अवैध बैनर हटाने पर नेताओं के फोन: शिवजयंती बैठक में फूटा गुस्सा, शहर में पोस्टर-बैनर पर सख्ती
Sambhajinagar Illegal Banners: छत्रपति संभाजीनगर में अवैध बैनरों पर कार्रवाई के दौरान राजनीतिक दबाव और धमकियों का आरोप मनपा आयुक्त ने लगाया है। बयान से सियासी हलचल तेज हो गई।
- Written By: अंकिता पटेल
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Chhatrapati Sambhajinagar Banner Removal Drive: छत्रपति संभाजीनगर शहर में बढ़ती अवैध बैनरबाजी पर कार्रवाई को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है, मनपा आयुक्त जी. श्रीकांत ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब भी मनपा की टीम अवैध बैनरों पर कार्रवाई के लिए निकलती है, तो राजनीतिक दबाव के फोन आने लगते हैं।
यहां तक कि अधिकारियों को धमकाने की कोशिश की जाती है। तापडिया नाट्य मंदिर में पुलिस की ओर से आयोजित शिवजयंती समन्वय समिति की बैठक में उन्होंने यह मुद्दा उठाया।
आयुक्त श्री.कांत ने कहा कि शहर में स्थिति ऐसी हो गई है कि जहां भी बिजली का खंभा दिखता है वहां बैनर टंगा नजर आता है, एक भी खंभा खाली नहीं बच्चा है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान एफआईआर दर्ज करने की नौबत आते ही विभिन्न नेताओं के फोन आते हैं। अब तो ‘जीबी में देख लेंगे’ जैसी सीधी धमकियां दी जा रही हैं।
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आयुक्त के इस बयान से कुछ समय के लिए सन्नाटा छा गया व राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। इससे पहले इसी मंच से महापौर समीर राजूरकर ने भी शहर में बढ़ती बैनरबाजी पर नाराजगी जताई थी, उन्होंने कहा था कि छत्रपति शिवराय की प्रतिमाओं के आसपास भी कार्यक्रमों के लिए जगह नहीं बच रही है।
ऐसे में आयुक्त का बयान और अधिक महत्व रखता है। आयुक्त के कथन के बाद बैठक उपस्थित एक व्यक्ति ने खड़े होकर कहा कि यदि जनता की ओर से चुने गए प्रतिनिधि इस प्रकार का दबाव बना रहे हैं, तो प्रशासन के साथ शहरवासी खड़े हैं व संबंधित नाम सार्वजनिक किए जाएं, हालांकि विवाद से बचने के लिए आयुक्त ने इस पर आगे टिप्पणी नहीं की।
कार्रवाई पर दबाव की कोशिश
शहर में अवैध बैनरबाजी का मुद्दा वर्षों से बना हुआ है। नियमों की अनदेखी कर लगाए जाने वाले बोर्ड, राजनीतिक आयोजनों के नाम पर की जाने वाली विज्ञापनबाजी व कार्रवाई के दौरान आने वाला दबाव, इन तीनों कारणों से प्रशासन असमंजस में नजर आता है।
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अब आयुक्त के बयान के बाद सवाल यह है कि क्या प्रशासन सख्त कदम उठाएगा? क्या राजनीतिक हस्तक्षेप पर अंकुश लग पाएगा? शहरवासियों की निगाहे आगामी कार्रवाई पर टिकी है।
