महाराष्ट्र के गोल्ड ब्लॉक टेंडर पर कानूनी घमासान, इस खामी के कारण हाई कोर्ट ने CERT-In को सौंपी जांच
Gold Mine Tender Maharashtra: भीमसेन किला गोल्ड ब्लॉक टेंडर विवाद। हाई कोर्ट ने 'सर्ट-इन' को सौंपी तकनीकी जांच। कुंदन गोल्ड माइन्स ने सिस्टम में खराबी का लगाया आरोप।
- Written By: प्रिया जैस
हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
Bhimsen Kila Gold Block: भीमसेन किला गोल्ड ब्लॉक के खनन पट्टे के लिए जारी टेंडर और उसमें किए गए संशोधनों की प्रक्रिया को चुनौती देते हुए कुंदन गोल्ड माइन्स प्रा.लि. द्वारा हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किल्लोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने तकनीकी विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया है।
कंपनी का आरोप है कि सिस्टम में आई तकनीकी खराबी की वजह से वह अपनी बिड (बोली) जमा करने से वंचित रह गई थी। अदालत ने माना कि कम्प्यूटर विज्ञान से जुड़े इन तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच के लिए विशेषज्ञों की राय जरूरी है क्योंकि अदालत के पास इस क्षेत्र में विशेषज्ञता नहीं है जिसके बाद मामले की जांच इंडियन कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) को सौंप दी है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जुगलकिशोर गिल्डा ने पैरवी की।
राष्ट्रीय नोडल एजेंसी
- CERT-In की भूमिका : इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत काम करने वाली यह राष्ट्रीय नोडल एजेंसी प्रतिवादी के सिस्टम की जांच करेगी। अदालत ने CERT-In के महानिदेशक से 10 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार (प्रशासन) को सौंपने का अनुरोध किया है।
- निरीक्षण की अनुमति : यदि CERT-In को आवश्यक लगता है तो वह निरीक्षण के लिए याचिकाकर्ता के कार्यालय के सिस्टम की भी जांच कर सकती है।
- जांच का खर्च : अदालत ने आदेश दिया है कि जांच का खर्च शुरुआत में प्रतिवादी संख्या 2 द्वारा वहन किया जाएगा। हालांकि यदि रिपोर्ट में सिस्टम में कोई खराबी नहीं पाई जाती है तो याचिकाकर्ता कंपनी को यह राशि प्रतिवादी को वापस करनी होगी।
सोना, चांदी और सीसा जैसे महत्वपूर्ण खनिज
वरिष्ठ अधिवक्ता गिल्डा ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने 25 जुलाई 2025 को विभिन्न खनिजों के खनन पट्टे और कंपोजिट लाइसेंस के लिए इलेक्ट्रॉनिक बोलियां आमंत्रित की थीं। इस निविदा में चूना पत्थर के 2 ब्लॉक, लौह अयस्क (Iron ore) के 4 ब्लॉक और 7 अन्य खनिज ब्लॉक शामिल थे। इन 7 ब्लॉकों में तांबा, सोना, चांदी और सीसा जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के ब्लॉक भी शामिल हैं।
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याचिकाकर्ता कंपनी कुंदन गोल्ड माइन्स ने 4 सितंबर 2025 को भीमसेन किला गोल्ड ब्लॉक के लिए टेंडर दस्तावेज प्राप्त किए थे। हालांकि विवाद तब उत्पन्न हुआ जब सरकार ने 28 अक्टूबर 2025 को टेंडर दस्तावेजों के संबंध में एक शुद्धिपत्र जारी किया और नियमों में कुछ बदलाव किए। इसी संशोधित निविदा प्रक्रिया को चुनौती देते हुए कंपनी ने उच्च न्यायालय की शरण ली है।
