गोंडपिपरी: करंजी MIDC भूमि अधिग्रहण का विरोध तेज, किसानों ने जनसुनवाई बिना प्रक्रिया रोकने की चेतावनी
Chandrapur News: गोंडपिपरी में JSW स्टील के प्रस्तावित प्रोजेक्ट हेतु 12 गांवों की जमीन अधिग्रहण का विरोध। किसानों ने प्रशासन को सौंपा ज्ञापन, बिना जनसुनवाई कार्यवाही न करने की दी सख्त चेतावनी
- Written By: रूपम सिंह
प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो-सोशल मीडिया)
Maharashtra Farmers Protest: गोंडपिपरी तहसील के करंजी MIDC एरिया में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र के लिए जमीन अधिग्रहण की पृष्ठभूमि में अब किसानों का विरोध तेज़ होता जा रहा है। जिला कांग्रेस औद्योगिक विभाग चंद्रपुर और तहसील कांग्रेस औद्योगिक विभाग गोंडपिपरी की ओर से सभी पदाधिकारियों और प्रकल्प से प्रभावित किसानों ने 22 अप्रैल को उपविभागिय अधिकारी को ज्ञापन देकर प्रशासन को चेतावनी दी है कि जनसुनवाई किए बिना किसी भी हालत में ज़मीन अधिग्रहण न किया जाए।
जैसा कि ज्ञापन में बताया गया है, महाराष्ट्र सरकार ने गोंडपिपरी तहसील के करंजी MIDC इलाके में 12 गांवों की जमीन पर प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिए JSW स्टील कंपनी के साथ एक अनुबंध किया है। इस प्रकल्प में करंजी, वढोली, चेक पेल्लूर, वडकुली, चेक वडकुली, सिरसी देवलावार, चेक बर्डी, बोरगांव, धानापुर, चेक बोरगांव, लिखितवाड़ा, खरालपेठ जैसे गांवों के किसानों की हजारों हेक्टेयर उपजाऊ खेती की जमीन अधिग्रहित होने की संभावना है।
किसानों का जीवन होगा प्रभावित
इस प्रस्तावित अधिग्रहण से इलाके के किसानों की पूरी जिंदगी अस्त-व्यस्त होने की आशंका जताई गई है। उल्लेखनीय है कि बयान में यह भी गंभीर आरोप लगाया गया है कि आज तक प्रशासन या कंपनी की तरफ से स्थानीय किसानों को कोई साफ जानकारी नहीं दी गई है।
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करीब 22-23 साल पहले करंजी इलाके में कुछ खेती की जमीन ली गई थी। उस समय महाराष्ट्र सरकार ने किसानों को सही मुआवजा देने और उनके परिवार के सदस्यों को नौकरी देने का वादा किया था। कुछ जमीनों की पंजीयन प्रक्रिया भी पूरी हो गई थी। लेकिन, वो वादे पूरे नहीं हुए, और कई लोगों को आज तक नौकरी नहीं मिली, इस पर किसानों ने तीव्र अफसोस जताया है।
- 12 गांवों की हज़ारों एकड़ उपजाऊ जमीन का मुद्दा
- JSW एग्रीमेंट के बाद आंदोलन की चिंगारी
- सही मेहनताना, नौकरी और पारदर्शिता की मांग
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शासन पर विश्वास नहीं
किसानों में सरकार और कंपनियों के प्रति अविश्वास का माहौल है। अब, एक नए प्रकल्प के लिए जमीन लेने के प्रस्ताव से किसानों में डर और गुस्सा है। इसलिए दोबारा जमीन देने के बाद सही मुआवजा व नौकरी मिलेगी या नहीं? ऐसा सवाल किसानों में है। यह जानकारी भी आ रही है कि जमीन का सर्वे चल रहा है और अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन, आरोप है कि किसानों की बात सुने बगैर एकतरफा फैसला लिया जा रहा है।
इस मामले में शासन को सौंपे ज्ञापन पर कांग्रेस उद्योग सेल के जिला उपाध्यक्ष कमलेश एन. निमगड़े और अन्य पदाधिकारियों के हस्ताक्षर हैं, और इसकी एक कॉपी पूर्व मंत्री विजय वडेट्टीवार, जिलाधिकारी और तहसीलदार गोंडपिपरी को दी गई है।
इस बीच, इस बढ़ते विरोध के कारण, करंजी औद्योगिक क्षेत्र प्रकल्प का कार्यान्वयन अब विवादों में आ गया है और सबका ध्यान इस बात पर है कि प्रशासन की आगे क्या भूमिका होगी।
