नाग नदी चौड़ीकरण अधूरा, बारिश से पहले नदी सफाई के दावों की खुली पोल; नागपुर में कई हिस्से बदहाल
Nagpur Nag River Cleaning: मानसून से पहले नदी सफाई के मनपा दावों पर सवाल उठ रहे हैं। नाग और पीली नदी के कई हिस्सों में मलबा, जलपर्णी और संकरे जलमार्ग अब भी चिंता का विषय बने हुए हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
नाग नदी सफाई, पीली नदी, मनपा दावा, (सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur River Encroachment: नागपुर हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बारिश के पूर्व नदियों की सफाई होने का भले ही महानगरपालिका की ओर से पुरजोर दावा किया जा रहा हो किंतु उसका यह दावा खोखला साबित हो रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई जगहों पर अभी भी मलबा पड़ा हुआ है, जबकि कई जगहों पर नदियां इतनी संकरी हो गई हैं कि उन्हें नाले का स्वरूप प्राप्त हुआ है। हालांकि हाल ही में हाई कोर्ट ने 17 किमी लंबी नाग नदी को शुरुआत से लेकर अंत तक 18 मीटर चौड़ा करने तथा हाइड्रोलिक अध्ययन करने के आदेश काफी पहले दिए हैं।
एक ओर जहां नाग नदी के किनारे के अतिक्रमण साफ करने हैं उसी तरह से नदी का चौड़ाईकरण 18 मीटर तक करना है और कहीं भी पानी के प्रवाह में अवरोध न हो, इसका भी ध्यान रखना है। मनपा की ओर से तमाम मुद्दों पर कार्य जारी होने की वकालत की जा रही है किंतु अब तक कई हिस्सों की सफाई होना बाकी है। हालांकि कुछ हद तक नाग नदी की सफाई तो सुनिश्चित हो रही है किंतु पीली नदी की हालत काफी गंभीर है जहां जलपर्णी ने नदी को पूरी तरह से अपने चपेट में लिया हुआ है।
कहीं साफ तो कहीं खराब
अंबाझरी ओवरफ्लो के कारण सिटी में बाढ़ की स्थिति से निपटने के उद्देश्य से बारिश पूर्व ही कुछ सुरक्षात्मक उपाय करने की हिदायतें हाई कोर्ट की ओर से जारी किए गए थे। इसी श्रृंखला में काफी पहले से महानगरपालिका की ओर से नदी सफाई का अभियान शुरू किया गया। इस वर्ष न केवल सफाई बल्कि किनारों पर पड़े रहने वाले मलबे को निकालने की भी घोषणा की गई। तमाम निर्देशों के बाद भी नाग नदी कहीं साफ तो अधिकांश स्थानों पर खराब स्थिति में है, जबकि अब तक नदियों की 90 प्रतिशत सफाई होने का दावा मनपा की ओर से किया जा रहा है।
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संदेह के घेरे में कार्यप्रणाली
मनपा की ओर से भले ही 90 प्रतिशत नदियों की सफाई होने का दावा हो रहा हो लेकिन सफाई अभियान की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारियों की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रामदासपेठ जैसे इलाके में नाग नदी पूरी तरह से अवरुद्ध है। यदि रामदासपेठ जैसे इलाके की यह स्थिति है तो अन्य जगहों पर की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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आलम यह है कि झांसी रानी चौक से लेकर पंचशील चौक के बीच पुल के नीचे एक हिस्से में नाग नदी पूरी तरह से अवरुद्ध है। इस तरह के कई उदाहरण अलग-अलग इलाकों में हैं। यही कारण है कि अधिकारियों की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में है। जानकारों के अनुसार अधिकारी वर्ग केवल मुख्यालय में बैठकर सफाई को नापने का कार्य करता है, जबकि वास्तविकता कोसों दूर है।
सिटी में फिर बाढ़ का खतरा
हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद विशेष रूप से नाग नदी की सफाई को लेकर गंभीरता नहीं बरती गई है। आलम यह है कि कुछ स्थानों पर तो नाग नदी में ही एक हिस्से में मिट्टी से आधा हिस्सा ही पाट दिया गया है। कई जगहों पर नदी के किनारे पर ही मिट्टी के ढेर लगा दिए गए हैं। ऐसे में पहली ही बारिश में किनारों पर छोड़ी गई मिट्टी फिर नाग नदी के मुख्य प्रवाह में मिलने से इनकार नहीं किया जा सकता है। इस स्थिति में सिटी की जनता को फिर एक बार त्रासदी झेलने के लिए तैयार रहना पड़ेगा।
प्रशासन के सफाई के दावे
| क्रमांक | नदी | लंबाई (कि.मी.) |
|---|---|---|
| 1 | नाग नदी | 16.58 |
| 2 | पीली नदी | 17.42 |
| 3 | पोहरा नदी | 15.17 |
