नागपुर में खौफनाक हुआ मई का महीना: 28 दिन में 14 मर्डर; पिछले साढ़े 3 साल का टूटा रिकॉर्ड
Nagpur Murder Cases News: नागपुर में 2026 के पहले 5 महीनों में 37 हत्याएं दर्ज हुईं। चौंकाने वाली बात यह है कि अधिकांश हत्याएं मामूली विवाद, गुस्से और भावनात्मक तनाव के कारण हुई हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर, हिंसा, विवाद, (सोर्स: सौजन्य AI)
Nagpur Violent Crime News: देश के सबसे अधिक अपराध प्रवृत्ति वाले महानगरों में पहले से ही पहचान बना चुके नागपुर में अब रोजमर्रा की हिंसक घटनाओं का प्रमाण खतरनाक रूप से बढ़ता दिखाई दे रहा है। संगठित अपराधों की तुलना में मामूली कारणों से आम नागरिकों द्वारा की जा रही हत्याओं की घटनाओं ने शहर को झकझोर कर रख दिया है। वर्ष 2026 के पहले 5 महीनों में शहर में कुल 37 हत्या की वारदातें दर्ज हुई हैं। इनमें से केवल मई महीने में ही 28 दिनों के भीतर 14 हत्याएं होने से चिंता व्यक्त की जा रही है।
पिछले साढ़े 3 वर्षों में यह सबसे अधिक मासिक हत्या आंकड़ा माना जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि अधिकांश हत्याएं किसी शातिर अपराधी द्वारा नहीं बल्कि क्षणिक गुस्से में आम लोगों द्वारा किए जाने की बात जांच में सामने आई है। पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, करीब 68 प्रतिशत हत्याएं भावनात्मक तनाव या मामूली विवादों से हुई हैं।
प्रेम संबंध, विवाहेत्तर संबंधों का शक, छेड़छाड़, पारिवारिक विवाद जैसे कारणों से 11 हत्याएं हुई, जबकि शराब पीने के दौरान हुए विवाद, रोडरेज, धक्का लगना, घूरकर देखना या कहासुनी जैसे मामूली कारणों से 14 लोगों की जान चली गई।
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आम नागरिक ही आरोपी
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी इस प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त की है। अधिकांश आरोपियों का पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होने की बात सामने आई है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि कई बार सामान्य व्यक्ति गुस्से में अपना नियंत्रण खो देता है और क्षणिक आवेश में हत्या हो जाती है।
चौंकाने वाले आंकड़े उजागर
शहर पुलिस की डायरी में जनवरी में 9, फरवरी में 2 और मार्च में 4 हत्या के मामले दर्ज हुए थे। हालांकि अप्रैल में यह आंकड़ा फिर से 9 तक पहुंच गया और मई महीने में हिंसा ने उग्र रूप धारण कर लिया। गर्मी के मौसम में बढ़ते तापमान और चिड़चिड़ापन को हिंसा बढ़ने के पीछे एक कारण मानने वाला पुलिस का पुराना सिद्धांत एक बार फिर चर्चा में आया है।
शराब, असहिष्णुता बने कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि आसानी से उपलब्ध होने वाले धारदार हथियार, शराब की बढ़ती लत, आर्थिक तनाव, कमजोर होती पारिवारिक व्यवस्था, सोशल मीडिया से बढ़ता अहंकार, टकराव और तुरंत बदला लेने की मानसिकता जैसी बातें हिंसा को बढ़ावा दे रही है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, 19 महानगरों में नागपुर की हत्या दर दूसरे स्थान पर थी, वर्ष 2024 में शहर में 88 हत्याएं दर्ज हुई थी। 2023 में यह आंकड़ा 79, जबकि 2022 में 65 था।
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गंभीर है हकीकत
नागपुर पुलिस प्रशासन ने एनसीआरबी के आंकड़ों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि शहर की आबादी अब 45 लाख के पार पहुंच चुकी है। हालांकि अपराधों में हो रही वृद्धि और सार्वजनिक स्थानों पर हो रही निर्मम हत्याओं ने नागरिकों में भय का चातावरण पैदा कर दिया है। 2 मई को हिंगना रोड इलाके में 40 वर्षीय अनीता नरगड़े की दिनदहाड़े हत्या के बाद शहर के विभिन्न हिस्सों में लगभग हर दूसरे दिन हत्या की घटनाएं सामने आईं।
