नागपुर मनपा में स्टेशनरी कांड के बाद अब नया वेतन घोटाला; लकड़गंज जोन से एवजदारों की लिस्ट व ई-मेल गायब

Nagpur Fake Salary Payment: नागपुर मनपा में बोगस एवजदार सफाई कर्मचारियों के वेतन भुगतान में वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। लकड़गंज जोन से कर्मचारियों की सूची व भुगतान संबंधी ई-मेल भी गायब।
After the stationery scandal at the Nagpur Municipal Corporation, a new salary scam has now emerged; the list and emails regarding substitute workers have gone missing from the Lakadganj Zone.
नागपुर मनपा, सफाईकर्मी घोटाला, (सोर्स: सौजन्य AI)
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Nagpur Municipal Corporation: नागपुर महानगर पालिका में घोटालों की बात भले ही नई न हो, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद बार-बार नए घोटाले उजागर होते रहे हैं। इसी श्रृंखला में अब बोगस एवजदार सफाई कर्मचारियों के भुगतान में हुए वित्तीय भ्रष्टाचार के उजागर होते ही महानगर पालिका प्रशासन में कोहराम मचा हुआ है। मनपा के अधिकारियों के अनुसार स्टेशनरी घोटाले में कम्प्यूटर से हेराफेरी उजागर होने के बाद ई-गवर्नेस को पुख्ता किया गया था।

स्टेशनरी घोटाले में आईडी और पासवर्ड का गलत इस्तेमाल पाए जाने के बाद अब सीधे विभाग प्रमुख के मोबाइल में ओटीपी का विकल्प दिया गया। इसके बावजूद कारनामे रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। आलम यह है कि लकड़गंज जोन में फर्जी वेतन भुगतान का मसला उजागर होते ही जोनल कार्यालय में स्थित कम्प्यूटर से न केवल तमाम एवजदार सफाई कर्मचारियों की सूची गायब कर दी गई, चल्कि भुगतान के लिए बैंक को भेजे जाने वाले ई-मेल भी कम्प्यूटर से गायब हो गए हैं।

बैंक से ली जा रही है जानकारी

अधिकारिक सूत्रों के अनुसार मामला उजागर होते ही जांच की शुरुआत में जोनल कार्यालय से कम्प्यूटर जब्त कर लिए गए। कम्प्यूटर का डेटा खंगालने के बाद इसमें से बैंक को भेजी जाने वाली सूची गायब थी। यहां तक कि ई-मेल भी पूरी तरह से नष्ट किए जाने का खुलासा हुआ। चूंकि बैंक को ई-मेल भेजे गए थे, अतः बैंक के अधिकारियों को बुलाकर अब 2019 के बाद की भेजी गई सूची और ई-मेल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। बैंक के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उन्हें भेजे गए ई-मेल प्राप्त हो जाएंगे।

अब तक एफआईआर भी नहीं

जानकारों की मानें तो मनपा में अब तक का यह सबसे बड़ा घोटाला हो सकता है। प्राथमिक स्तर पर यह तय हो गया है कि इसमे वितीय गडबडी की जा चुकी है। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा अब तक एफआईआर नहीं कराई गयी, जांच कर रहे अधिकारियों की मानें तो प्राथमिक स्तर पर चल रही जांच में यह जानकारी प्राप्त की जा रही है कि यह घोटाला कब से हो रहा है। उसके बाद जिम्मेदारियां तय की जा सकती हैं।

गहराई तक भ्रष्टाचार की जड़ें

अधिकारिक सूत्रों की मानें तो एवजदार सफाई कर्मचारियों के भुगतान की विशेष प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया के तहत एवजदारों को भुगतान के लिए हर माह सूची तैयारी की जाती है। बिल क्लर्क द्वारा सूची तैयार किए जाने के बाद ई-गवर्नेस के माध्यम से जोनल ऑफिसर के पास जाती है। जोनल ऑफिसर की मंजूरी के बाद इसे जोन के सहायक आयुक्त के पास भेजा जाता है।

सहायक आयुक्त से मंजूरी मिलने के बाद ही इसे अकाउंट्स विभाग में भेजा जाता है। वित्तीय विभाग से भुगतान को हरी झंडी मिलने के बाद यह सूची वापस जोन में भेजी जाती है। वहां से सूची भुगतान के लिए बैंक में जाती है।

जांच कर रहे अधिकारियों का मानना है कि जोन में कौन से एवजदार काम कर रहे हैं, इसकी जानकारी इन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को है। यहां तक कितने एवजदार काम कर रहे है, इसका भी आंकड़ा अधिकारियों के पास है। ऐसे में फर्जी नाम सूची में जोड़ा जाना किसी आश्चर्य से कम नहीं है। यही कारण है कि इस भ्रष्टाचार की जड़े गहराई तक होने की आशंका जताई जा रही है।

सो रहे हैं सत्ता पक्ष और विपक्ष

भारी वित्तीय धांधली के इस मामले को लेकर मनपा में लगभग एक सप्ताह से हंगामा मचा हुआ है किंतु आश्चर्यजनक यह कि सत्ता पक्ष पूरी तरह से केवल एमएलसी चुनाव में जीत की रणनीति में जुटा हुआ है।

चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए सत्ता पक्ष के लगभग सभी वरिष्ठ पदाधिकारी मुंबई और गोवा की सैर पर हैं। हालांकि महापौर और कुछ पदाधिकारी अभी भी सिटी में हैं, किंतु उनकी ओर से भी इस मामले में कोई पूछ-परख होने का मामला उजागर नहीं हुआ। एक ओर जहां मनपा का सत्ता पक्ष पूरे मामले पर खामोश है, वहीं बड़ा मुद्दा होने के बाद भी विपक्षी खेमा भी चुप्पी साधे हुए है।

-नवभारत लाइव के लिए नागपुर से ललेन्द्र करवाड़े की रिपोर्ट

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