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बिना ठोस आधार के MPDA के तहत हिरासत अवैध, 13 लोगों को तत्काल रिहा करने का आदेश, पुलिस को झटका

MPDA Detention: नागपुर हाई कोर्ट ने ठोस आधार के अभाव में MPDA के तहत जारी हिरासत आदेशों को अवैध ठहराते हुए 13 लोगों को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया, जिससे पुलिस को बड़ा झटका लगा।

  • By आंचल लोखंडे
Updated On: Jan 18, 2026 | 09:30 PM

MPDA Detention:नागपुर हाई कोर्ट (सोर्सः सोशल मीडिया)

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Nagpur High Court: एमपीडीए के तहत पुलिस द्वारा जारी किए गए हिरासत (डिटेन्शन) आदेशों को चुनौती देते हुए सुरेश मनवर सहित 12 अन्य की ओर से बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ में याचिका दायर की गई थी।

लंबी सुनवाई और बहस के बाद न्यायमूर्ति अनिल पानसरे और न्यायमूर्ति निवेदिता मेहता की खंडपीठ ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों का हवाला देते हुए ‘महाराष्ट्र खतरनाक गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम, 1981’ (MPDA) के तहत जारी सभी हिरासत आदेशों को रद्द कर दिया। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि याचिकाकर्ताओं की किसी अन्य मामले में आवश्यकता नहीं है, तो सभी 13 व्यक्तियों को तत्काल रिहा किया जाए।

बिना दिमाग लगाए जारी किए गए आदेश

हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि राज्य सरकार ने हिरासत आदेश जारी करते समय उचित और ठोस कारणों का उल्लेख नहीं किया। अदालत ने टिप्पणी की कि सरकार ने पूरे महाराष्ट्र की परिस्थितियों को एक समान मान लिया, जो तथ्यों के प्रति यांत्रिक और लापरवाह दृष्टिकोण को दर्शाता है। कोर्ट के अनुसार, यह रवैया संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है।

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प्रक्रियात्मक खामियों पर सवाल

अदालत ने यह भी पाया कि हिरासत की पुष्टि से संबंधित आदेश (धारा 12 के तहत) न केवल बिना ठोस कारणों के पारित किए गए थे, बल्कि उन्हें सक्षम प्राधिकारी के बजाय एक अनुभाग अधिकारी द्वारा संप्रेषित किया गया, जो नियमों के विपरीत है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि धारा 3 के तहत शक्तियों का प्रत्यायोजन ही अवैध है, तो पूरी हिरासत प्रक्रिया प्रारंभ से ही शून्य मानी जाएगी।

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला

खंडपीठ ने ‘अक्षय भास्कर सहारे बनाम महाराष्ट्र राज्य’ मामले के फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें समान आधारों पर MPDA के तहत हिरासत आदेश रद्द किए गए थे। इस निर्णय को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) को सुप्रीम कोर्ट ने 21 नवंबर 2025 को खारिज कर दिया था।

हाई कोर्ट ने सुरेश तुकाराम मनवर, राजू भोजू पवार, गजानन अशोक दहाले, मनोज चैत्रम चिमनकर, संकेत दिलीप कानेरे, नम्रता नीलेश नीले सहित कुल 13 याचिकाकर्ताओं की रिट याचिकाएं स्वीकार कर लीं।

Mpda detention illegal high court orders release nagpur

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Published On: Jan 18, 2026 | 09:30 PM

Topics:  

  • Bombay High Court
  • Maharashtra
  • Nagpur News
  • Nagpur Police

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