नागपुर न्यूज
Nagpur Medical Parking: शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय व अस्पताल में पार्किंग की समस्या का जल्द ही निराकरण हो जाएगा। परिसर में तीन मल्टीप्लाजा पार्किंग इमारत का निर्माण कार्य जोरों पर है। पहली इमारत का काम लगभग पूरा हो गया है। फिलहाल फिनिसिंग की जा रही है। इन इमारतों में 2,000 से अधिक दोपहिया, चारपहिया वाहनों की पार्किंग की जाएगी।
मेडिकल में पार्किंग की समस्या बढ़ती जा रही है। हालांकि मेडिकल कंज्यूमर सोसाइटी द्वारा पार्किंग स्टैंड चलाये जा रहे हैं, लेकिन यह केवल अस्पताल साइट तक ही सीमित है। डॉक्टर, नर्स सहित कर्मचारियों के वाहनों की पार्किंग के लिए जगह की कमी होने से मार्ड हॉस्टल के सामने कतार से कारों की पार्किंग की जाती है। विविध तरह के विकास कार्यों के तहत तीन मल्टीप्लाजा पार्किंग इमारत बनाई जा रही है।
इनमें शव विच्छेदन गृह के पास की इमारत का काम पूरा हो गया है। चार मंजिल इस पार्किंग प्लाजा में 572 चारपहिया और 1,046 दोपहिया वाहनों की पार्किंग की क्षमता होगी। वहीं ओपीडी के सामने बन रही इमारत भी चार मंजिला है। इसका पहला स्लैब बन गया है। वहीं डीन कार्यालय के सामने वाली इमारत सबसे बड़ी है। इनमें 5 मंजिल की पार्किंग होगी। इसका भी चार मंजिल तक काम हो गया है।
पार्किंग प्लाजा के निर्माण के बाद मेडिकल में तितर-बितर पार्किंग की समस्या से निजात मिलेगी। साथ ही व्यवस्था भी बनेगी। वर्तमान में डॉक्टरों और कर्मचारियों के वाहनों की पार्किंग कैंटीन के सामने की जाती है। अब यहां जगह कम पड़ने लगी है। साथ ही वाहनों की चोरी की बढ़तीं घटनाओं की वजह से सुरक्षा रक्षक तैनात किये गये हैं। यही स्थिति डीन कार्यालय के भी सामने बनी हुई है। चारों ओर कारों का जमावड़ा होने से दिक्कतें आती हैं। नई इमारतों के निर्माण का कार्य पीडब्ल्यूडी द्वारा किया जा रहा है।
यह भी पढ़ें – कपिलनगर थाने में हाई-वोल्टेज ड्रामा! बॉयफ्रेंड संग अजमेर में मिली 19 वर्षीय युवती, FIR पर हंगामा
नर्सिंग कॉलेज की इमारत का भी काम जोरों पर चल रहा है। स्थापना के बाद पहली दफा कॉलेज को अपनी खुद की इमारत मिलेगी। तीन मंजिल इमारत के एक साइट का काम हो गया है। इसमें क्लासरूम, सेमिनार हॉल, प्रशासकीय कार्यालय सहित हॉस्टल की भी सुविधा रहेगी।
गर्ल्स हॉस्टल का काम हो गया है। तीन मंजिल इमारत में 400 लड़कियों के रहने की सुविधा उपलब्ध होगी। अगले वर्ष तक हॉस्टल में रहने की सुविधा मिलेगी। एमबीबीएस और स्नातकोत्तर की सीटें बढ़ने के बाद छात्राओं को जगह कम पड़ रही थी। यह निर्माण कार्य भविष्य की जरूरत को ध्यान में रखकर किया गया है।