नागपुर अस्पतालों में पार्किंग के अवैध व्यावसायिक उपयोग पर हाईकोर्ट सख्त, अब चार गुना जुर्माना
Nagpur High Court: धंतोली में अस्पतालों द्वारा पार्किंग की जगह के व्यावसायिक इस्तेमाल पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख। गलत हलफनामा देने पर पुलिस की फटकार और अब वसूला जाएगा 4 गुना भारी जुर्माना।
- Written By: रूपम सिंह
प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो-सोशल मीडिया)
Nagpur Illegal Encroachment News: धंतोली परिसर में अस्पतालों द्वारा पार्किंग के लिए तय की गई जगह का अवैध रूप से व्यावसायिक उपयोग करने के मामले को लेकर वर्ष 2012 में धंतोली नागरिक मंडल की ओर से जनहित याचिका याचिका दायर की गई। याचिका पर गुरुवार को सुनवाई के दौरान अधि. धर्माधिकारी की ओर से बताया गया कि कमेटी के चेयरमैन की ओर से कुछ सुझाव दिए जाने हैं।
इस पर न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने कहा कि निश्चित ही इस समस्या को हल करने के लिए सुझावों का स्वागत है किंतु इसे लिखित में देने के आदेश याचिकाकर्ता को दिए। साथ ही सुनवाई टाल दी।
जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं
कोर्ट ने गत सुनवाई में कहा था कि पिछले कई आदेशों के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं हुआ है। अब अदालत ने अधिकारियों को कार्रवाई का निर्देश देने के बजाय सीधे भारी जुर्माना लगाने की नई रणनीति अपनाई है। हाई कोर्ट ने पीडब्ल्यूडी को निर्देश दिया था कि वह 2 सप्ताह के भीतर इन क्षेत्रों में संपत्तियों को किराये पर देने की व्यावसायिक दरें प्रस्तुत करे।
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ये दरें प्राप्त होने के बाद मनपा उन सभी अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी करेगी जो पार्किंग की जगह पर व्यावसायिक गतिविधियां चला रहे हैं। नोटिस में पूछा जाएगा कि क्यों न उनसे पीडब्ल्यूडी द्वारा तय व्यावसायिक दर का 4 गुना जुर्माना वसूला जाए।
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जुर्माने की राशि से होगा गरीबों का इलाज
कोर्ट ने अपने आदेश में यह स्पष्ट कर दिया था कि अस्पतालों से जुर्माने के रूप में जो भी राशि वसूल की जाएगी, उसका उपयोग गरीब मरीजों के इलाज और जन कल्याण के कार्यों के लिए किया जाएगा। गत सुनवाई के दौरान अदालत में सीताबर्डी, धंतोली और रामदासपेठ जैसे इलाकों की बदतर ट्रैफिक व्यवस्था का मुद्दा भी उठा सहायक पुलिस आयुक्त (ट्रैफिक) ने 19 दिसंबर 2025 को एक हलफनामा दायर कर दावा किया था कि इन इलाकों में 16 जुलाई 2024 की अधिसूचना के तहत ट्रैफिक का सुचारु रूप से प्रबंधन किया जा रहा है।
याचिकाकर्ताओं की शिकायत को देखते हुए कोर्ट ने इस दावे की सच्चाई परखने के लिए तुरंत अधिवक्ता जे. बी. गांधी की एक सदस्यीय समिति गठित की। एडवोकेट गांधी ने पुलिस कांस्टेबल महेश नायक के साथ मौके का मुआयना किया और मात्र डेढ़ घंटे के भीतर कोर्ट में आकर बताया कि ट्रैफिक एसीपी का हलफनामा पूरी तरह झूठा है और जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।
