पुराना भंडारा रोड कार्रवाई पर स्टे (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Nagpur High Court Bench Stay: नागपुर में पुराने भंडारा रोड को लेकर भले ही 25 वर्षों पूर्व विस्तार की योजना तैयार की गई हो लेकिन हाई कोर्ट में चली न्यायिक लड़ाई के कारण मामला काफी समय तक लंबित रहा है। कुछ समय पहले पूरा मसला हल होने के बाद योजना पर अमल शुरू हुआ था किंतु फिर एक बार सम्पत्तिधारकों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याचिका लंबित रहने दौरान ही अब 15 फरवरी को तहसील पुलिस थाना के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर की ओर से सम्पत्तिधारकों को नोटिस जारी किया गया जिसे चुनौती देते हुए 100 के करीब सम्पत्तिधारकों की ओर से फिर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।
इस पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किल्लोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने निर्माणों पर ‘यथास्थिति’ बनाए रखने का आदेश जारी किया। कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि अधिकारी इस नोटिस के आधार पर फिलहाल कोई कार्रवाई न करें।
उल्लेखनीय है कि संगीता जैन और कैलाश वजरानी के अलावा सतरंजीपुरा बड़ी मस्जिद कमेटी मिलाकर 100 के करीब सम्पत्तिधारकों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। मंगलवार को सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 23 फरवरी 2026 तक प्रशासन को विवादित स्थल पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई न करने और स्थिति को ज्यों का त्यों बनाए रखने का सख्त निर्देश दिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता जेडए शेखानी और एजी बाहेती, सरकार की ओर से अतिरिक्त सरकारी वकील डीपी ठाकरे और मनपा की ओर से जैमिनी कासट ने पैरवी की।
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कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया था कि यदि प्रतिवादी सरकारी पक्ष की ओर से ऐसे कोई कदम उठाने का इरादा जताया जाता है तो उनके लिए इस न्यायालय में आने का विकल्प खुला है। याचिकाकर्ताओं का मानना है कि सरकार की ओर से 31 दिसंबर 2024 को भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन अधिनियम, 2013 के तहत अधिसूचना जारी की गई है जिसमें कई बातों का पालन नहीं किया गया है।
पुराना भंडारा रोड मामले में कोर्ट को बताया गया कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन अधिनियम, 2013 की धारा 19 (1) और (2) में प्रदत्त नियमों का पालन नहीं किया गया। न तो पुनर्व्यवस्थापन और पुनर्वास को अंजाम दिया गया और न ही नियमों के अनुसार निधि जमा की गई है। कानून और नियमों के अनुसार प्रशासन की कार्यप्रणाली पूरी तरह से गलत है।