हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
Digital Arrest High Court: नागपुर में हाई कोर्ट ने 1.40 करोड़ रुपये की एक बड़ी साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मामले में याचिकाकर्ता उल्हास धाबर्डे को अग्रिम जमानत प्रदान की। इस मामले में साइबर ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) का डर दिखाकर एक सेवानिवृत्त कर्मचारी से यह भारी भरकम रकम ऐंठी थी। न्या. एमडब्ल्यू चंदवानी ने दोनों पक्षों की दलीलों के बाद उक्त आदेश जारी किया। याचिकाकर्ता की अधिवक्ता अपूर्व डे ने पैरवी की।
अभियोजन पक्ष के अनुसार पीड़ित प्रकाश कोठेकर अंबाझरी स्थित आयुध निर्माणी (आर्डिनेंस फैक्टरी) के सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। प्रकाश ने धोखाधड़ी का शिकार होने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई। अभियोजन पक्ष के अनुसार पीड़ित को एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया था जिसने दावा किया कि कोठेकर के मोबाइल से अश्लील सामग्री फैलाई गई है। ठगों ने पीड़ित और उनके परिवार को ‘डिजिटल अरेस्ट’ करने की धमकी दी।
इसके बाद, ठग ने खुद को भारतीय डेटा संरक्षण बोर्ड का अधिकारी ‘मनोजकुमार शर्मा’ बताते हुए पीड़ित से बात की। उन्होंने वॉयस और वाट्सएप वीडियो कॉल पर पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग (आतंकवाद के वित्तपोषण) के झूठे केस में फंसाने की धमकी दी।
इस ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) के डर से पीड़ित ने ठगों के बताए 4 अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1,40,00,000 रुपये (एक करोड़ चालीस लाख रुपये) ट्रांसफर कर दिए। जब पीड़ित को एहसास हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है तो उन्होंने सिटी साइबर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ठगी गई रकम का एक हिस्सा याचिकाकर्ता उल्हास धाबर्डे के बैंक खाते में गया था। पीड़ित द्वारा 11 लाख रुपये सीधे आवेदक के बैंक खाते में जमा कराए गए थे। जांच में यह भी सामने आया कि इस खाते में कई अन्य लोगों से भी धोखाधड़ी की रकम आई थी जिसे बाद में 150 से अधिक अन्य बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया था।
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धाबर्डे की पैरवी कर रहे अधिवक्ता डे ने कहा कि याचिकाकर्ता इस अपराध में शामिल नहीं है बल्कि वह खुद इस धोखाधड़ी का शिकार हुआ है। समीर, अर्जुन और अविनाश सहारे नामक 3 व्यक्तियों ने ‘स्पिरुलिना पाउडर’ के व्यापार में अच्छे मुनाफे का लालच देकर उससे संपर्क किया था। व्यापार के नाम पर उन लोगों ने उल्हास का बैंक खाता नंबर और सिम कार्ड ले लिया था।
जब उल्हास को पता चला कि उसके खाते का दुरुपयोग अन्य व्यावसायिक लेन-देन के लिए किया जा रहा है और उसे धोखा दिया गया है तो उसने साइबर पुलिस में वर्तमान एफआईआर दर्ज होने से काफी पहले 22 दिसंबर 2025 को ही बेलतरोड़ी पुलिस स्टेशन में इसके खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी थी। 12 फरवरी 2026 को उसने पुलिस को अपना सिम कार्ड और खाता विवरण लेने वाले व्यक्तियों की पूरी जानकारी भी सौंप दी थी।