सोमेश्वर मंदिर रास्ता विवाद (सौजन्य-नवभारत)
Someshwar Temple Jalalkheda: तीन साल से जलालखेडा के ऐतिहासिक और जागृत श्री सोमेश्वर मंदिर किल्ला देवस्थान के पोच रास्ते का विवाद लंबित था। यह रास्ता रुपेश चौरे के खेत से होकर जाता था, जिसके कारण विवाद उत्पन्न हुआ था। हालांकि कई प्रयासों के बावजूद इस मुद्दे का समाधान नहीं निकल पा रहा था, लेकिन काटोल-नरखेड़ विधानसभा क्षेत्र के विधायक चरणसिंग ठाकुर ने इस मुद्दे को प्रभावी ढंग से हल किया।
श्री सोमेश्वर किल्ला देवस्थान एक प्रमुख श्रद्धा स्थल है, जहां महाशिवरात्रि के दिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। केवल नागपुर जिले से ही नहीं, बल्कि विदर्भ के विभिन्न जिलों से भी श्रद्धालु यहां बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। यहां साल भर धार्मिक कार्यक्रम, अभिषेक, उत्सव और यात्राओं का आयोजन होता है, जिसके कारण रास्ते का विवाद अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया था।
विधायक ठाकुर ने प्रशासन, गांववासियों और संबंधित किसान के बीच समन्वय स्थापित कर सभी पक्षों को विश्वास में लेते हुए समाधान निकाला। इस फैसले से श्रद्धालुओं को एक सुलभ और सुरक्षित रास्ता मिल गया है और संबंधित गरीब किसान को भी न्याय मिलते हुए सामाजिक सौहार्द बना है।
इस फैसले से जलालखेडा गांव में खुशी का माहौल बन गया है और गांववासियों और श्रद्धालुओं ने विधायक चरणसिंग ठाकुर का दिल से आभार व्यक्त किया। गांववासियों ने कहा, एक गरीब परिवार को न्याय मिला, यह खुशी हमें जीवन भर याद रहेगी।
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इस सफल समाधान में भाजपा नेता दिलेश ठाकरे, ग्रापं सदस्य मयूर दंढारे, ग्रापं के प्रभारी सरपंच मयूर सोनोने, गोलू मेहतकर, गोलू चौरे सहित प्रशासन के उपविभागीय अधिकारी पियूष चिवंडे, नायब तहसीलदार डांगोरे, थाना प्रभारी तृषार चव्हाण, मंडल अधिकारी डी.एस. नाखले और पटवारी दवंडे का विशेष योगदान रहा।
इस फैसले से भविष्य में महाशिवरात्रि और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन बिना किसी समस्या के होगा और यह निर्णय विकास और श्रद्धा के बीच संतुलन स्थापित करने वाला साबित होगा, यह भावना नागरिकों में व्यक्त की जा रही है।
पिछले तीन सालों में हमने कई परेशानियों और कठिनाइयों का सामना किया। लेकिन विधायक चरणसिंग ठाकुर ने जो वादा किया, वह आखिरकार पूरा किया। इस खुशी को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। इस संघर्ष में कई लोगों ने सहयोग किया, लेकिन मयूर दंढारे और मयूर सोनोने ने आखिरी तक संघर्ष किया, उनके प्रति मैं आभारी हूं।
– रुपेश चौरे, किसान, जलालखेड़ा