विदर्भ पर मेहरबान हुआ रेलवे, गोंदिया-डोंगरगढ़ और वर्धा-भुसावल चौथी लाइन को दी मंजूरी
Nagpur News: पिछले कुछ वर्षों में नागपुर क्षेत्र देश के प्रमुख रेल जंक्शनों में तेजी से उभर रहा है। भारतीय रेलवे ने गोंदिया-डोंगरगढ़ और वर्धा-भुसावल चौथी लाइन को मंजूरी दे दी है।
- Written By: प्रिया जैस
नागपुर रेलवे (फाइल फोटो)
Nagpur Railways: भारतीय रेल के बुनियादी ढांचे को और सुदृढ़ करते हुए केंद्र सरकार ने मंगलवार को 4 महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी जिनकी कुल लागत लगभग ₹24,634 करोड़ है। इनमें से 2 प्रोजेक्ट विदर्भ के लिए हैं।
कैबिनेट ने दक्षिण-पूर्व-मध्य रेलवे के नागपुर मंडल के तहत गोंदिया से डोंगरगढ़ के बीच 84 किलोमीटर तथा मध्य रेलवे नागपुर मंडल के तहत वर्धा से भुसावल तक 314 किलोमीटर लंबी चौथी रेल लाइन को मंजूरी प्रदान की। दोनों प्रोजेक्ट्स का उद्देश्य रेल नेटवर्क में क्षमता वृद्धि, ट्रेनों की रफ्तार और परिचालन दक्षता को बेहतर करना है।
क्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम
पिछले कुछ वर्षों में नागपुर क्षेत्र देश के प्रमुख रेल जंक्शनों में तेजी से उभर रहा है। नागपुर-दुर्ग-रायपुर और नागपुर-भुसावल खंड पर ट्रेनों की संख्या में निरंतर वृद्धि हुई है। मौजूदा 2 और 3 लाइनों के बावजूद मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों के परिचालन में देरी की समस्या बनी हुई है। ऐसे में नये चौथे ट्रैक से इन रूटों पर रेल यातायात की क्षमता में कम से कम 40 प्रतिशत की वृद्धि होगी। इससे ट्रेनों का ठहराव, ब्लॉक समय और प्रतीक्षा घटेगी जिससे परिचालन सुचारु और समयबद्ध हो सकेगा।
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गोंदिया-डोंगरगढ़ लाइन : औद्योगिक क्षेत्र को सहारा
- गोंदिया से डोंगरगढ़ के बीच यह 84 किलोमीटर का खंड दक्षिण- पूर्व-मध्य रेलवे के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक है।
- इस सेक्शन से नागपुर, रायपुर, बिलासपुर और हावड़ा की दिशा में भारी संख्या में माल और यात्री ट्रेनें गुजरती हैं।
- वर्तमान में यहां आंशिक रूप से तैयार हो चुकी तीसरी लाइन के साथ ट्रेनों का दबाव बहुत अधिक है।
- कई बार मालगाड़ियों को घंटों सिग्नल का इंतजार करना पड़ता है।
- चौथी लाइन बनने से यह समस्या लगभग समाप्त हो जाएगी।
- इस प्रोजेक्ट से गोंदिया, राजनांदगांव, डोंगरगढ़ जैसे प्रमुख औद्योगिक और कृषि बाजारों को तेज रेल संपर्क मिलेगा।
- कृषि उत्पादों, सीमेंट, इस्पात और कोयला परिवहन में सुविधा बढ़ेगी।
वर्धा-भुसावल लाइन : विदर्भ की अर्थव्यवस्था को नई ताकत
- वर्धा से भुसावल के बीच 314 किलोमीटर का खंड मध्य रेलवे का अत्यंत महत्वपूर्ण माल व यात्री मार्ग है।
- यह लाइन नागपुर से मुंबई को जोड़ने वाला मुख्य गलियारा है जिस पर हर दिन 200 से अधिक ट्रेनें चलती हैं।
- वर्तमान में इस मार्ग पर रेल यातायात की ऑक्यूपेंसी लगभग 130 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।
- चौथी लाइन बनने से रेल यातायात का दबाव कम होगा।
- साथ ही विदर्भ क्षेत्र के औद्योगिक व कृषि उत्पादों के परिवहन में तेजी आएगी।
- यह प्रोजेक्ट महाराष्ट्र के अमरावती, अकोला, जलगांव, भुसावल जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं भी बढ़ाएगा।
यात्रियों को मिलेगा प्रत्यक्ष लाभ
दोनों परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद लंबी दूरी की गाड़ियों की औसत गति में वृद्धि होगी। रेल विभाग के अनुसार चौथी लाइन के शुरू होने से एक्सप्रेस और सुपरफास्ट गाड़ियों के ठहराव समय में कमी आएगी। साथ ही ट्रेनों की समयपालन में सुधार होगा और रद्द या विलम्बित गाड़ियों की संख्या घटेगी। यात्रियों को अधिक आरामदायक और तेज सफर का अनुभव मिलेगा। खासकर नागपुर, गोंदिया, भंडारा, वर्धा, अकोला और जलगांव जिलों के लोगों को सीधा लाभ होगा।
स्थानीय विकास को मिलेगा प्रोत्साहन
रेल परियोजनाओं का असर सिर्फ रेलवे तक सीमित नहीं रहता। बड़े रेल प्रोजेक्ट्स स्थानीय रोजगार सृजन का भी माध्यम बनते हैं। निर्माण के दौरान सैकड़ों इंजीनियरों, श्रमिकों और स्थानीय ठेकेदारों को काम मिलेगा। इसके अलावा नई लाइन से जुड़े स्टेशन क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स हब, वेयरहाउसिंग, लघु उद्योग पार्क जैसी गतिविधियां भी विकसित हो सकेंगी। इसके साथ ही तेज रेल कनेक्टिविटी से पर्यटन स्थलों और शिक्षा केंद्रों तक पहुंच भी आसान होगी।
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रेल मंत्रालय का दीर्घकालिक दृष्टिकोण
रेल मंत्रालय का उद्देश्य आने वाले वर्षों में ‘मल्टीलाइन रेल कॉरिडोर नेटवर्क’ तैयार करना है, ताकि माल व यात्री दोनों की बढ़ती जरूरतों को पूरा किया जा सके। गोंदिया-डोंगरगढ़ और वर्धा-भुसावल चौथी लाइन इसी दृष्टिकोण का हिस्सा हैं। यह परियोजनाएं प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना से भी जुड़ी हैं जिनसे रेल-सड़क-बंदरगाह-हवाई मार्गों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा।
