वेस्ट से वेल्थ की ओर नागपुर! बायो-सीएनजी और आरडीएफ निर्माण से बदलेगा भांडेवाड़ी का चेहरा, जानें पूरा प्लान

Bhandewadi Dumping Yard: भांडेवाड़ी को कचरे के पहाड़ों से मिलेगी मुक्ति! महापौर नीता ठाकरे और आयुक्त ने किया डंपिंग यार्ड का निरीक्षण। बायो-सीएनजी और खाद बनाने के प्रोजेक्ट को गति। यहां पढ़ें पूरी खबर।
Nagpur Mayor Nita Thackeray and Commissioner Dr. Vipin Itankar review the integrated waste management plan at Bhandewadi.
भांडेवाड़ी का निरीक्षण करती महापौर नीता ठाकरे (सौजन्य-नवभारत)
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Nagpur Municipal Corporation Waste Management: नागपुर शहर को कचरा मुक्त बनाने और स्वच्छता अभियान को गति देने के उद्देश्य से महापौर नीता ठाकरे और मनपा आयुक्त डॉ. विपिन इटनकर ने मंगलवार को भांडेवाड़ी डंपिंग यार्ड का जायजा लिया।

इस दौरे के दौरान उन्होंने भांडेवाड़ी में स्थित 'एकीकृत घनकचरा प्रबंधन योजना' के तहत चल रहे विभिन्न कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान अतिरिक्त आयुक्त वसुमना पंत, उपायुक्त राजेश भगत, अधीक्षक अभियंता डॉ. श्वेता बनर्जी, मुख्य स्वच्छता अधिकारी डॉ. गजेंद्र महल्ले और संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

प्रति दिन 1300 मीट्रिक टन कचरे का होगा निपटारा

शहर में वर्तमान में प्रति दिन लगभग 1300 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न हो रहा है। इस कचरे के प्रबंधन के लिए 'सुसबिडी' (SusBDe) कंपनी फिलहाल 250-300 मीट्रिक टन कचरे पर प्रक्रिया कर रही है वहीं 'भूमि ग्रीन एनर्जी एन्वायरोकेयर एलएलपी' द्वारा जल्द ही 500 मीट्रिक टन कचरे पर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि इन योजनाओं के पूर्ण रूप से सक्रिय होने के बाद शहर में कचरे के नये ढेर नहीं बनेंगे और पुराने कचरे को भी तेजी से समाप्त कर जगह खाली की जा सकेगी।

समय सीमा में पूरा करें काम

निरीक्षण के दौरान महापौर नीता ठाकरे ने सुसबिडी कंपनी के प्रतिनिधियों को कचरा प्रसंस्करण के लिए शेष मशीनरी जल्द से जल्द लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कंपनी को अपने बायोगैस प्रोजेक्ट के लिए एक 'टाइमबाउंड प्रोग्राम' (समयबद्ध कार्यक्रम) पेश करने को भी कहा है।

महापौर ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि निर्धारित समय के भीतर कचरे के ढेरों को कम किया जाए और डंपिंग यार्ड की जगह को खाली कराया जाए। उन्होंने पूरे परिसर में स्वच्छता बनाए रखने और शेष कार्यों को युद्ध स्तर पर पूरा करने की हिदायत भी दी।

वेस्ट से बनेगा बायो-सीएनजी और जैविक खाद

इन परियोजनाओं के माध्यम से कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटारा कर उससे आरडीएफ, बायो-सीएनजी और जैविक खाद तैयार की जाएगी। विशेष रूप से पुणे की भूमि ग्रीन कंपनी के साथ अगले 5 वर्षों के लिए अनुबंध किया गया है जो कचरे से खाद और आरडीएफ निर्माण का कार्य करेगी।

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