महाराष्ट्र: मनपा चुनाव फिर होगा स्थगित! प्रक्रिया को हाई कोर्ट में चुनौती, जनहित याचिका दायर

Maharashtra Local Body Elections: महाराष्ट्र में सालों के इंतजार के बाद सुप्रीम कोर्ट ने निकाय चुनाव को जल्द-से-जल्द कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन अब यह एक बार फिर टलने के आसार दिखाई दे रहे है।
Maharashtra Local Body Elections: महाराष्ट्र में सालों के इंतजार के बाद सुप्रीम कोर्ट ने निकाय चुनाव को जल्द-से-जल्द कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन अब यह एक बार फिर टलने के आसार दिखाई दे रहे है।
हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
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Nagpur News: महानगरपालिका के चुनाव को लेकर भले ही प्रक्रिया काफी आगे बढ़ गई है और हाल ही में राज्य चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची का प्रारूप भी घोषित करने का खुलासा किया गया है। इसके बावजूद महाराष्ट्र महानगरपालिकाओं की वर्तमान मतदान प्रक्रिया और प्रभाग प्रणाली को चुनौती देते हुए अधिवक्ता मृणाल चक्रवर्ती ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की।

गुरुवार को याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिका में विधि एवं न्याय विभाग को प्रतिवादी बनाए जाने पर हाई कोर्ट ने आपत्ति जताते हुए दीपावली अवकाश के बाद तक के लिए सुनवाई स्थगित कर दी। मनपा द्वारा अधिवक्ता जैमिनी कासट ने पैरवी की। याचिका में राज्य सरकार के नगर विकास विभाग और राज्य चुनाव आयोग को प्रतिवादी बनाया गया।

चार-वार्ड प्रणाली और मतदान पर प्रतिबंध

याचिका पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता मृणाल चक्रवर्ती ने कहा कि महाराष्ट्र राज्य विधानमंडल ने 18 मार्च 2024 को महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम में संशोधन किया और चार-वार्ड प्रणाली लागू की। इसके बाद 10 जून 2025 को वार्ड गठन के लिए आदेश जारी किया गया। राज्य चुनाव आयोग ने 9 सितंबर 2025 को महानगरपालिका चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) के उपयोग की जानकारी दी। आरक्षण योजनाओं के अनुसार, उम्मीदवारों को 4 समूहों में वर्गीकृत किया गया है और मतदान के लिए मशीनों के 4 सेट का उपयोग किया जाता है। याचिकाकर्ता के अनुसार सबसे बड़ी समस्या यह है कि प्रत्येक मतदाता को एक वर्गीकृत समूह से केवल एक उम्मीदवार के लिए वोट डालना आवश्यक है। यदि कोई मतदाता एक वर्गीकृत समूह से एक से अधिक उम्मीदवार को वोट देना चाहता है तो मशीन केवल एक वोट स्वीकार करती है जो कि वोट देने की स्वतंत्रता (अभिव्यक्ति) में प्रतिबंध है।

संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन

याचिका में तर्क दिया गया है कि मतदान मतदाता की अभिव्यक्ति है। संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) में निहित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को अनुच्छेद 19 के खंड (2) में उल्लेखित कारणों के अलावा किसी अन्य कारण से प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता है।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि मतदाता को अपनी पसंद के उम्मीदवार के प्रदर्शन में प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता है। याचिका के अनुसार संविधान के अनुच्छेद 254 के तहत एक ही निर्वाचन क्षेत्र में एक से अधिक बार मतदान करने का प्रावधान करने वाला कोई भी कानून लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 62(4) के विपरीत है और इस प्रकार शून्य (void) है।

याचिकाकर्ता की प्रमुख मांगें

  • राज्य चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के अनुपालन में चुनाव कराने का निर्देश दिया जाए।
  • प्रत्येक वार्ड के लिए विषम संख्या में पार्षदों का चुनाव सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाए।
  • महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम के उन सभी प्रावधानों को संविधान के विपरीत घोषित किया जाए जो 7वीं अनुसूची की सूची II की प्रविष्टि 5 का उल्लंघन करते हैं।
  • निर्वाचन क्षेत्र में एक से अधिक बार मतदान की योजना को शून्य घोषित किया जाए।
  • अंतरिम राहत के रूप में महानगरपालिका चुनावों की तैयारियों और संचालन को निलंबित करने का निर्देश दिया जाए।
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