतियों को ही यह सुविधा उपलब्ध थी। अधिकारियों का मानना है कि यदि इन सभापतियों की मांग मानी जाती है तो यह एक गलत परंपरा की शुरुआत होगी।
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मंगलवार को इस संदर्भ में अधिकारियों के साथ हुई बैठक में स्पष्ट बताया गया कि प्रशासन नियमों के बाहर जाकर इस तरह का कार्य नहीं कर सकेगा। सत्ता पक्ष को ही इस संदर्भ में कोई निर्णय लेना होगा। चूंकि यह नीतिगत निर्णय होगा जिसके लिए सदन में प्रस्ताव भी लाना पड़ सकता है।
उल्लेखनीय है कि गत समय भी मनपा की सभा में इसी तरह से पदाधिकारियों को वाहन उपलब्ध कराने का विषय लाया गया था। जहां पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी बहस और नोकझोंक हुई थी। विपक्ष का मानना था कि मनपा के पास आय के सीमित स्रोत हैं। यहां तक कि कई प्रकल्पों को पूरा करने के लिए कर्ज लेना पड़ता है। ऐसे में इस तरह की फिजूलखर्ची नहीं होना चाहिए।
विपक्ष की मानें तो केवल वाहन उपलब्ध कराने से नहीं होगा बल्कि वाहन देने के बाद पेट्रोल और ड्राइवर पर भी मनपा को अलग से खर्च करना होगा। इसके अलावा समितियां केवल प्रशासन के सहयोग के लिए बनती हैं जिन्हें कुछ मामलों में प्रशासन को सुझाव देना होता है। वैसे भी पार्षद मनपा आते हैं, ऐसे में मनपा आने के लिए वाहन उपलब्ध कराना तर्कसंगत नहीं है। इस पर सभापतियों को भी मंथन करना चाहिए।