प्रदूषित नदी (AI Generated Image)
Nagpur Water Pollution: नागपुर सिटी में पानी के लिए कभी भी हाहाकार मच सकता है। जान जोखिम में है। शहर हो या फिर एनएमआरडीए क्षेत्र, सभी को अशुद्ध पानी को लेकर बार-बार नोटिस दिया जा रहा है, लेकिन सुधार के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। अधिकारियों की यह उदासीनता खतरे की घंटी बजाने लगी है।
सबसे ज्यादा खतरा उन क्षेत्रों में है जहां पर सीवर लाइन पुरानी हो चुकी है और इसका पानी पाइपलाइन में कभी भी प्रवेश कर सकता है। खराब सीवरलाइन से भूमिगत जल भी दूषित हो चुका है और बोर-कुएं का पानी पीना खतरे से कम नहीं है। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एमपीसीबी) दूषित नाली और नाग नदी को लेकर कई बार मनपा को नोटिस दे चुका है और मनपा है कि इसका जवाब देना भी उचित नहीं समझती है।
इंदौर में हुई घटना ने पूरे देश को सहमा दिया है। 20 लोगों को अपनी जान सिर्फ पानी के कारण गंवानी पड़ी है। इसके बाद सावनेर में भी सीवर और जलापूर्ति लाइन में प्रदूषण बढ़ने से 10 लोग बीमार पड़ गए थे। सौभाग्य से कोई बड़ी अनहोनी नहीं हुई।
इन घटनाओं ने सिटी के लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि पानी कैसा पीना है और कैसा पी रहे हैं। मनपा जो पानी आपूर्ति कर रही है, वह वास्तव में स्वच्छ है या फिर जानलेवा। प्रश्न बहुत बड़ा है और इसका जवाब मनपा के वरिष्ठ अधिकारियों को देना चाहिए।
जानकारों की मानें तो ओसीडब्ल्यू पेंच और कन्हान से पानी लेती है। ओसीडब्ल्यू के पास 5 ट्रीटमेंट प्लांट हैं, जो पानी को स्वच्छ करने का दावा करती है। इसके बाद पानी को गोरेवाड़ा से सिटी के अंदर पीने के लिए लाया जाता है। गोरेवाड़ा और खासकर कन्हान को लेकर सबसे अधिक चिंता है क्योंकि कन्हान नदी में बड़े पैमाने पर खापरखेड़ा और कोराडी विद्युत प्रकल्प की राख मिल रही है और ओसीडब्ल्यू और मनपा के पास इसे ट्रीट (स्वच्छ) करने के लिए कोई भी यंत्रणा नहीं है।
गोरेवाड़ा को भी गंदा कर दिया गया है और यहां जानवर से लेकर नाले तक का पानी छोड़ा जा रहा है। इसलिए इसकी स्वच्छता पर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञ इसे लेकर काफी चिंतित हैं। कई बार संबंधित विभागों से सवाल-जवाब भी किया गया, लेकिन कोई भी ठोस जवाब देने को तैयार नहीं है।
प्रदूषण नियंत्रण मंडल स्पष्ट रूप से कहता है कि अब वह वक्त आ गया है जब लोगों को वास्तु देखने की जरूरत नहीं है। लोगों को घर खरीदने के पहले यह देखना चाहिए कि अगल-बगल से सीवर लाइन या फिर नाला तो नहीं बह रहा है। अगर दोनों में से एक भी है, तो घर लेने से परहेज करना चाहिए। एमपीसीबी इसे लेकर काफी चिंतित है।
अधिकारियों का स्पष्ट रूप से कहना है कि सीवर लाइन ने भूमिगत जल को खराब कर दिया है। फ्लैट और व्यक्तिगत घर वालों को इस संबंध में निश्चित रूप से गंभीरता के साथ विचार करने की स्थिति आ चुकी है। बोर का पानी पीना या फिर कुएं का, इसके लिए लैब से रिपोर्ट लेनी ही चाहिए।
नदियों में सीवर लाइन का पानी छोड़ा जा रहा है। इससे नदी प्रदूषित हो चुकी है और जहां-जहां से गुजर रही है वहां खतरे की घंटी बज रही है। लक्ष्मीनगर जोन तक में पानी के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है। पश्चिम, दक्षिण, पूर्व, उत्तर में यह खतरा सबसे अधिक है। नाले में सीवर के पानी का ट्रीटमेंट नहीं हो रहा है। 403 एमएलडी पानी ही मनपा ट्रीट कर पा रहा है।
सीवर लाइन और प्रदूषित नदी, नालों को लेकर महानगर पालिका को कई बार नोटिस दिया गया परंतु एक बार भी नोटिस का जवाब देना अधिकारियों ने उचित नहीं समझा। एमपीसीबी बार-बार प्रदूषित जल को लेकर आगाह कर रहा है, लेकिन सुधार का कोई प्रयास दिखाई नहीं दे रहा है। इतना जरूर कहा जा सकता है कि नागपुर ‘डेंजर’ जोन में आ गया है। अभी पहल नहीं हुई, तो इंदौर जैसी घटना होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
– हेमा देशपांडे, क्षेत्रीय अधिकारी, एमपीसीबी
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कन्हान नदी से पानी शहर को भेजा जाता है। भले ही यहां पर ओसीडब्ल्यू का ट्रीटमेंट प्लांट है, लेकिन यह ट्रीटमेंट प्लांट फ्लाईएश को ट्रीट नहीं कर सकता। आश्चर्य की बात यह कि ट्रीटमेंट प्लांट के आसपास ही राख दिखाई देती है और फिर वहीं पानी भेजा जाता है। इस संबंध में कई लोगों ने मनपा और ओसीडब्ल्यू को आगाह किया परंतु सुविधाएं अब तक विकसित नहीं की जा सकी हैं।
लोग फ्लाईएश (राख) वाला पानी पी रहे हैं, जिसमें कई तरह के भारी मेटल हैं। इससे अनेक बीमारियों के होने का खतरा अत्यंत प्रबल है। मुझे लगता है कि मनपा और ओसीडब्ल्यू को जनहित में लोगों को विश्वास में लेने के लिए मासिक, त्रैमासिक रिपोर्ट जारी करनी ही चाहिए।
जिस प्रकार वायु प्रदूषण की जानकारी लोगों को कई सेंटरों के जरिए मिलती रहती है उसी तर्ज पर पानी शुद्धता को लेकर कुछ ठोस प्रणाली अपनाई जानी चाहिए परंतु मनपा और ओसीडब्ल्यू खामोश हैं और लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं।
– लीना बुधे, पर्यावरण विशेषज्ञ