नागपुर में 5 करोड़ की बिजली चोरी उजागर, महावितरण के छापे में चौंकाने वाले खुलासे
Mahavitaran Drive: नागपुर में महावितरण का बड़ा एक्शन। 5 करोड़ की बिजली चोरी पकड़ी गई। रिमोट कंट्रोल और हुक डालकर हो रही थी चोरी। 2,130 लोगों पर गिरी गाज, 36 पर FIR दर्ज।
- Written By: प्रिया जैस
बिजली चोरी (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Nagpur Power Theft: महावितरण द्वारा बिजली चोरों के खिलाफ चलाए गए विशेष अभियान में नागपुर जिले में करीब 5 करोड़ की बिजली चोरी उजागर हुई। बीते 9 महीनों में 2,130 बिजली चोरों को पकड़ा गया जिनमें से 900 से अधिक तो बिजली के तार में सीधे हुक डालकर बिजली चोरी कर रहे थे। इन पर 1 करोड़ से अधिक का जुर्माना ठोका गया और कुछ के खिलाफ तो सीधे पुलिस में मामला दर्ज कराया गया।
1,963 ग्राहक तो सीधे बिजली चोरी करते धरे गए। वहीं 167 ऐसे थे जो बिजली का गलत उपयोग कर रहे थे। महावितरण के उपमुख्य जनसंपर्क अधिकारी योगेश विटणकर ने बताया कि अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान नागपुर जिले में 11,962 उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शनों की जांच की गई।
इनमें से 1,963 उपभोक्ताओं द्वारा लगभग 4,99,58,000 रुपये की 23,82,631 यूनिट बिजली चोरी किए जाने का खुलासा हुआ। महावितरण ने नियमानुसार बिल और समझौता राशि सहित 1.03 करोड़ का जुर्माना लगाया। बिजली चोरी करने वालों पर कुल 6.02 करोड़ रुपये बकाया तय किया गया है।
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36 पर मामला दर्ज
36 बिजली चोरों के खिलाफ विभिन्न पुलिस थानों में विद्युत अधिनियम के तहत आपराधिक मामले दर्ज कराए गए हैं। इस अभियान के दौरान बिजली चोरी के अत्यंत उन्नत और चौंकाने वाले तरीके सामने आए। कार्रवाई किए गए उपभोक्ताओं में से 974 लोगों ने मुख्य बिजली लाइन पर सीधे ‘हुक’ लगाकर बिजली चोरी की थी। वहीं शेष 989 उपभोक्ताओं ने तकनीकी छेड़छाड़ का सहारा लिया था।
इनमें मीटर में रिमोट कंट्रोल लगाकर दूर से मीटर बंद करना, मीटर के पीछे छेद कर रेजिस्टेंस पैदा करना, मीटर को धीमा करने के लिए आंतरिक सर्किट में बदलाव करना अथवा मीटर को पूरी तरह निष्क्रिय कर देना जैसी तरकीबें शामिल हैं। इसके अलावा निर्धारित उद्देश्य के अलावा अन्य कार्यों के लिए बिजली का उपयोग करने वाले 167 उपभोक्ताओं पर भी कार्रवाई कर 39.30 लाख रुपये का बिल वसूला गया।
जारी रहेगा अभियान
महावितरण ने स्पष्ट किया कि बिजली चोरी का सबसे बड़ा नुकसान उन उपभोक्ताओं को होता है जो नियमित और ईमानदारी से बिजली बिल का भुगतान करते हैं। अनधिकृत विद्युत भार के कारण ट्रांसफॉर्मरों पर क्षमता से अधिक दबाव पड़ता है, जिससे ट्रांसफॉर्मर जलने, शॉर्ट सर्किट होने और बार-बार बिजली आपूर्ति बाधित होने जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
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इससे महावितरण को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ उपभोक्ताओं के असंतोष का भी सामना करना पड़ता है। बिजली चोरों के खिलाफ यह विशेष अभियान महावितरण के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक लोकेश चंद्रा, संचालक सचिन तालेवार, क्षेत्रीय संचालक परेश भागवत और मुख्य अभियंता दिलीप दोडके के मार्गदर्शन में चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आगामी दिनों में खराब मीटर वाले उपभोक्ताओं, औसत बिल पर चल रहे कनेक्शनों तथा ‘अभय योजना’ का लाभ न लेने वाले बकायेदारों की जांच की जाएगी।
