मीरा-भाईंदर में खस्ताहाल बिल्डिंग (सोर्स: साेशल मीडिया)
Mira Bhayandar Dangerous Buildings Redevelopment News: ठाणे जिले के मीरा भाईंदर क्षेत्र में खतरनाक इमारतों के पुनर्निर्माण में हो रही देरी अब केवल प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि लोगों की जान के लिए सीधा खतरा बन चुकी है। राज्य सरकार और उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद, राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर हो रही लापरवाही के कारण पुनर्विकास की प्रक्रिया जानबूझकर अटकाई जा रही है। इसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
महाराष्ट्र सरकार ने 4 जुलाई 2019 के अपने निर्णय में साफ तौर पर यह स्पष्ट किया था कि सहकारी आवास समितियों के पुनर्विकास में रजिस्ट्रार की भूमिका केवल पर्यवेक्षी होगी और किसी भी प्रकार का अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना आवश्यक नहीं है। इसके बावजूद, मीरा-भाईंदर में कुछ मामलों में पुनर्विकास प्रस्तावों को सहकारी रजिस्ट्रार कार्यालय में अटकाकर रखा जा रहा है, जिससे प्रक्रिया अनावश्यक रूप से लंबित हो रही है।
हाई कोर्ट ने भी 17 अक्टूबर 2025 की सुनवाई में यह स्पष्ट किया कि रजिस्ट्रार को पुनर्विकास प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने, निर्णय बदलने या उसे अस्वीकार करने का कोई अधिकार नहीं है। साथ ही, सरकार ने 4 नवंबर 2025 के परिपत्र में निर्देश दिया कि पुनर्विकास से संबंधित विशेष आम बैठक के लिए 14 दिनों के भीतर अधिकृत अधिकारी की नियुक्ति अनिवार्य होगी, अन्यथा संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
हाल ही में मीरारोड स्थित चंद्रेश अकॉर्ड सोसायटी का मामला प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर उदाहरण बनकर सामने आया है। सोसायटी द्वारा सभी कानूनी प्रक्रियाए पूरी कर डेवलपर नियुक्त किए जाने के बाद भी उप-रजिस्ट्रार द्वारा समय पर अधिकृत अधिकारी नियुक्त नहीं किया गया। इस देरी के चलते पुनर्निर्माण अटक गया और हाल ही में इमारत के एक फ्लैट का स्लैब गिरने से एक ही परिवार के तीन सदस्य घायल हो गए थे।
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इस घटना के बाद आक्रोशित निवासियों ने उप रजिस्ट्रार कार्यालय का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया, जिससे क्षेत्र में प्रशासन के प्रति नाराजगी साफ दिखाई दी, सरकारी नियमों के अनुसार, सहकारी आवास सोसायटी की विशेष आम बैठक ही पुनर्विकास से संबंधित सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है। यदि किसी सदस्य को आपत्ति हो, तो उसे महाराष्ट्र सहकारी समिति अधिनियम, 1960 की धारा 91 के तहत सहकारी न्यायालय में अपील करनी चाहिए, न कि प्रशासनिक प्रक्रिया को बाधित करना, स्पष्ट निर्देशों और कानूनों के बावजूद, यदि पुनर्विकास में इस प्रकार की बाधाएं जारी रहती है, तो यह न केवल व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा को भी गंभीर रूप से खतरे में डालता है।