मानकापुर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स: टपकती छत, उखड़ता ट्रैक, ऐसे कैसे नागपुर बनेगा इंटरनेशनल स्पोर्ट्स हब?
Mankapur Sports Complex Nagpur: 683 करोड़ का बजट, 26 साल का इंतजार। क्या नागपुर का मानकापुर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनेगा वर्ल्ड क्लास? खिलाड़ियों का दर्द और प्रशासन की बेरुखी पर विशेष रिपोर्ट।
- Written By: प्रिया जैस
मानकापुर स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स और देवेंद्र फडणवीस (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Nagpur Sports Infrastructure: महाराष्ट्र की उपराजधानी खेलों के मामले में एक अजीब विरोधाभास जी रही है। हजारों युवा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमकने का सपना देखते हैं लेकिन शहर के पास ऐसा समग्र खेल परिसर नहीं है जहां विश्व स्तरीय प्रतियोगिताएं नियमित रूप से आयोजित हो सकें। सबसे बड़ी उम्मीद का केंद्र बना मानकापुर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स। लेकिन यह परियोजना ही सवालों के घेरे में है।
2001 से 2026 : समय ज्यादा, परिणाम कम
- निर्माण की शुरुआत : लगभग 2001
- उद्घाटन : 2016
- कुल समय : 15–16 वर्ष
- राष्ट्रीय टूर्नामेंट : लगभग 20–25
करीब ढाई दशक में करोड़ों खर्च हुए, पर शहर को वह पहचान नहीं मिली जिसकी उम्मीद थी। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि ‘परियोजना बनी लेकिन संचालन मॉडल नहीं बना।’
बरसात में टपकता है छत से पानी
इनडोर स्टेडियम की छत से बारिश में पानी टपकने की शिकायतें खिलाड़ियों ने कई बार उठाईं। सवाल यह है कि जब अभ्यास ही सुरक्षित नहीं तो अंतरराष्ट्रीय आयोजन कैसे संभव होंगे?
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हॉकी और एथलेटिक्स : अधूरे सपने हॉकी के लिए एस्ट्रोटर्फ वर्षों से निर्माणाधीन।
मानकापुर में सिंथेटिक ट्रैक को गैर खेल गतिविधियों में उपयोग से नुकसान, कई जगह से उखड़ा।
एक एथलेटिक्स कोच नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं, ‘हमारे खिलाड़ी राज्य स्तर पर पदक जीतते हैं लेकिन राष्ट्रीय तैयारी के लिए उन्हें समस्या का सामना करना पड़ता है।’
क्रिकेट क्यों सफल, बाकी खेल क्यों नहीं?
नागपुर में क्रिकेट का मजबूत ढांचा है क्योंकि उसका संचालन स्वायत्त संस्था और स्पष्ट आयोजन मॉडल के तहत होता है। लेकिन अन्य खेल पूरी तरह सरकारी ढांचे पर निर्भर हैं- न मार्केटिंग, न राजस्व मॉडल, न ही स्वतंत्र प्रबंधन। यही कारण है कि शहर ‘मल्टी-स्पोर्ट हब’ बनने की बजाय ‘वन-स्पोर्ट सिटी’ बनता जा रहा है।
683 करोड़ : नया अवसर या पुरानी कहानी?
राज्य सरकार ने 65 एकड़ क्षेत्र में पुनर्विकास के लिए 683 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। उम्मीद है कि आधुनिक इंडोर-आउटडोर सुविधाएं बनेंगी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने खेल संरचना मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई है, पर असली प्रश्न : क्या समयसीमा तय है? क्या स्वतंत्र खेल प्राधिकरण बनेगा? क्या रखरखाव के लिए स्थायी फंड होगा? यदि जवाब स्पष्ट नहीं हुए तो एक और पीढ़ी इंतजार करती रह जाएगी।
समाधान : यह होना चाहिए?
1. समयबद्ध निर्माण और सार्वजनिक प्रगति रिपोर्ट।
2. PPP मॉडल और कॉरपोरेट साझेदारी।
3. स्वतंत्र स्पोर्ट्स मैनेजमेंट बोर्ड।
4. अंतरराष्ट्रीय इवेंट आकर्षित करने की रणनीति।
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फैक्ट फाइल
- 65 एकड़ में पुनर्विकास
- ₹683 करोड़ बजट
- 2001 में प्रारंभिक निर्माण
- 2016 उद्घाटन
- 20-25 राष्ट्रीय आयोजन
खेल अधिकारी फोन ही नहीं उठाते
नागपुर के पास संसाधन हैं, प्रतिभा है और राजनीतिक इच्छाशक्ति भी दिखाई देती है। कमी है तो सिर्फ ठोस कार्यान्वयन और प्रशासनिक जवाबदेही की। अब देखना यह है कि 683 करोड़ का यह निवेश नागपुर को खेल राजधानी बनाएगा या फिर ‘सपने पूरे, मैदान अधूरे’ की हेडलाइन आने वाले वर्षों में भी सच साबित होगी। जिला खेल अधिकारी पल्लवी धात्रक से खेल विकास, खिलाड़ियों से संबंधित चर्चा करने के लिए कॉल करने पर वे कॉर रिसीव ही नहीं करतीं।
उपयोगिता और परिचालन के लिए नियम जरूरी
सिटी में खेल मैदानों के निर्माण और संचालन के लिए गंभीरता से विचार जरूरी है। निर्माण के बाद के उपयोगिता और परिचालन की नियमावली हो। मैदान सिर्फ संबंधित खेल के लिये उपयोग हो। भर्ती प्रक्रिया में सिंथेटिक ट्रेक का उपयोग न हो। वहीं राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों को भी सप्ताह में दो-तीन दिन प्रैक्टिस की अनुमति दी जाये राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा आयोजन के दौरान मैदान पर चेंजिंग रूम और वॉशरूम भी होना चाहिए। मानकापुर स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स बनने के बाद हम इसके रखरखाव के लिए प्रशासन और सरकार से चर्चा करेंगे।
– डॉ. शरद सूर्यवंशी, पूर्व अंतरराष्ट्रीय धावक व सचिव जिला एथलीट संगठन
- नवभारत लाइव पर नागपुर से जयदीप रघुवंशी की रिपोर्ट
