370 करोड़ रुपए के घोटाले की ‘जांच’ का इनाम? विवादों में घिरे मॉयल के नए सीएमडी विश्वनाथ सुरेश!
Nagpur High Court Petition: मॉयल लिमिटेड के नवनियुक्त सीएमडी विश्वनाथ सुरेश की नियुक्ति को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। नियुक्ति को लेकर उठे विवाद पर अदालत ने जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया है।
- Written By: अंकिता पटेल
हाई कोर्ट सीएमडी विश्वनाथ सुरेश की नियुक्ति विवाद(सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur Vishwanath Suresh Appointment Controversy: नागपुर देश की सबसे बड़ी मैंगनीज उत्पादक और ‘मिनीरत्न’ कंपनी मॉयल लिमिटेड के नवनियुक्त डायरेक्टर (सीएमडी) विश्वनाथ सुरेश की नियुक्ति बड़े विवादों में घिर गई है। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड में अपने चेयरमैन-कम-मैनेजिंग पिछले कार्यकाल के दौरान लगभग 370 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में शामिल होने और लोकपाल व सीबीआई की जांच का सामना करने के बावजूद उन्हें मॉयल के शीर्ष पद पर नियुक्त किए जाने को लेकर हाई कोर्ट में ‘मॉयल जनशक्ति मजदूर संघ, बालाघाट’ की ओर से याचिका दायर की गई।
बुधवार को याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने प्रतिवादियों को जवाब दायर करने के लिए अंतिम मौका देते हुए 10 जुलाई तक के लिए सुनवाई स्थगित कर दी। याचिकाकर्ता की ओर से अधि। अरविंद वाघमारे ने पैरवी की।
सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना
याचिका के अनुसार विश्वनाथ सुरेश जब सेल में चीफ जनरल मैनेजर (सेल्स) और क्षेत्रीय प्रबंधक (उत्तरी क्षेत्र) के पद पर कार्यरत थे, तब उन पर पद का दुरुपयोग करने का गंभीर आरोप लगा था। आरोप है कि उन्होंने सरकारी परियोजनाओं के नाम पर मेसर्स एवन स्टील इंडस्ट्रीज और मेसर्स वेंकटेश इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स जैसी निजी कंपनियों को बेहद सस्ते दामों पर उच्च गुणवत्ता वाला स्टील बेचा।
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इन कंपनियों ने बाद में इस स्टील को खुले बाजार में भारी मुनाफे के साथ बेचा जिससे सरकारी खजाने और SAIL को 263 करोड़ रुपये से लेकर 370 करोड़ रुपये तक का भारी नुकसान हुआ।
पहले निलंबन, बाद में किया रद्द
याचिका में बताया गया कि इस महाघोटाले का खुलासा एक व्हिसलब्लोअर द्वारा किया गया था जिसके बाद भारत के लोकपाल ने इस मामले का संज्ञान लिया।लोकपाल की पूर्ण पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 10 जनवरी 2024 और 2 जुलाई 2025 को दिए गए अपने आदेशों में नागपुर सीबीआई को विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया था।
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लोकपाल के आदेश के बाद सुरेश सहित कई अन्य अधिकारियों को 19 जनवरी 2024 को निलंबित भी किया गया था। हालांकि बाद में जून 2024 में उनका निलंबन रद्द कर दिया गया लेकिन जांच अभी भी जारी है।
