नागपुर विधान परिषद चुनाव: कांग्रेस के लिए बाहरी नहीं, अंदरूनी चुनौती बड़ी; 18 जून को मतदान
Nagpur Vidhan Parishad Election: नागपुर स्थानीय निकाय विधान परिषद सीट पर BJP के राजीव पोतदार व कांग्रेस के अतुल लोंढे आमने-सामने हैं। चुनाव में कांग्रेस के लिए अपने वोट बैंक को एकजुट रखना बड़ी चुनौती।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर विधान परिषद, स्थानीय निकाय चुनाव,(सोर्स: सौजन्य AI)
Nagpur Legislative Council Local Body Election: नागपुर विधान परिषद की नागपुर स्थानीय निकाय सीट के लिए 18 जून को मतदान होना है। उम्मीदवार भी तय हो गए हैं। महायुति की ओर से भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी राजीव पोतदार मैदान हैं। उनकी सीधी टक्कर कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार अतुल लोंढे से होना है। चूंकि जिले की निकाय संस्थाओं में बीजेपी के सदस्यों की संख्या कुल मतदाताओं का दो तिहाई है, इसलिए उसे चिंता नहीं है। कांग्रेस यह चुनाव निर्विरोध नहीं होने देना चाहती थी, इसलिए उसने अपना उम्मीदवार मैदान में उतारा।
कहा तो यह जा रहा है कि महाविकास आघाड़ी के घटक दलों उद्धव शिवसेना व राकां शरद पवार पार्टी के सदस्य कांग्रेस उम्मीदवार के साथ ईमानदारी से रहें तो मुकाबला सम्मानजनक हो सकता है लेकिन कांग्रेस में भी भीतरी गुटबाजी और शिवसेना यूबीटी के स्थानीय नेताओं की नाराजगी के चलते कांग्रेस उम्मीदवार को अपने ही हिस्से के वोट को बचाना भारी चुनौती साबित होगी।
शिवसेना ने जता दी है अपनी नाराजगी
विप चुनाव के लिए उम्मीदवारी का नामांकन दर्ज करते समय राकां शरद पवार गुट के नेता तो उपस्थित थे लेकिन शिवसेना का कोई भी नेता शामिल नहीं हुआ। कहा जा रहा है कि शिवसेना ने अपने अंदाज में नाराजगी जता दी है। दरअसल शिवसेना के स्थानीय पदाधिकारी मनपा चुनाव में कांग्रेस द्वारा धोखा दिये जाने के बाद से नाराज है।
सम्बंधित ख़बरें
सिर्फ राजनीति ही नहीं, कविता, एक्टिंग और मॉडलिंग का भी शौक… 56वें जन्मदिन पर जानें अनटोल्ड देवेंद्र फडणवीस
राज्यभर FDA की बड़ी कार्रवाई, गुटखा, दूध और खाद्य सामग्री जब्त, 103 प्रतिष्ठानों की जांच पूरी
बेस्ट बस हादसों पर गंभीर सवाल; ड्राइवर नहीं, सिस्टम है हादसों का जिम्मेदार, कागजों में फिट, सड़क पर हैं अनफिट
NEET UG 2026 परिणाम पर छत्रपति संभाजीनगर में उठे बड़े सवाल, दो छात्रों ने कम अंक आने का दावा, 23 को सुनवाई
मनपा चुनाव में सेना 12 सीटों पर समझौता करने राजी हो गई थी लेकिन कांग्रेस ऐन वक्त पर स्वतंत्र चुनाव लड़ने की घोषणा कर गठबंधन तोड़ दिया था। उसके पहले विधानसभा चुनाव में रामटेक सीट से सेना ने विशाल बरबटे को मैदान में उतारा था लेकिन कांग्रेस ने यहां भी धोखा दिया, कांग्रेस के जिलाध्यक्ष राजेन्द्र मुलक भी बगावत कर मैदान में उतर गए।
इतना ही नहीं पूर्व मंत्री सुनील केदार, सांसद श्याम बर्वे ने भी मुलक का साथ दिया था और बरबटे को शिंदे सेना के उम्मीदवार आशीष जायसवाल से पराजय का सामना करना पड़ा था। कहा जा रहा है कि जिले में उद्धव सेना के कुल 14 वोट हैं लेकिन ये कांग्रेस को सबक सिखाने के मूड में है।
ठाकरे गुट उदासीन
उम्मीदवार तय करने की प्रक्रिया में पूर्व शहर अध्यक्ष व विधायक विकास ठाकरे खुद कहीं नजर नहीं आए, रवि भवन में आयोजित बैठक में सुनील केदार, सांसद श्यामकुमार बर्वे, नितिन राऊत सहित अन्य नेता थे लेकिन ठाकरे गुट से मनपा में विपक्ष नेता संजय महाकालकर तक ने दूरी बनाए रखी।
यह भी पढ़ें:- गर्मी से राहत, लेकिन सड़कों पर आफत, नासिक में पहली बारिश का असर; जलभराव और बिजली कटौती से लोग परेशान
चर्चा है कि नये शहर अध्यक्ष के चयन के बाद से ठाकरे गुट ने बैठकों से भी दूरी बना ली है। उनके नेतृत्व में मनपा चुनाव में 34 पार्षद चुनकर आए हैं। अब विप चुनाव में ये सारे के सारे कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में पड़ेंगे या नहीं यह समय ही बताएगा।
