Standing Committee Chairman (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nagpur Municipal Election: नागपुर महानगरपालिका में महापौर पद के बाद सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली पद स्थायी समिति सभापति का माना जाता है। स्थायी समिति सभापति के पास मनपा की “तिजोरी की चाबी” होती है, क्योंकि शहर में होने वाले अधिकांश विकास कार्यों के लिए निधि का आवंटन इसी समिति के माध्यम से किया जाता है। हालिया चुनावी नतीजों के बाद अब महानगरपालिका में स्थायी समिति सभापति का चयन राजनीतिक गलियारों में सबसे अधिक चर्चा का विषय बना हुआ है।
यह तय माना जा रहा है कि स्थायी समिति सभापति भाजपा का ही होगा, लेकिन अब तक किसी नाम पर आधिकारिक चर्चा न होने के कारण यह सवाल गहराता जा रहा है कि आखिर किसके हाथों में मनपा की आर्थिक कमान आएगी और किसके सिर यह ताज सजेगा। इसे लेकर कुछ वरिष्ठ पार्षदों में बेचैनी भी देखी जा रही है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार सभापति पद के चयन में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की आपसी सहमति ही निर्णायक होगी। फरवरी के पहले सप्ताह में महापौर चुनाव के तुरंत बाद पहले स्थायी समिति के 16 सदस्यों और फिर सभापति का चुनाव संपन्न होगा।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, महापौर पद महिला वर्ग के लिए आरक्षित होने के कारण स्थायी समिति सभापति पद पुरुष वर्ग से दिए जाने की संभावना है। पूर्व नागपुर से बाल्या बोरकर, बंटी कुकडे और पिंटू झलके जैसे वरिष्ठ पार्षदों को पहले भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिल चुकी हैं। बाल्या बोरकर और पिंटू झलके स्थायी समिति के सभापति रह चुके हैं, हालांकि पिंटू झलके का कार्यकाल कोरोना काल की भेंट चढ़ गया था। ऐसे में यदि पूर्व नागपुर को फिर मौका मिलता है, तो पिंटू झलके का नाम दोबारा चर्चा में आ सकता है।
वहीं, बंटी कुकडे को पूर्व में परिवहन समिति सभापति और भाजपा शहर अध्यक्ष का पद मिल चुका है, लेकिन अब तक स्थायी समिति सभापति का अवसर नहीं मिला।
जानकारी के अनुसार, पिछली सत्ता में उत्तर नागपुर से वीरेंद्र कुकरेजा को स्थायी समिति सभापति बनाया गया था। ऐसे में इस बार उत्तर नागपुर को दोबारा यह पद मिलना मुश्किल माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पार्षद दिलीप दिवे को पहले केवल शिक्षण समिति सभापति बनाया गया था, जबकि सुनील हिरणवार को अब तक कोई बड़ा पद नहीं मिल पाया। वहीं, भाजपा के वरिष्ठ पार्षद संदीप गवई को तीन कार्यकाल पूरे करने के बावजूद अब तक कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है। इस कारण इस बार उनके नाम पर सहमति बनने की भी प्रबल संभावना जताई जा रही है।
भारी बहुमत मिलने के बाद भाजपा नेतृत्व, विशेषकर देवेंद्र फडणवीस और नितिन गडकरी गुट, आपसी संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रहा है। चर्चा है कि पार्टी किसी ऐसे अनुभवी पार्षद को मौका देना चाहती है, जो चार वर्षों के प्रशासक राज के बाद पटरी से उतरी महानगरपालिका की आर्थिक व्यवस्था को संभाल सके।
इसके साथ ही पश्चिम, दक्षिण और पूर्व नागपुर के बीच क्षेत्रीय संतुलन बनाने के लिए भी सभापति पद का उपयोग किया जा सकता है। इस बार कई शिक्षित और युवा पार्षद चुनकर आए हैं, जिन्हें स्मार्ट सिटी और आधुनिक विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए आगे लाया जा सकता है।
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