IIT Mumbai: अब नागपुर यूनिवर्सिटी में खनिजों पर होगा रिसर्च, मध्यवर्ती केंद्र ने दी मान्यता
सरकार के राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (NCMM) के तहत आईआईटी मुंबई को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में मान्यता मिलने के बाद विवि को शैक्षणिक अनुसंधान के लिए एक मध्यवर्ती केंद्र के रूप में मान्यता मिली।
- Written By: प्रिया जैस
विश्वविद्यालय (सौजन्य-नवभारत)
Nagpur News: स्थानीय विश्वविद्यालय को देश में महत्वपूर्ण खनिजों पर अनुसंधान के लिए एक मध्यवर्ती केंद्र के रूप में मान्यता मिली है। आईआईटी मुंबई स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से खनिजों पर संशोधन विवि के भूगर्भशास्त्र विभाग में किया जाएगा। सरकार के राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (एनसीएमएम) के तहत आईआईटी मुंबई को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में मान्यता मिलने के बाद विवि को शैक्षणिक अनुसंधान के लिए एक मध्यवर्ती केंद्र के रूप में मान्यता मिली है।
खनन मंत्रालय के सचिव कंठा राव के हाथों आईआईटी मुंबई में पहले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उद्घाटन किया गया। आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा हेतु तकनीकी विकास के लिए अत्यावश्यक खनिजों को महत्वपूर्ण (क्रिटिकल) खनिज के रूप में पहचाना जाता है। भारत में खासतौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स व उच्च तकनीक बैटरी व अक्षय ऊर्जा उद्योग में खनिजों का उपयोग किया जाता है। राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन देश की एक महत्वाकांक्षी योजना है। इसे जनवरी 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी।
बजट में अधिकृत घोषणा
इसके लिए 2024-25 के केंद्रीय बजट में अधिकृत घोषणा भी की गई है। इसमें 7 वर्षों के लिए योजना को करीब 34,300 करोड़ रुपये मंजूर किये गये हैं। राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन का उद्देश भारत के महत्वपूर्ण खनिजों के आयात की निर्भरता को कम कर स्वदेशी संशोधन, खनन, प्रक्रिया व पुर्नपयोग बढ़ाना है। विशेषज्ञ, अभियंता, भूगर्भशास्त्रज्ञ, अर्थशास्त्री, नीति निर्धारक आदि के सहयोग से महत्वपूर्ण खनिजों के आयात पर निर्भरता कम होगी।
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‘हब और स्पोक’ संरचना
राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के तहत मान्यता प्राप्त सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) एक हब के रूप में कार्य करेगा और शैक्षणिक केंद्रीय अनुसंधान केंद्रों और उद्योग के साथ समन्वय करेगा। शैक्षणिक अनुसंधान केंद्र अनुसंधान करेंगे, खनिजों का अन्वेषण करेंगे और उनके स्रोतों का अध्ययन करेंगे। आईआईटी मुंबई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस होगा और शैक्षणिक अनुसंधान केंद्रों के रूप में राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय, आईआईटी कानपुर, आईआईटी भुवनेश्वर, आईआईएसईआर पुणे, सीएसआईआर-एनआईआरआई नागपुर, सीओईपी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, एमिटी विश्वविद्यालय बेंगलुरु और शिवाजी विश्वविद्यालय कोल्हापुर शामिल हैं।
औद्योगिक केंद्रों में हिंडाल्को, ओला, एवरग्रीन रीसाइकिल करो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, मटेरियल रीसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एमईसीएल, लोहुम, एटेरो रीसाइक्लिंग प्राइवेट लिमिटेड, एस्ट्राक्स इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड आदि शामिल हैं।
विश्वविद्यालय की भूमिका
विवि के स्नातकोत्तर भूविज्ञान विभाग के प्रमुख डॉ. कीर्तिकुमार रणदिवे को आईआईटी मुंबई में आयोजित समारोह में आमंत्रित किया गया था। आईआईटी मुंबई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के सहयोगी होने के नाते डॉ. रणदिवे ने इस बैठक में विश्वविद्यालय की भूमिका के बारे में जानकारी दी। यहां शोधकर्ताओं का समूह पिछले कुछ समय से महत्वपूर्ण खनिजों पर काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि प्लैटिनम समूह के खनिजों और दुर्लभ मृदा तत्वों पर शोध किया गया है। डेक्कन के पठार में प्लैटिनम समूह के खनिजों की खोज पर कई शोध पत्र प्रकाशित हुए हैं।
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डॉ. रणदिवे ने बताया कि शोध उन चट्टानों पर आधारित होगा जो खनिजों का स्रोत हैं। खनन मंत्रालय द्वारा 16 सितंबर को हैदराबाद में आयोजित एक दिवसीय सेमिनार में सभी हब और अनुसंधान केंद्रों को अपने शोध प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया है। खनन एवं कोयला मंत्री इस सेमिनार का उद्घाटन करेंगे। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि पूरी प्रक्रिया तेज गति से चल रही है और भारत जल्द ही महत्वपूर्ण खनिजों में आत्मनिर्भर हो सकेगा।
