नागपुर NMC फंड: 270 करोड़ रुपये अटके, क्या रुक जाएंगे शहर के विकास कार्य? जानें क्यों खाली है खजाना
NMC Financial Crisis: नागपुर मनपा पर वित्तीय संकट! नियमों की अनदेखी के कारण 15वें वित्त आयोग का ₹270 करोड़ का फंड अटका। ई-बस और सड़कों के काम अधर में।
- Written By: प्रिया जैस
नागपुर मनपा (फाइल फोटो)
NMC 15th Finance Commission Fund: नागपुर महानगरपालिका को 15वें वित्त आयोग के अनुदान प्राप्त करने में बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है जिसके कारण मनपा का 270 करोड़ रुपये से अधिक का फंड अटक गया है। यह स्थिति मुख्य रूप से अनिवार्य आवश्यकताओं का पालन न करने और मार्च 2022 से निर्वाचित निकाय की अनुपस्थिति के कारण उत्पन्न हुई थी।
मनपा के आम चुनाव होने के बाद तथा राज्य के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के पास ही वित्त विभाग आने के बाद यह निधि तुरंत मिलने की आशा जताई गई थी। यहां तक कि इसमें से लगभग 82 करोड़ के अनुदान को हरी झंडी मिलने की भी घोषणा की गई थी किंतु अब तक मनपा के खाते में निधि की एक कौड़ी भी नहीं आने की जानकारी अधिकारियों ने उजागर की।
फंड की वर्तमान स्थिति और लंबित राशियां
सूत्रों के अनुसार, नागपुर शहर में हवा की गुणवत्ता और स्वच्छता में सुधार के लिए शुरुआत में लगभग 600 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे लेकिन इसमें से केवल आंशिक निधि ही जारी की गई है। हाल के वर्षों के लिए लगभग 270 करोड़ रुपये अभी भी रुके हुए हैं। इस लंबित राशि में वायु गुणवत्ता के लिए 111.10 करोड़ रुपये और जल एवं स्वच्छता के लिए 158.83 करोड़ रुपये शामिल हैं।
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नए कार्यों का प्रस्ताव अनुदान मिलने की संभावना के बीच मनपा ने भविष्य के लिए कुछ नए कार्यों का प्रस्ताव भी तैयार किया है जिनमें नई सड़कों का निर्माण, ट्रैफिक जंक्शन का विकास और वायु प्रदूषण नियंत्रण प्रणालियों का विस्तार शामिल है। मनपा को हर साल औसतन 37 करोड़ रुपये का अनुदान मिलता है जिससे शहर के विकास कार्यों को गति मिलती है।
NMC फंड रुकने का मुख्य कारण
15वें वित्त आयोग के फंड तक पहुंचने के लिए महानगरपालिकाओं को कुछ अनिवार्य शर्तों को पूरा करना होता है जिनमें एक निर्वाचित निकाय का होना और संपत्ति कर में 15% की वार्षिक वृद्धि लागू करना आवश्यक है। चूंकि मार्च 2022 से आम सभा भंग थी और कोई निर्वाचित निकाय नहीं था, इसलिए वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के लिए इन शर्तों को पूरा नहीं किया जा सका जिसके चलते 15वें वित्त आयोग का निधि नहीं मिल पाई किंतु अब मनपा के आम चुनाव होकर 2 माह से अधिक का समय बीत गया है।
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इसके बावजूद अब तक निधि अटकी होने से आश्चर्य जताया जा रहा है। वित्त आयोग से मिलने वाली निधि का उपयोग शहर के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों के लिए किया जाना है।
- ई-बसें : 140 करोड़ रुपये
- सड़क कार्य (22 सड़कें) : 35 करोड़ रुपये
- उद्यान विकास (10 पार्क) : 35 करोड़ रुपये
- मैकेनिकल स्वीपर (यांत्रिकी झाड़ू) : 4.50 करोड़ रुपये
- प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली : गंगाबाई घाट, मानेवाड़ा और मोक्षधाम घाट पर वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए 8 करोड़ रुपये आवंटित हैं।
