नागपुर एयरपोर्ट (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Facial Recognition System: हवाई यात्रा के जरिए अपराधियों के भागने की कोशिशों पर लगाम लगाने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने नागपुर एयरपोर्ट पर एआई आधारित फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) लगाने का प्रस्ताव दिया है। यह सिस्टम यात्रियों के चेहरे को स्कैन कर देशभर के पुलिस डेटाबेस से मिलान करेगा।
रियल-टाइम चेकिंग : एयरपोर्ट में प्रवेश करते समय यात्रियों की तस्वीरें ली जाएंगी। यदि किसी यात्री का चेहरा नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के डेटाबेस में मौजूद किसी अपराधी से मिलता है तो सिस्टम तुरंत सुरक्षा कर्मियों को अलर्ट भेज देगा। एआई न केवल अपराधी की पहचान करेगा बल्कि उससे संबंधित पिछले अपराधों का विवरण भी सुरक्षा कर्मियों को प्रदान करेगा।
बारीकी से जांच : उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति पहले सोना तस्करी में पकड़ा गया है तो उसका डेटा सामने आते ही सीआईएसएफ उससे पूछताछ कर सकेगी। यदि कोई आरोपी जमानत पर यात्रा कर रहा है तो संक्षिप्त पूछताछ के बाद उसे जाने दिया जाएगा।
यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब नागपुर एयरपोर्ट का प्रबंधन बदलने वाला है।
जीएमआर ग्रुप की भूमिका : एयरपोर्ट के विकास की जिम्मेदारी अब जीएमआर ग्रुप के पास होगी। हालांकि केंद्रीय कैबिनेट से अंतिम मंजूरी मिलने का इंतजार है।
वर्तमान स्थिति : फिलहाल एयरपोर्ट का संचालन मिहान इंडिया लिमिटेड (एमआईएल) द्वारा किया जा रहा है जो भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) और महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी का संयुक्त उद्यम है।
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जल्द फैसले की उम्मीद : एमआईएल के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यदि प्रस्ताव उचित माध्यम से आता है तो वे इसे लागू करने के लिए तैयार हैं। जीएमआर के कार्यभार संभालने के बाद नई प्रणालियों की खरीद और दैनिक निर्णय लेने का अधिकार उनके पास होगा।
सूत्रों के अनुसार अधिकांश अपराधियों का रिकॉर्ड पुलिस के पास पहले से ही डिजिटल रूप में मौजूद है। ऐसे में यह एआई सिस्टम नागपुर एयरपोर्ट को अपराधियों के लिए एक ‘नो-गो जोन’ बना देगा।