NIA अधिकारी बनकर साइबर ठगी, मुंबई में पूर्व BMC ठेकेदार को लगाई 16.5 लाख की चपत

Mumbai Cyber Crime: मुंबई में साइबर ठगों ने पूर्व BMC ठेकेदार को NIA अधिकारी बनकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया। दिल्ली कार ब्लास्ट केस और RBI वेरिफिकेशन का डर दिखाकर 16.5 लाख रुपये ठग लिए।
Mumbai BMC Contractor Fraud
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Mumbai BMC Contractor Fraud: मुंबई में साइबर अपराधियों ने एक पूर्व BMC ठेकेदार को 'डिजिटल अरेस्ट' का शिकार बनाकर 16.5 लाख रुपये की चपत लगाई है। ठगों ने खुद को NIA अधिकारी बताकर पीड़ित को दिल्ली कार ब्लास्ट केस में फंसाने का डर दिखाया और 'RBI वेरिफिकेशन' के नाम पर पैसे ऐंठ लिए।

यह सनसनीखेज मामला मुंबई के अंधेरी (पूर्व) इलाके का है। पुलिस के अनुसार, पीड़ित को 11 दिसंबर 2025 को एक अज्ञात नंबर से कॉल आया, जिसमें फोन करने वाले ने खुद को दिल्ली के आतंकवाद विरोधी विभाग का अधिकारी बताया। जालसाज ने पीड़ित को डराते हुए दावा किया कि लाल किले के पास 10 दिसंबर को हुए 'दिल्ली कार ब्लास्ट' मामले में उनका नाम संदिग्ध के तौर पर सामने आया है। पीड़ित को विश्वास दिलाया गया कि मामले की संवेदनशीलता के कारण उनसे गुप्त पूछताछ की जाएगी और उन्हें 'डिजिटल अरेस्ट' पर रखा गया है।

ठगों ने खुद का बताया NIA एजेंट

ठगों ने अपनी कहानी को पुख्ता करने के लिए पीड़ित को 'सिग्नल' (Signal) ऐप डाउनलोड करने को कहा। वीडियो कॉल के दौरान, एक जालसाज ने खुद को एनआईए (NIA) के तत्कालीन प्रमुख सदानंद दाते के रूप में पेश किया। यह ध्यान देने योग्य है कि आईपीएस अधिकारी सदानंद दाते जनवरी 2026 तक एनआईए प्रमुख थे, जिसके बाद उन्होंने महाराष्ट्र पुलिस की कमान संभाली।

जालसाजों ने पीड़ित पर दबाव बनाते हुए आरोप लगाया कि उनके मोबाइल नंबर से जुड़े बैंक खाते के माध्यम से करीब 7 करोड़ रुपये का मनी लॉन्ड्रिंग लेनदेन हुआ है। उन्हें एक फर्जी 'अरेस्ट वारंट' भी भेजा गया ताकि वे पूरी तरह डर जाएं।

गोपनीयता का दबाव और लाखों का ट्रांजेक्शन

जालसाजों ने पीड़ित के साथ एक तथाकथित 'गोपनीयता समझौता' किया, जिसके तहत उन्हें अपने परिवार से भी यह जानकारी साझा करने की मनाही थी। पीड़ित को इतना डराया गया कि उसे हर घंटे ऐप पर 'I’m safe' (मैं सुरक्षित हूं) का संदेश भेजने का निर्देश दिया गया। इसके बाद, ठगों ने पीड़ित से उनकी वित्तीय संपत्ति को एक निर्दिष्ट बैंक खाते में ट्रांसफर करने को कहा, यह दावा करते हुए कि यह 'RBI वेरिफिकेशन' की प्रक्रिया का हिस्सा है और जांच के बाद पैसे लौटा दिए जाएंगे।

पीड़ित ने 16 दिसंबर से 6 जनवरी के बीच कुल 16.5 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। जब उन्होंने रिफंड मांगा, तो जालसाजों ने उन्हें ब्लॉक कर दिया। अंततः धोखाधड़ी का एहसास होने पर उन्होंने पश्चिम क्षेत्र साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।