पीएम ई-बसें (सौजन्य-नवभारत)
NMC Transport Department: नागपुर में केंद्र सरकार की पीएम ई-बस सेवा योजना के तहत महानगरपालिका के परिवहन विभाग को हाल ही में मिली 50 पर्यावरण-अनुकूल इलेक्ट्रिक बसों की उपयोगिता अब सवालों के घेरे में है।
हालांकि इन बसों का लोकार्पण स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया और इन्हें दिव्यांगों के अनुकूल बनाने के लिए ‘हाईड्रोलिक लिफ्ट’ प्रणाली से लैस किया गया है लेकिन धरातल पर इनकी पहुंच को लेकर गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं जिसे लेकर अब हाई कोर्ट ने महानगरपालिका से रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ईशा ठाकरे ने बसों और बस स्टैंड की बनावट में अंतर का मुद्दा उठाया। उन्होंने अदालत को बताया कि शहर के कई बस स्टैंड की ऊंचाई और बस के पायदान के बीच काफी अंतर है जिससे हाईड्रोलिक लिफ्ट होने के बावजूद व्हीलचेयर धारकों को बस में चढ़ने और उतरने में कठिनाई हो रही है।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट ने महानगरपालिका को आदेश दिया है कि वह ऐसे बस स्टैंडों की एक विस्तृत सूची पेश करे जिनकी ऊंचाई पीएम ई-बस के पायदान के अनुकूल है। साथ ही अधिवक्ता मनीष कठाणे को इन स्थानों का निरीक्षण कर वस्तुस्थिति पर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया।
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सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शहर के फुटपाथों और बस स्टैंड्स पर बढ़ते अतिक्रमण पर भी तीव्र नाराजगी व्यक्त की। अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा, एक बार खामला जाकर देखें। अदालत ने स्पष्ट किया कि खामला तो केवल एक उदाहरण है, असल में पूरे शहर में अतिक्रमण ने अपने पैर पसार लिए हैं जिससे यात्रियों और पैदल चलने वालों को भारी परेशानी हो रही है।
याचिका के अनुसार हाईड्रोलिक लिफ्ट वाली बसें चुनाव से पहले ही महानगरपालिका को प्राप्त हो गई थीं लेकिन आचार संहिता लागू होने का हवाला देकर इन्हें सेवा में नहीं लाया गया था। कोर्ट ने इस पर भी सवाल उठाया कि दिव्यांगों के लिए इतनी महत्वपूर्ण सेवा को तत्काल शुरू क्यों नहीं किया गया? मनपा की ओर से अधिवक्ता जैमिनी कासट ने पैरवी की।