हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
High Court Nagpur Bench: नागपुर में लेआउट में धांधली किए जाने का आरोप लगाते हुए शिवगंगा कांबले सहित 9 लोगों की ओर से हाई कोर्ट में फौजदारी रिट याचिका दायर की गई। याचिका में याचिकाकर्ताओं की ओर से इस संदर्भ में नेताजी को-ऑपरेटिव हाससिंग सोसाइटी के अध्यक्ष दीपक दुबे, रश्मी जोशी, इंदर शाहू, सुषमा शाहू, राज साखरे, राज खरे और कुदुस शेख के खिलाफ दायर मामले की जांच करने की मांग की।
याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल पानसरे और न्यायाधीश निवेदिता मेहता ने एनआईटी के कामकाज पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। साथ ही संदिग्ध भूमि नियमितीकरण मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि कैसे एक व्यक्ति के पास केवल एक एकड़ जमीन होने के बावजूद एनआईटी ने 7.72 एकड़ भूमि का नक्शा मंजूर कर दिया?
हाई कोर्ट ने नोट किया कि बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद एनआईटी ने अपना जवाब दाखिल नहीं किया है। कोर्ट ने कहा कि इस संदर्भ में एनआईटी के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला जाएगा।
एनआईटी को निर्देश दिया है कि वह अगले 10 दिनों के भीतर एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करे और उन अधिकारियों के विवरण प्रदान करे जिन्होंने इस फाइल को मंजूरी दी थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि एनआईटी ने 159 प्लॉट धारकों को अवैध रूप से नियमितीकरण पत्र जारी किए हैं।
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याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि चूंकि एनआईटी ने अभी तक नक्शा रद्द नहीं किया है, इसलिए प्लॉट धारक इन संपत्तियों को बेचने के लिए समझौते कर रहे हैं जिससे भविष्य में मुकदमों की संख्या बढ़ सकती है।
सुनवाई के दौरान मानकापुर पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक हरेश कलसेकर ने बताया कि एनआईटी ने 26 दिसंबर 2024 को विवादित भूखंडों पर नियमितीकरण और निर्माण पर रोक लगा दी थी। अदालत ने इस मामले की जांच की निगरानी कर रहे सदर डिवीजन के पुलिस अधिकारी सुहास जगताप और जांच अधिकारी को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।